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पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल साइबर अपराधियों के लिए बने काल,डिजिटल क्रिमिनलो का बिगाड़ देंगे हाल

वाराणसी पुलिस की तकनीक आधारित कार्रवाई से ठगों के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार

  • 59 साइबर गैंग का पर्दाफाश, 283 अपराधी गिरफ्तार; करोड़ों की ठगी पर लगाई लगाम, पीड़ितों को लौटाई राहत की उम्मीद
  • अपराधियों के बदलते तौर-तरीकों को समझकर उसी तकनीक से जवाब दे रही वाराणसी पुलिस
  • पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में साइबर अपराध के खिलाफ निर्णायक अभियान
  •  एक साल में 28.30 करोड़ रुपये की ठगी की रकम होल्ड, 5.10 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस,लोगो की लौटी मुस्कान

वाराणसी। डिजिटल क्रांति ने जहां आम आदमी की जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने इसी तकनीक को ठगी का हथियार बनाकर लोगों की मेहनत की कमाई पर हमला करना शुरू कर दिया है। कभी फर्जी कॉल सेंटर, कभी निवेश के नाम पर लालच, कभी डिजिटल अरेस्ट तो कभी बैंकिंग और ऑनलाइन भुगतान से जुड़ी धोखाधड़ी। साइबर अपराध का स्वरूप लगातार बदल रहा है। ऐसे चुनौतीपूर्ण दौर में कमिश्नरेट वाराणसी पुलिस ने जिस सक्रियता, तकनीकी दक्षता और रणनीतिक सूझबूझ के साथ साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर प्रहार किया है, वह आमजन की सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में वाराणसी पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ केवल मुकदमे दर्ज करने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि अपराधियों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने, ठगी की रकम को रोकने, पीड़ितों को पैसा वापस दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई है। विगत एक वर्ष की उपलब्धियां बताती हैं कि वाराणसी में साइबर अपराध के विरुद्ध कार्रवाई अब अधिक संगठित, तकनीक आधारित और परिणाम केंद्रित हो चुकी है।

 

59 साइबर गैंग का पर्दाफाश, 283 अपराधियों की गिरफ्तारी

साइबर अपराध की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अपराधी एक शहर में बैठकर दूसरे प्रदेश या देश के नागरिकों को निशाना बनाते हैं। इनके तार कई राज्यों में फैले होते हैं। ऐसे संगठित नेटवर्क को पकड़ने के लिए पारंपरिक पुलिसिंग के साथ तकनीकी दक्षता भी जरूरी है।
वाराणसी पुलिस ने पिछले एक वर्ष में इस दिशा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

प्रमुख उपलब्धियां एक नजर में—

– 59 संगठित साइबर गैंग का पर्दाफाश।
– 283 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।
– 15 अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया गया।
– 28.30 करोड़ रुपये की ठगी की धनराशि होल्ड कराई गई।
– 5.10 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए गए।
– 16,982 NCRP शिकायतों का निस्तारण किया गया।
– 550 व्यक्तियों का रेस्क्यू किया गया।
– 10,876 मोबाइल नंबर ब्लॉक कराए गए।
– 9,462 IMEI नंबर ब्लॉक कराए गए।

ये आंकड़े बताते हैं कि कमिश्नरेट वाराणसी की कार्रवाई अपराधियों की गिरफ्तारी से आगे बढ़कर साइबर अपराध की पूरी व्यवस्था पर चोट कर रही है।

ठगी की रकम रोकना और पीड़ितों को वापस दिलाना बनी प्राथमिकता

साइबर अपराध में सबसे महत्वपूर्ण समय होता है घटना के तुरंत बाद का समय। ठगी की रकम जितनी तेजी से अलग-अलग बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों से आगे बढ़ती है, उसे वापस पाना उतना ही कठिन होता जाता है।
इस चुनौती को समझते हुए वाराणसी पुलिस ने शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और वित्तीय लेन-देन को ट्रैक करने पर विशेष जोर दिया है। इसी का परिणाम है कि एक वर्ष में 28.30 करोड़ रुपये की ठगी की रकम होल्ड कराई गई और 5.10 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए गए।
किसी व्यक्ति की वर्षों की बचत, किसी बुजुर्ग की पेंशन, किसी व्यापारी की पूंजी या किसी परिवार की भविष्य की उम्मीद जब साइबर ठगों के हाथों चली जाती है, तब केवल मुकदमा दर्ज होना पर्याप्त नहीं होता। पीड़ित को उसकी धनराशि वापस दिलाना पुलिस की संवेदनशीलता और कार्यक्षमता की वास्तविक परीक्षा है। इस लिहाज से वाराणसी पुलिस की उपलब्धि महत्वपूर्ण है।

अवैध कॉल सेंटरों पर कार्रवाई, अपराध की जड़ों तक पहुंची पुलिस

साइबर ठगी के कई बड़े नेटवर्क फर्जी कॉल सेंटरों के माध्यम से संचालित होते हैं। यहां बैठकर लोगों को अलग-अलग तरीके से झांसा दिया जाता है और उनकी निजी तथा बैंकिंग संबंधी जानकारियां हासिल की जाती हैं।
वाराणसी पुलिस ने 15 अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ कर ऐसे नेटवर्क पर सीधा प्रहार किया है। यह कार्रवाई बताती है कि पुलिस का ध्यान केवल ठगी के बाद सामने आने वाले अपराधियों तक नहीं, बल्कि अपराध की योजना बनाने और उसे संचालित करने वाले ठिकानों तक भी है।

16,982 शिकायतों का निस्तारण, डिजिटल सुरक्षा को मिला नया आधार

साइबर अपराध के मामलों में आम नागरिक अक्सर इस बात को लेकर परेशान रहता है कि शिकायत कहां करे और उसकी सुनवाई कब होगी। शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण पुलिस और जनता के बीच भरोसे को मजबूत करता है।
एक वर्ष में 16,982 NCRP शिकायतों का निस्तारण कमिश्नरेट की सक्रिय कार्यप्रणाली को दर्शाता है। इसके साथ ही 10,876 मोबाइल नंबर और 9,462 IMEI नंबर ब्लॉक कराने की कार्रवाई साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले संदिग्ध संसाधनों पर रोक लगाने की दिशा में अहम कदम है।
550 व्यक्तियों का रेस्क्यू भी इस अभियान का महत्वपूर्ण पक्ष है। यह बताता है कि पुलिस की कार्रवाई का दायरा केवल वित्तीय धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर अपराध से जुड़े व्यापक नेटवर्क और उसके शिकार लोगों तक भी पहुंच रहा है।

2026 में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की रकम में 47.02 प्रतिशत की कमी

किसी भी पुलिस अभियान की सफलता का वास्तविक पैमाना केवल गिरफ्तारियों की संख्या नहीं, बल्कि अपराध की घटनाओं और उससे होने वाले नुकसान में आने वाली कमी भी है।
कमिश्नरेट वाराणसी के प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 की तुलना में वर्ष 2026 में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की धनराशि में 47.02 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
यह आंकड़ा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका सीधा संबंध आम नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा से है। साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई, संदिग्ध नेटवर्क पर निगरानी और शिकायतों के त्वरित निस्तारण ने इस दिशा में सकारात्मक परिणाम देने में योगदान किया है।

मोहित अग्रवाल की कार्यशैली : कार्रवाई के साथ तकनीक और जागरूकता पर जोर

पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में वाराणसी पुलिस की रणनीति के तीन प्रमुख आधार दिखाई देते हैं—तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल, अपराधियों के खिलाफ निरंतर कार्रवाई और आम नागरिकों को जागरूक करना।
साइबर अपराध ऐसा क्षेत्र है जहां अपराधी हर दिन अपने तरीके बदलते हैं। ऐसे में पुलिस को भी लगातार अपनी कार्यप्रणाली विकसित करनी पड़ती है। केवल घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय अपराध की आशंका को पहचानना, डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण करना और समय रहते संदिग्ध गतिविधियों पर रोक लगाना जरूरी है।
मोहित अग्रवाल के निर्देशन में कमिश्नरेट की ओर से तकनीक आधारित पुलिसिंग और जन-जागरूकता अभियान को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य नागरिकों को साइबर ठगी के तरीकों से परिचित कराना और उन्हें सतर्क बनाना है।

आमजन भी बरतें सावधानी, तभी सफल होगा साइबर सुरक्षा का अभियान

पुलिस की कार्रवाई के साथ नागरिकों की सतर्कता भी साइबर अपराध रोकने में निर्णायक भूमिका निभाती है। किसी अनजान व्यक्ति को OTP, बैंकिंग पासवर्ड या निजी जानकारी साझा न करना, संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचना और डिजिटल अरेस्ट जैसी फर्जी धमकियों से सावधान रहना बेहद जरूरी है।
साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत करना चाहिए, ताकि ठगी की रकम को समय रहते रोकने की संभावना बढ़ सके।

सुरक्षित डिजिटल वाराणसी की दिशा में मजबूत कदम

आज वाराणसी केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान वाला शहर नहीं, बल्कि तेजी से डिजिटल होती अर्थव्यवस्था का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में नागरिकों का डिजिटल रूप से सुरक्षित रहना भी उतना ही जरूरी है जितना सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर उनकी सुरक्षा।
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में साइबर अपराधियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि तकनीक का इस्तेमाल अपराध के लिए करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। 59 गैंग का पर्दाफाश, 283 गिरफ्तारियां, करोड़ों रुपये की धनराशि होल्ड और पीड़ितों को करोड़ों रुपये की वापसी इस अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।
साइबर अपराध के खिलाफ यह लड़ाई केवल अपराधियों को पकड़ने की नहीं, बल्कि आम नागरिकों के विश्वास, मेहनत की कमाई और डिजिटल भविष्य को सुरक्षित रखने की लड़ाई है। वाराणसी पुलिस का संकल्प स्पष्ट है—अपराधी चाहे कितनी भी आधुनिक तकनीक का सहारा लें, कानून के हाथ उन तक पहुंचेंगे।

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