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वाराणसी स्नातक एमएलसी चुनाव: निर्दलीय प्रत्याशी चंद्रजीत सिंह यादव ने दाखिल किया नामांकन, शिक्षा-रोजगार को बनाया प्रमुख मुद्दा

पूर्व DIOS और शिक्षा विभाग के विभिन्न पदों पर सेवाएं दे चुके चंद्रजीत सिंह यादव के नामांकन में पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से पहुंचे समर्थक, बोले—शिक्षक, नौजवान और आम लोगों के अधिकारों की उठाएंगे आवाज

वाराणसी। वाराणसी स्नातक एमएलसी चुनाव को लेकर वाराणसी और गाजीपुर समेत पूर्वांचल के राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी बढ़ने लगी है। इसी क्रम में शुक्रवार को निर्दलीय प्रत्याशी चंद्रजीत सिंह यादव ने वाराणसी में अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन के दौरान पूर्वांचल के विभिन्न क्षेत्रों से उनके समर्थक पहुंचे। नामांकन के बाद मीडिया से बातचीत में चंद्रजीत सिंह यादव ने अपनी उम्मीदवारी, प्रशासनिक अनुभव और चुनावी प्राथमिकताओं को लेकर विस्तार से बात की।

गाजीपुर के मूल निवासी चंद्रजीत सिंह यादव शिक्षा विभाग में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने अपने प्रशासनिक कार्यकाल का उल्लेख करते हुए बताया कि वह 2003-04 तथा 2012-13-14 में दो बार जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) के पद पर कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने करीब एक महीने डायरेक्टर, हिंदी संस्थान के रूप में भी कार्य किया। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जनपदों और मंडलों में डिप्टी डायरेक्टर तथा प्रभारी डिप्टी डायरेक्टर के पदों पर भी जिम्मेदारी संभालने की बात कही। वर्ष 2023 में वे शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हुए।

शिक्षा, शिक्षक और रोजगार को बताया प्रमुख मुद्दा

नामांकन के बाद पत्रकारों से बातचीत में चंद्रजीत सिंह यादव ने कहा कि उनकी प्राथमिकता समाज और लोगों की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि चुनाव में उनका मुख्य फोकस शिक्षा, शिक्षकों और नौजवानों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर रहेगा।

उन्होंने कहा कि वित्तविहीन शिक्षकों को आजीविका के लिए सम्मानजनक मानदेय मिलना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पुरानी पेंशन योजना की बहाली और युवाओं के लिए रोजगार को प्रमुख मुद्दा बताया। उनका कहना है कि जब तक युवाओं को रोजगार नहीं मिलता, तब तक बेरोजगारी भत्ते की व्यवस्था होनी चाहिए।

वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय में असमानता का मुद्दा

चंद्रजीत सिंह यादव ने शिक्षकों के मानदेय में कथित असमानता को भी चुनावी मुद्दा बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि वित्तविहीन शिक्षकों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उनके लिए सम्मानजनक मानदेय सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।

उन्होंने ‘गुरुजी हफ्ता’ और निःशुल्क शिक्षा समेत शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी आवाज उठाने की बात कही। उनका कहना है कि सदन में पहुंचने के बाद शिक्षक और शिक्षा से जुड़े विषय उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे।

समस्याओं के समयबद्ध समाधान पर जोर

निर्दलीय प्रत्याशी ने सिटीजन चार्टर एक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि नागरिकों की समस्याओं का समाधान तय समयसीमा के भीतर होना चाहिए। उनका कहना है कि सरकारी व्यवस्था में आम नागरिक को अपनी समस्या के समाधान के लिए अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े और जवाबदेही सुनिश्चित हो, इस दिशा में भी आवाज उठाई जाएगी।

उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में मजबूती से उठाना उनकी प्राथमिकता होगी और वह अपने अनुभव के आधार पर शिक्षा तथा प्रशासन से जुड़े मामलों को सामने रखेंगे।

‘किसी पार्टी के झंडे तले नहीं’

अपनी राजनीतिक भूमिका को लेकर चंद्रजीत सिंह यादव ने खुद को निर्दलीय प्रत्याशी बताते हुए कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के झंडे तले चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह किसी के दबाव में काम नहीं करेंगे और सदन में जनता की आवाज उठाने का प्रयास करेंगे।

उन्होंने अपने सर्विस पीरियड के दौरान लागू नियमों, कानूनों और रेगुलेशन का हवाला देते हुए कहा कि इन्हीं व्यवस्थाओं की समझ के आधार पर वह जनता के मुद्दों को उठाएंगे।

मतदाताओं से की स्वतंत्र प्रत्याशी के समर्थन की अपील

चंद्रजीत सिंह यादव ने स्नातक मतदाताओं से अपील की कि वे राजनीतिक दलों के प्रभाव से अलग होकर अपने मुद्दों और प्राथमिकताओं के आधार पर मतदान करें। उन्होंने मतदाताओं से एक स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में उन्हें समर्थन देने की अपील की।

वाराणसी स्नातक एमएलसी चुनाव को लेकर आने वाले दिनों में अन्य प्रत्याशियों की सक्रियता बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में शिक्षा, रोजगार, पुरानी पेंशन, वित्तविहीन शिक्षकों का मानदेय और युवाओं से जुड़े मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में रहने की संभावना है।

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