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गुप्ता गेस्ट हाउस पर शिवपुर थाने की कृपा जोरदार,यहां खूब फल फूल रहा देह व्यापार का गंदा कारोबार

शिवपुर में गेस्ट हाउस या कथित अनैतिक गतिविधियों का अड्डा? जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल

  • देह व्यापार, शराब और ड्रग्स सप्लाई के आरोप, पूर्व कार्रवाई के बावजूद फिर उठ रहे सवाल
  • पत्रकार को जान से मारने की धमकी, पुलिस संरक्षण के आरोप ने बढ़ाई बेचैनी
  • थाने से लेकर महिला अपराध शाखा तक शिकायतों का दावा, कार्रवाई के बजाय खामोशी
  • सीसीटीवी, आगंतुक रजिस्टर और कमरे के रिकॉर्ड की जांच हो तो खुलेगा पूरा सच
  • आरोप सही हैं तो खाकी किसके दबाव में? गलत हैं तो जांच कर दूध का दूध क्यों नहीं

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में शिवपुर थाना क्षेत्र स्थित गुप्ता गेस्ट हाउस को लेकर लगाए जा रहे गंभीर आरोपों ने पुलिस की निगरानी और प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर गेस्ट हाउस में कथित अनैतिक गतिविधियां संचालित होने, देह व्यापार के लिए परिसर के इस्तेमाल, शराब और नशीले पदार्थों की कथित आपूर्ति तथा शिकायत करने वाले पत्रकार को धमकाए जाने जैसे आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन शिकायतकर्ता की ओर से संबंधित अधिकारियों को बार-बार सूचना और कथित साक्ष्य उपलब्ध कराने का दावा किया है। यदि पुलिस प्रशासन को इतने गंभीर आरोपों की जानकारी दी गई तो उनकी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं हुई? क्या गेस्ट हाउस के आगंतुक रजिस्टर, सीसीटीवी फुटेज, पहचान पत्र, कमरों की बुकिंग और भुगतान का रिकॉर्ड खंगाला गया? क्या वहां आने-जाने वालों का सत्यापन किया गया? क्या किसी स्वतंत्र टीम ने गोपनीय तरीके से मौके की जांच की। शिकायतकर्ता का दावा है कि मामले को लेकर डीसीपी वरुणा जोन प्रमोद कुमार से भी संपर्क किया गया और उन्होंने कार्रवाई की बात कही थी। इसके बावजूद आरोप है कि जमीन पर अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दी। मामला यहीं खत्म नहीं होता। शिवपुर पुलिस के कुछ कर्मियों पर कथित रूप से संचालकों को पहले से सचेत करने और कुछ दिनों के लिए गतिविधियां बंद रखने की सलाह देने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। इन दावों की पुष्टि होना बाकी है। यदि ऐसा कोई पुलिसिया हस्तक्षेप हुआ है तो उसकी भी जांच जरूरी है।

गेस्ट हाउस पर आरोपों की लंबी फेहरिस्त

शिकायतकर्ता और स्थानीय सूत्रों की ओर से गुप्ता गेस्ट हाउस को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें देह व्यापार संचालित किए जाने से लेकर शराब और ड्रग्स की कथित आपूर्ति तक की बातें शामिल हैं। इन आरोपों को प्रमाणित तथ्य मान लेना उचित नहीं होगा। लेकिन आरोपों की गंभीरता इतनी है कि पुलिस को इन्हें महज अफवाह मानकर किनारे करने के बजाय विधिवत जांच करनी चाहिए। किसी भी गेस्ट हाउस की वास्तविक गतिविधियों का पता लगाने के लिए उसके बुकिंग रिकॉर्ड, सीसीटीवी, पहचान-पत्रों की प्रतियां, कर्मचारियों के बयान, भुगतान के माध्यम और संदिग्ध समय पर आने-जाने वालों की जानकारी महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं।

पूर्व कार्रवाई के दावे की भी हो जांच

शिकायत में दावा किया गया है कि गेस्ट हाउस से जुड़े संचालक के पुत्र अनमोल गुप्ता को पूर्व में देह व्यापार अथवा अन्य आपराधिक मामले में जेल भेजा गया था।
यह दावा आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड और न्यायालयीन दस्तावेजों से सत्यापित किया जा सकता है। यदि वास्तव में पूर्व में कोई मुकदमा दर्ज हुआ और गिरफ्तारी हुई थी तो उसकी धाराएं, विवेचना की स्थिति और वर्तमान कानूनी स्थिति सार्वजनिक की जा सकती है। लेकिन यदि उसी प्रतिष्ठान को लेकर दोबारा समान शिकायतें सामने आ रही हैं तो पुलिस के लिए पृष्ठभूमि की जांच करना अपने आपमें ठोस आधार है।

कमरे, सीसीटीवी और रजिस्टर बताएंगे सच्चाई

शिकायत में गेस्ट हाउस के अंदर युवतियों की उपलब्धता और कमरों के कथित इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर दावे किए गए हैं। इन दावों की पुष्टि का सबसे मजबूत तरीका सोशल मीडिया की चर्चाएं नहीं, बल्कि जांच है।
गेस्ट हाउस के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग, प्रवेश-निकास रजिस्टर, बुकिंग का विवरण, आईडी प्रूफ, भुगतान रिकॉर्ड और कर्मचारियों के बयान से स्वतः स्पष्ट हो जायेगा। आरोप है कि कमरों को कुछ घंटों के लिए विशेष रूप से बुक किया जाता था तो बुकिंग पैटर्न भी कई सवालों का जवाब दे सकता है। पुलिस चाहे तो संबंधित अवधि के रिकॉर्ड को कब्जे में लेकर डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों की जांच करा सकती है।

गुप्त दरवाजे और अलग कमरे का दावा

शिकायतकर्ता ने गेस्ट हाउस के परिसर में एक अलग प्रवेश मार्ग और ऊपर स्थित कमरे का भी उल्लेख किया है, जहां कथित रूप से युवतियों को ठहराने का आरोप लगाया गया है। पीछे से लोगों को बाहर निकालने के लिए कथित वैकल्पिक रास्ते का दावा भी किया गया है।
इन बातों की वास्तविकता मौके के निरीक्षण से आसानी से सामने आ सकती है। भवन में अतिरिक्त कमरा या वैकल्पिक प्रवेश मार्ग के स्वीकृत का नक्शे में उल्लेख है। उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से होता है, वहां सीसीटीवी लगा है। इन सवालों का जवाब पुलिस और नगर निकाय की संयुक्त जांच से निकाला जा सकता है।

पत्रकार को धमकी का आरोप सबसे गंभीर

मामले को गंभीर बनाने वाला आरोप शिकायतकर्ता पत्रकार को कथित जान से मारने की धमकी दिए जाने का है। दावा है कि गेस्ट हाउस में कथित गतिविधियों को लेकर खबर प्रकाशित करने और सवाल उठाने के कारण पत्रकार को स्थानीय लोगों के माध्यम से धमकी दी गई। पत्रकार को धमकाने के आरोप को केवल प्रेस से जुड़ा विवाद मानकर छोड़ना उचित नहीं होगा। यदि किसी व्यक्ति को किसी कथित अपराध की जानकारी सामने लाने से रोकने के लिए धमकाया गया है तो यह स्वतंत्र रूप से जांच का विषय है। शिकायतकर्ता की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच दोनों पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारियां हैं।

पुलिस से कथित सांठगांठ का आरोप सच क्या?

सबसे गंभीर आरोपों में से एक शिवपुर थाने के तत्कालीन, वर्तमान प्रभारी अजीत कुमार वर्मा के नाम से जुड़ा है। शिकायत में दावा किया गया है कि गेस्ट हाउस से प्रतिमाह 40 से 50 हजार रुपये पुलिस को दिए जाते हैं और इसी कथित संरक्षण के आधार पर संचालक पुलिस को अपने प्रभाव में होने का दावा करता है। यह अत्यंत गंभीर आरोप है हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि किसी पुलिसकर्मी पर रिश्वत लेने का आरोप है तो कॉल डिटेल, वित्तीय लेन-देन, संदिग्ध संपर्क, शिकायतों की कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा जाए तो स्वतः खुलकर सामने आ जायेगा।

महिला अपराध शाखा की भूमिका पर सवाल

शिकायतकर्ता का दावा है कि मामले की जानकारी एडीसीपी महिला अपराध नम्रता श्रीवास्तव को भी कई बार दी गई और कथित साक्ष्य दिखाए गए। शिकायत के बाद क्या कार्रवाई की गई, शिकायत दर्ज हुई की नहीं यह कोई बताने वाला नहीं है। कोई महिला पुलिस अधिकारी मौके पर गई, पीड़िताओं की पहचान या बयान की कोशिश हुई, गेस्ट हाउस का सत्यापन कराया गया नहीं तो कारण क्या था?

डीसीपी से लेकर थाने तक जवाबदेही तय हो

शिकायतकर्ता के अनुसार डीसीपी वरुणा जोन के समक्ष भी मामला उठाया गया और त्वरित कार्रवाई का आश्वासन मिला। यदि यह दावा सही है तो अब यह जानना जरूरी है कि उस आश्वासन के बाद क्या कार्रवाई हुई। किस अधिकारी को जांच सौंपी गई? क्या स्थल निरीक्षण हुआ? गेस्ट हाउस के कागजात मांगे गए? सीसीटीवी रिकॉर्ड सुरक्षित कराया गया? पुलिस ने स्थानीय लोगों के बयान लिए? शिकायतकर्ता को इसकी जानकारी दी गई? खाकी की चुप्पी आरोपों को और हवा देती है। किसी गेस्ट हाउस के खिलाफ देह व्यापार और नशीले पदार्थों से जुड़े आरोप लगना मामूली शिकायत नहीं है। ऐसे मामलों में पुलिस की चुप्पी कई तरह के सवाल पैदा करती है।

सवाल गेस्ट हाउस से ज्यादा सिस्टम पर

गुप्ता गेस्ट हाउस से जुड़े आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी। लेकिन इस पूरे प्रकरण ने उससे बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वाराणसी में किसी प्रतिष्ठान के खिलाफ बार-बार गंभीर शिकायतें पहुंचने के बाद भी जांच व्यवस्था निर्जीव पड़ी रहती हैं और इंतजार रहता कि कोई बड़ी घटना हो तो कार्रवाई की जाए। कमिश्नरेट वाराणसी की पुलिस को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि किसी राजनीतिक, आर्थिक अथवा स्थानीय प्रभाव के कारण कानून का पहिया धीमा न पड़े।

* गुप्ता गेस्ट हाउस को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर आरोप और शिकायतों का दावा
* देह व्यापार के साथ शराब और ड्रग्स की कथित सप्लाई के आरोप
* संचालक के पुत्र के पूर्व में जेल जाने का दावा—रिकॉर्ड से सत्यापन जरूरी
* पुलिस अधिकारियों को बार-बार सूचना दिए जाने का पत्रकार का दावा
* गेस्ट हाउस की गतिविधियों की गोपनीय जांच और सीसीटीवी रिकॉर्ड खंगालने की मांग
* पत्रकार को धमकी और पुलिस से कथित सांठगांठ के आरोपों ने मामला और गंभीर बनाया
* शिवपुर पुलिस और महिला अपराध शाखा की भूमिका पर निष्पक्ष जांच की मांग

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