अजित पवार की मौत पर समर्थकों में उबाल,विमान दुर्घटना पर अनसुलझे सवाल
घर वापसी के रास्ते से अचानक पलटकर कैसे दुनिया छोड़ गए अजित पवार? कहीं हादसे के पीछे साजिश तो नहीं?

– जल्दी ही एक होने वाले थे राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों धड़े
– महाराष्ट्र विधानसभा में अजित गुट के 41 विधायक हैं
– अजित की मौत से भाजपा को सबसे ज्यादा फायदा
– हादसे के बहाने एकनाथ शिंदे को साफ संदेश- अब चुप हो जाओ
– बड़ा सवाल- अब अजित गुट की कमान किसके हाथ होगी?

मुम्बई / कहते हैं राजनीति का रास्ता वन वे होता है, जहां आप जिस रास्ते से एंट्री करते हैं उसी रास्ते से दोबारा लौटकर नहीं जा सकते। अपने चाचा शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीसी) को दो हिस्सों में तोड़कर एनडीए के साथ जाने वाले अजित पवार के साथ भी लगता है यही बात हो गई। 24 जनवरी 2026 को को शिवसेना के प्रवक्ता संजय राऊत ने घोषणा की थी कि अजित पवार जल्दी ही घर वापसी, यानी शरद पवार की पार्टी में शामिल हो जाएंगे। लेकिन हाल के महाराष्ट्र निकाय चुनावों में 760 सीटें जीतने वाली और महाराष्ट्र विधानसभा में 41 विधायकों वाली पार्टी के प्रमुख अजित पवार की बुधवार सुबह बारामती में हुए एक विमान हादसे में मौत हो गई।
अब सवाल यह उठ रहे हैं कि 24 तारीख को एनसीपी के दोनों धड़ों के विलय के ऐलान के चार दिन बाद ही अचानक एक ऐसा विमान हादसा कैसे हो सकता है कि पूरी पार्टी ही अनाथ हो जाए ? इसी जनवरी में एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि एनडीए को अब अजित पवार की जरूरत नहीं रही और अब वह एनसीपी से छुटकारा पाना चाहती है। इसी रिपोर्ट में शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और महाराष्ट्र के दूसरे डिप्टी सीएम एनाथ शिंदे पर भी निशाना साधते हुए कहा गया था कि उनके जिस तरह से पर निकल रहे हैं, ऐसे में भाजपा को उन्हें भी सबक सिखाने की जरूरत आन पड़ी है।

एक तीर, दो शिकार
डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन से अब सबसे बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि आगे एनसीपी के उन 41 विधायकों का क्या होगा, जिनके सिर से नेता का सरमाया छिन गया है। भाजपा जैसी बड़ी मछली के लिए इन विधायकों को अपने पाले में कर सत्ता की मजबूती के रास्ते पर एक कांटा हमेशा के लिए दूर देना कोई मुश्किल नहीं है। इस संभावना से विमान हादसे की साजिश का एक सिरा भाजपा से जुड़ता है कि अजित पवार के निधन से सबसे ज्यादा फायदा उसका ही होगा। इसके बाद नंबर आता है एकनाथ शिंदे का, जिन्होंने हाल के निकाय चुनाव में दमदार प्रदर्शन के बाद मुंबई महानगर पालिका के मेयर पद पर दावा पेश किया था। बारामती के विमान हादसे से भाजपा की ओर से उन्हें भी यह संकेत मिल सकता है कि अब ज्यादा उड़ना बंद करो। अजित पवार के निधन से महायुति में अब लगभग दो ही पार्टी बची है। एक भाजपा और दूसरी शिवसेना। अगर अजित पवार धड़े के विधायकों को भाजपा अपने पक्ष में साधने में सफल हो गई तो उसकी ताकत गठबंधन में कहीं ज्यादा बढ़ जाएगी।
शरद पवार के उत्तराधिकारी थे अजित
अजित पवार के निधन से एनसीपी के समर्थक सकते में हैं। जहां दोनों धड़ों के विलय की संभावना से उत्साहित समर्थक खुशी मना रहे थे, वहीं अब उनके चेहरे पर मायूसी है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि किधर जाएं? बड़ा सवाल यह है कि क्या शरद पवार के उत्तराधिकारी अजित पवार के न रहने के बाद अब सुप्रिया सुले एकजुट पार्टी की कमान संभालेंगी, या फिर अजित पवार के दोनों बेटों- पार्थ या जय में से किसी एक के हाथ कमान आएगी। अजित के दोनों बेटे फिलहाल राजनीति में नादान हैं। ऐसे में इस बात की उम्मीद कम है कि पार्टी के 41 विधायक दोनों में से किसी एक को अपना नेता मान लें। दूसरी अहम बात यह है कि अगर एनसीपी के दोनों खेमे एक हो भी जाएं तो भी यह सवाल तो बना ही रहेगा कि एनडीए सरकार में उनकी भूमिका क्या होगी? महाराष्ट्र विधानसभा में शरद पवार गुट के 10 विधायक हैं। ये सरकार से बाहर विपक्ष में बैठे हैं। इनमें अगर अजित गुट के 41 विधायकों को मिला दें तो कुल 51 विधायक होते हैं। ऐसे में क्या एकजुट पार्टी एनडीए की राज्य सरकार को बाहर से समर्थन देगी या भीतर से?
महाराष्ट्र में आगे हैं जिला परिषद के चुनाव
महाराष्ट्र में निकाय चुनाव की अगली प्रक्रिया में जिला परिषद के चुनाव होने हैं। अजित पवार ने पिछले दिनों कहा था कि उनकी पार्टी जिला परिषद के चुनाव में और भी बड़ी जीत दर्ज करेगी। अब उनके निधन से जिला परिषद चुनाव में पार्टी की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है। अगर जिला परिषद चुनाव से पहले एनसीपी के दोनों धड़े एकजुट होते हैं तो भाजपा को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेकिन ऐसा होना अब बहुत मुश्किल दिखता है, क्योंकि न तो सुप्रिया सुले और न ही अजित के दोनों बेटों में अभी पार्टी को चुनाव में मजबूती से खड़ा करने की क्षमता है।
बदनाम कंपनी की चार्टर्ड फ्लाइट
अजित पवार ने बुधवार को सुबह 8.10 बजे एक चार्टर्ड फ्लाइट से मुंबई से बारामती के लिए उड़ान भरी। उनके साथ पीएसओ विदीप जाधव और क्रू मेंबर के तीन और सदस्य थे। विमान को सुबह 8.50 पर बारामती में उतरना था। लेकिन एक चक्कर लगाने के बाद विमान ने दूसरी बार फिर उतरने की कोशिश की और दुर्घटनाग्रस्त हो गया। वीएसआर एविऐशन के इस लियरजेट प्राइवेट विमान कंपनी का हेड ऑफिस दिल्ली में है। डीजीसीए के अनुसार, बुधवार सुबह जब विमान ने बारामती के लैंडिंग की कोशिश की तो वहां कोहरा छाया हुआ था। बारामती में टेबल टॉप स्टाइल की लैंडिंग होती है। आाधिकारिक जानकारी के अनुसार, विमान के पायलट ने लैंडिंग से पहले आपातकालीन संदेश दिया था। दूसरी कोशिश में विमान रनवे के एक किनारे पर उतरा और दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इससे पहले इसी कंपनी का विमान सितंबर 2023 में मुंबई में भी दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में 5 लोग घायल हुए थे। लेकिन हादसे की प्रारंभिक जांच के बाद भी विमान को अगले दो साल तक उड़ने की अनुमति कैसे दी गई, यह एक बड़ा सवाल है। माना जा रहा है कि वमान के पायलट को कोहरे के कारण रनवे को देखने और ऊंचाई का अनुमान लगाने में परेशानी हुई होगी, जिसके कारण यह हादसा हुआ। वीएसआर एविएशन भारत की प्रमुख नॉन शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स में से एक है, जिसे अक्सर राजनेता कम दूरी की यात्राओं में इस्तेमाल करते हैं।




