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ऑर्केस्ट्रा की आड़ में देह व्यापार का धंधा,बिहार में कानून के रखवाले हुए अंधा

सिवान में 21 लड़कियां बरामद, इंजेक्शन लगाकर नाबालिग को बनाया बालिग

– रेप के बाद बच्चे का लाखों में सौदा एक अंडरकवर महिला रिपोर्ट की हिम्मत ने किया पूरे गैंग का पर्दाफाश
– पुलिस, डॉक्टर, अफसर- सब इस काले कारोबार से पैसा लूट रहे थे
– कहीं बॉयफ्रेंड ने छोड़ा तो कहीं फिल्मों के लालच में अगवा हुईं लड़कियां
– बिहार में ऑर्केस्ट्रा बन गया देह व्यापार का अड्डा, डबल इंजन राज में सब मैनेज

पटना/सीवान। हाल में संपन्न 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने महिला सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। वहीं, भाजपा शासित राज्यों की सरकारें अपने यहां महिलाओं की पूरी सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का राज होने का दावा करती रही हैं। लेकिन बिहार के सिवान में एक ऐसा मामला सामने आया है, जो न केवल महिला सुरक्षा की धज्जियां उड़ा देगा, बल्कि पुलिस और माफिया की मिलीभगत से चल रहे अवैध कारोबार को भी उजागर करता है। इसीलिए, देशभर की मीडिया संस्थानों ने इस भयावह खबर का न तो जिक्र किया और न ही इसे प्रमुखता दी। यहां तक कि यह खबर, स्थानीय मीडिया के कुछेक प्रकाशनो तक ही सीमित रह गई।

सिवान में नाबालिग लड़कियों के साथ क्रूरता और नवजात शिशुओं की तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। एक अखबार की खोजी रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में सक्रिय एक गिरोह ऑर्केस्ट्रा संचालकों, बिचौलियों और कुछ डॉक्टरों के साथ मिलकर लड़कियों को देह व्यापार और बच्चा बेचने के कारोबार में धकेल रहा था। यह गिरोह नाबालिग लड़कियों को देह व्यापार ही नहीं, बल्कि मनोरंजन की एक ‘वस्तु’ की तरह इस्तेमाल कर रहा था।

जारी है पुलिस की छापामारी, 21 लड़कियां बरामद

सीवान के पचरुखी में पुलिस ने आर्केस्ट्रा अड्डों पर छापेमारी कर 21 नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया है। छावे में कई संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि अन्य आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। जांच में यह भी पता चला है कि इस पूरे नेटवर्क में आर्केस्ट्रा संचालकों के अलावा एजेंट और दलाल भी शामिल हैं, जो नाबालिग लड़कियों को फिल्मों में काम दिलाने के नाम पर बहला-फुसलाकर या जबरन इन अड्डों तक लाते थे। सिवान के एसपी पूरन कुमार झा के निर्देश पर अनैतिक देह व्यापार और तस्करी रोकने के लिए गठित विशेष टीम ने पचरुखी थाना क्षेत्र में यह छापेमारी की। मुक्त कराई गई 21 लड़कियां केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल, असम, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पड़ोसी देश नेपाल की रहने वाली हैं। पुलिस अब इनके परिजनों से संपर्क करने और इन्हें यहाँ लाने वाले सिंडिकेट का पता लगाने में जुटी है।

महिला पत्रकार ने अंडरकवर रहकर भेद खोला

मामले का भंडाफोड़ करने वाली अखबार की पत्रकार महिमा सिंह ने खुद अंडरकवर होकर अपनी जान जोखिम में डालते हुए कई चुनौतियों का सामना करते हुए खुद को इस रैकेट का पहले सदस्य बनाया। उसके बाद धीरे-धीरे वह रैकेट के सरगनाओं तक पहुंची और इस पूरे काले कारोबार का भेद खोल दिया। उसने पता लगाया कि किस तरह लड़कियों को बहुत छोटी सी उम्र में इस रैकेट में शामिल किया जाता है। उन्हें फिल्मों में अच्छे करियर का लालच देकर ऐसे हॉर्मोनल इंजेक्शन लगाए जाते हैं, ताकि उनका शारीरिक विकास बहुत तेजी से हो। उसके बाद उनका बलात्कार किया जाता है। एक बार इस रैकेट का हिस्सा बनने के बाद लड़कियों को कई बार समूहिक बलात्कार से भी गुजरना पड़ता है। फिर उनसे पैदा हुए बच्चे को लाखों में बेच दिया जाता है। कई बार ऐसा भी होता है कि ये लड़कियां नाबालिग उम्र में जिन पुरुष साथियों को बॉयफ्रेंड मान बैठती हैं, वे ही उन्हें रैकेट के हवाले कर देते हैं।

शोषण का काला कारोबार

पुलिस के अनुसार, इन लड़कियों को बेहतर काम का झांसा देकर ऑर्केस्ट्रा में लाया गया था, लेकिन बाद में शोषण का शिकार बनाया जा रहा था। छापेमारी टीम में महिला थाना प्रभारी और मानव तस्करी विरोधी इकाई के सदस्य मुख्य रूप से शामिल थे। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पचरुखी थाने में गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। अखबार की रिपोर्ट का सबसे विचलित करने वाला पहलू नाबालिग लड़कियों को दिए जाने वाला हार्मोनल इंजेक्शन हैं। गिरोह के सदस्य झोलाछाप डॉक्टरों की मदद से कम उम्र की लड़कियों को बार-बार ऐसे इंजेक्शन देते थे, जिससे उनका शारीरिक विकास तेजी से हो और वे अपनी उम्र से बड़ी दिखें। गिरोह ऐसा इसलिए करता था कि इन नाबालिग लड़कियों को उनके शारीरिक गठन के हिसाब से बालिग दिखा सकें और पुलिस की नजरों से बच सकें। फिर इन लड़कियों को देह व्यापार के लिए राजी किया जाता था, क्योंकि तब तक वे गिरोह के सदस्यों के बलात्कार का शिकार होकर सब-कुछ गंवा चुकी होती थीं।

पैदा हुआ बच्चा बिकता था लाखों में

जांच में यह भी सामने आया है कि लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाकर या जबरन गर्भवती किया जाता था। एक बार जब लड़की गर्भवती हो जाती, तो उस बच्चे को बेच दिया जाता था। स्टिंग ऑपरेशन के दौरान एक एजेंट ने बताया कि नवजात बच्चों को 5 लाख रुपये या उससे अधिक की कीमत पर बेचा जाता है। इस पूरे सौदे में अस्पतालों और डॉक्टरों की मिलीभगत का भी आरोप है, जो बिना कागजी कार्यवाही के गर्भवती बालिका की डिलीवरी करवाकर पैदा हुए बच्चे को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के खरीदारों तक पहुंचाने का काम करते थे।

ऑर्केस्ट्रा की आड़ में पूरा नेटवर्क

अखबार की खोजी रिपोर्ट के अनुसार, ऑर्केस्ट्रा सेटअप की आड़ में चलने वाला पूरा नेटवर्क किसी शहर के रेडलाइट एरिया के समान संचालित होता था। इन इलाकों में जिले के बाहर से नाबालिग लड़कियों को लाया जाता था। अखबार की महिला रिपोर्टर ने एक एजेंट विक्की का स्टिंग आपरेशन किया, जिसमें इस पूरे मामले में सीवान के एक डॉक्टर के शामिल होने की बात भी सामने आई है। यह व्यक्ति खुद को रसूखदार बताकर पुलिस-प्रशासन से मिलीभगत का दावा कर बिना किसी झंझट के लड़की डिलीवरी करने और उससे पैदा हुए बच्चे को ‘एडजस्ट’ करने का आश्वासन देता पाया गया।

नाबालिग को लगता था ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन

मामले की जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य नाबालिग लड़कियों को शारीरिक रूप से वयस्क दिखाने के लिए उन्हें ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगाते हैं। आपको बता दें कि फलों को समय से पहले सुखाने और पशुओं के शरीर से दूध निकालने के लिए अमूमन इसी खतरनाक इंजेक्शन का उपयोग किया जाता है। बीते दिनों सारण जिले में 24 दिन का एक नवजात शिशु बरामद हुआ था। इस घटना से भी मामले के तार अब जुड़ते नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोन का दुरुपयोग न केवल कानूनी रूप से अपराध है, बल्कि यह लड़कियों के जीवन के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है। भारत में ऐसे इंजेक्शनों पर पहले से ही कड़े नियम लागू हैं, लेकिन इस रिपोर्ट ने जमीनी स्तर पर इनके दुरुपयोग की भयावह तस्वीर पेश की है। यह मामला केवल अपराध का नहीं, बल्कि एक बड़े संगठित सिंडिकेट का है जो गरीबी और मजबूरी का फायदा उठाकर मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है।

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