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परिवहन मंत्री दयाशंकर ने मृतक सहायता राशि बढ़ाई, रोडवेज कर्मियों की मुश्किलें कम होने को आई

रोडवेज कर्मियों के आश्रितों को 20 हजार रुपए की त्वरित सहायता, नहीं होगी रिकवरी

  • अंतिम संस्कार सहायता राशि 5 से बढ़ाकर 20 हजार हुई
  • नियमित, संविदा और आउटसोर्स सभी कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
  • पहली बार खत्म हुई ‘रिकवरी’ की अमानवीय व्यवस्था
  • परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने दी योजना की विस्तृत जानकारी
  • निदेशक मंडल के फैसले से बदली व्यवस्था की दिशा
  • कर्मचारी संगठनों के लंबे संघर्ष का मिला परिणाम
  • महंगाई के दौर में राहत अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त मदद
  • रोडवेज प्रबंधन की संवेदनशीलता पर कर्मचारियों ने जताया आभार

लखनऊ/बलिया। अक्सर सरकारी व्यवस्थाओं पर यह आरोप लगता रहा है कि वे संवेदनहीन होती है। कागजों में योजनाएं बनती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इंसान कहीं पीछे छूट जाता है। खासकर तब, जब कोई कर्मचारी अपनी ड्यूटी निभाते हुए या सेवा काल के दौरान असमय दुनिया छोड़ देता है, तो उसके पीछे छूट जाने वाले परिवार के सामने आर्थिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक संकट भी खड़ा हो जाता है। ऐसे कठिन समय में सरकार या संस्थान की भूमिका केवल नियमों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें संवेदना और त्वरित सहयोग की झलक भी दिखनी चाहिए।
इसी संदर्भ में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम द्वारा लिया गया निर्णय एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है। अब तक यह व्यवस्था थी कि किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रितों को अंतिम संस्कार के लिए मात्र 5 हजार रुपए की आकस्मिक सहायता दी जाती थी, और विडंबना यह थी कि बाद में यही राशि मृतक के वेतन या देयकों से वसूल भी ली जाती थी। यानी जिस परिवार पर दुख का पहाड़ टूटा है, उसी से राहत के नाम पर दी गई मदद वापस ले ली जाती थी। यह व्यवस्था लंबे समय से सवालों के घेरे में थी। इस अमानवीय और विरोधाभासी व्यवस्था को समाप्त करते हुए परिवहन निगम ने बड़ा फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने घोषणा की है कि अब मृतक कर्मचारी के आश्रितों को अंतिम संस्कार के लिए 20 हजार रुपए की तत्काल सहायता दी जाएगी और सबसे महत्वपूर्ण बात इस राशि की कोई रिकवरी नहीं होगी। यह निर्णय न केवल आर्थिक सहायता का दायरा बढ़ाता है, बल्कि सरकारी व्यवस्था के मानवीय चेहरे को भी सामने लाता है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब महंगाई अपने चरम पर है और 5 हजार रुपए में अंतिम संस्कार जैसे आवश्यक कार्य भी पूरे कर पाना मुश्किल हो गया था। कर्मचारी संगठनों ने भी लंबे समय से इस मुद्दे को उठाया था कि सहायता राशि को बढ़ाया जाए और रिकवरी की प्रथा को खत्म किया जाए। आखिरकार उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए परिवहन निगम के निदेशक मंडल ने यह निर्णय लिया, जो अब लागू कर दिया गया है। इस फैसले के पीछे केवल प्रशासनिक सोच नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण भी दिखाई देता है। रोडवेज के चालक और परिचालक हर दिन सैकड़ों यात्रियों की जिम्मेदारी उठाते हैं, जोखिम भरे हालात में काम करते हैं और कई बार दुर्घटनाओं का सामना भी करते हैं। ऐसे में यदि किसी कारणवश उनकी मृत्यु हो जाती है, तो उनके परिवार को तत्काल राहत देना न केवल एक दायित्व है, बल्कि एक संवेदनशील समाज की पहचान भी है।
यह निर्णय यह भी दर्शाता है कि जब कर्मचारी संगठन, प्रशासन और सरकार एक साथ संवाद करते हैं, तो सकारात्मक बदलाव संभव है। अब यह देखना होगा कि इस तरह की मानवीय पहल अन्य विभागों में भी लागू होती हैं या नहीं, ताकि सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को संकट की घड़ी में वास्तविक सहारा मिल सके।

पुरानी व्यवस्था राहत के नाम पर बोझ

उत्तर प्रदेश परिवहन निगम का हालिया निर्णय केवल एक प्रशासनिक आदेश भर नहीं है, बल्कि यह उस सोच में बदलाव का संकेत है, जो लंबे समय से सरकारी तंत्र में अपेक्षित था। यह फैसला उस पीड़ा को समझने की दिशा में उठाया गया कदम है, जिसे अक्सर फाइलों और नियमों के बीच नजर अंदाज कर दिया जाता है। अब तक की व्यवस्था बेहद विचित्र और अमानवीय थी। किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को अंतिम संस्कार के लिए 5 हजार रुपए की राशि दी जाती थी, लेकिन यह राशि वास्तव में ‘मदद’ नहीं बल्कि एक अस्थायी अग्रिम होती थी, जिसे बाद में मृतक के वेतन या अन्य देयकों से काट लिया जाता था। यह स्थिति उस परिवार के लिए और भी दुखद होती थी, जो पहले ही अपने कमाने वाले सदस्य को खो चुका होता था। ऐसे में आर्थिक मदद की जगह यह व्यवस्था एक तरह से अतिरिक्त बोझ बन जाती थी।

संवेदनशीलता की झलक

नए आदेश के तहत अब 20 हजार रुपए की सहायता राशि दी जाएगी और यह पूरी तरह अनुदान होगी इसकी कोई रिकवरी नहीं होगी। यह बदलाव केवल राशि बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सोच में बदलाव को दर्शाता है। इस योजना का दायरा भी बढ़ाया गया है। अब यह लाभ केवल नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को भी मिलेगा। यह एक बड़ा कदम है, क्योंकि अक्सर आउटसोर्स कर्मचारियों को ऐसी सुविधाओं से वंचित रखा जाता है।

कर्मचारी संगठनों की भूमिका

रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद और कर्मचारी संघ ने इस मुद्दे को लगातार उठाया। उन्होंने प्रबंधन को यह समझाने की कोशिश की कि 5 हजार रुपए की राशि नाकाफी है और रिकवरी की व्यवस्था पूरी तरह अमानवीय है। महामंत्री गिरीश चंद्र मिश्र और मीडिया प्रभारी रजनीश मिश्रा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे कर्मचारियों के हित में बड़ा कदम बताया।

महंगाई और सामाजिक यथार्थ

आज के दौर में अंतिम संस्कार जैसे आवश्यक कार्यों पर भी काफी खर्च आता है। लकड़ी, स्थान, परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं को मिलाकर 5 हजार रुपए में यह संभव नहीं था। ऐसे में 20 हजार रुपए की राशि निश्चित रूप से एक राहत प्रदान करेगी। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने इस निर्णय को कर्मचारियों के हित में बताया और कहा कि निगम लगातार अपने कर्मचारियों और यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास कर रहा है।

सुरक्षा और प्रशिक्षण पर जोर

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए चालक और परिचालकों को बेहतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हालांकि, दुर्घटनाएं पूरी तरह समाप्त नहीं की जा सकतीं, इसलिए ऐसी स्थितियों के लिए यह राहत योजना आवश्यक है। यह फैसला केवल आर्थिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह बताता है कि सरकारी तंत्र में भी संवेदनशीलता संभव है, बशर्ते इच्छाशक्ति हो।

* अंतिम संस्कार सहायता राशि 5 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपए हुई
* अब इस राशि की कोई रिकवरी नहीं होगी
* नियमित, संविदा और आउटसोर्स सभी कर्मचारियों को लाभ
* कर्मचारी संगठनों की मांग पर लिया गया फैसला
* निदेशक मंडल की बैठक में हुआ अनुमोदन
* महंगाई को देखते हुए लिया गया व्यावहारिक निर्णय
* संकट की घड़ी में परिवारों को त्वरित आर्थिक सहारा

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