बंगाल में एसआईआर पर उच्चतम न्यायालय ने अपनी ग़लती किया स्वीकार,बड़ी देर दी बरखुरदार
बंगाल में एसआईआर के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मानी गलती, कहा- अलग बेंच बनाते तो बात न बिगड़ती; नाकारा ट्रिब्यूनल और अड़ियल सिस्टम के बीच होगी वोटिंग

– 21 अप्रैल को 512 सीटों पर पहले चरण का मतदान, लेकिन 27 लाख वोटरों का भविष्य अधर में
– ट्रिब्यूनलों को मंगलवार और 27 अप्रैल तक लिस्ट प्रकाशित करने का अल्टीमेटम
– करीब 2.4 लाख अर्धसैन्य बलों ने बख्तरबंद गाड़ियों के साथ बंगाल को घेरा
– मुस्लिम महिला के पास आधार और पासपोर्ट, लेकिन वोटर नहीं माना। कोर्ट बोली- तुरंत सुनवाई हो
– तृणमूल का आरोप- बाहरी वोटर जुड़वा रही है मोदी सरकार
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की 12 फीसदी आबादी को तेज गर्मी में घंटों तक धूप में खड़ा रखने के बाद सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को याद आया कि उसे राज्य के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़े मामलों को निपटाने के लिए एक अलग बेंच गठित करना था। मंगलवार 21 अप्रैल को केंद्रीय चुनाव अयोग के विशेष ट्रिब्यूनल को उन 27 लाख अपील के मामले में सुनवाई कर उस सूची को जारी करने के आदेश दिए गए हैं, जिन्होंने ट्रिब्यूनल में कागजों के साथ वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने का दावा पेश किया है।
बंगाल में पहले दौर का मतदान 23 अप्रैल को होगा। इससे पहले उन दावों पर ट्रिब्यूनल को विचार करना है, जिन्हें दाखिल किया गया है। आपको बता दें कि चुनाव आयोग ने बंगाल के 91 लाख वोटरों का नाम मतदाता सूची से काट दिया है। चुनाव में करीब 2.4 लाख केंद्रीय अर्धसैनिक बल के जवानों ने पूरे राज्य को घेर लिया है। ऐसा लग रहा है कि चुनाव आयोग ने किसी जंग की तैयारी कर रखी है। सड़कों पर भारी-भरकम और डरावने दिखने वाले ‘शौर्य’ और ‘मार्क्समैन’ जैसे बख्तरबंद वाहन दौड़ रहे हैं, ताकि लोगों में केंद्र की सत्ता का डर पैदा हो।

सुप्रीम कोर्ट में उठे ये सवाल
सोमवार को बंगाल में SIR को लेकर दायर विभिन्न याचिकाओं की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की बेंच ने एक मुस्लिम महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हमें इस मामलों पर एक अलग बेंच बिठानी चाहिए थी। कोर्ट की यह टिप्पणी सीनियर वकील मेनका गुरुस्वामी की इस दलील के बाद सामने आई, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 का उपयोग करते हुए बड़ी संख्या में नए वोटर मतदाता सूची में जोड़े हैं। उन्होंने कहा कि करीब 5-7 लाख नए वोटर जोड़े गए हैं। इस पर कोर्ट ने उनसे एक याचिका दायर करने को कहा। कोर्ट ने कहा कि जब किसी मामले में चुनौती दी जाएगी तो कोर्ट को वह मामला देखना पड़ेगा। हैरानी की बात यह है कि इसी साल 1 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने उस आरोप को मानने से इनकार कर दिया था कि राज्य में SIR की प्रक्रिया के दौरान ही फॉर्म 6 के तहत 30 हजार आवेदन जमा किए गए। उसी दिन वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने बेंच को बताया था कि एक ही व्यक्ति ने फॉर्म 6 के 30 हजार आवेदन जमा किए हैं। फॉर्म 6 का उपयोग तब होता है, जब किसी वोटर को पहली बार मतदाता सूची में नाम जुड़वाना हो या उसे अपने निवास स्थान का पता बदलना हो। लेकिन फॉर्म 6 का उपयोग उस समय नहीं हो सकता, जब SIR की प्रक्रिया चल रही हो। इसक बावजूद फॉर्म 6 के बंडल जमा हुए। तब जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि यह अक्सर होता है। पहली बार नहीं हुआ। इस पर आपत्ति की जा सकती है।
फॉर्म 6 से जोड़े फेक वोटर्स
इससे पहले बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर फॉर्म 6 के माध्यम से फेक वोटर जोड़ने की आशंका जताई थी। उनका आरोप था कि इस प्रक्रिया का दुरुपयोग बाहरियों के वोट जोड़ने में किया जा रहा है। यह भी गौरतलब है कि पिछले दिनों चीफ जस्टिस ने अखबार में प्रकाशित एक लेख का हवाला देते हुए कहा था कि SIR की प्रक्रिया देश के 21 राज्यों में अच्छी तरह से शांतिपूर्वक चल रही है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इसे लेकर तमाम विवाद खड़े हो रहे हैं। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन सभी लोगों के मामलों की सुनवाई के लिए बंगाल में विशेष ट्रिब्यूनल गठित किए गए हैं, जिनके पास खुद को मतदाता बताने वाले जरूरी कागजात हैं, फिर भी उनका नाम मतदाता सूची से काटा गया है। ऐसी की एक मुस्लिम महिला की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने उसनके मामले की तुरंत सुनवाई करने का आदेश जारी करते हुए कहा कि ट्रिब्यूनल को हर हाल में आखिरी चरण के मतदान 29 अप्रैल से दो दिन पहले 27 अप्रैल तक लंबित सभी मामलों की सुनवाई पूरी करनी होगा। मुस्लिम महिला के पास खुद को मतदाता साबित करने के लिए आधार कार्ड और पासपोर्ट दोनों उपलब्ध हैं। बेंच ने अपने आदेश में कहा कि पीड़ित महिला ने 3 अप्रैल को अपीलीय ट्रिब्यूनल के सामने न्याय की गुहार लगाई थी, लेकिन उसके मामले को नहीं सुना गया। अब हम आदेश देते हैं कि ट्रिब्यूनल बिना बारी के याचिकाकर्ता महिला का केस सुने और उस पर अपना फैसला दे।
विशेष ट्रेनों से भेजेंगे 500 वोटर
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले एक नई और अनोखी रणनीति सुर्खियों में है, जिसने राजनीति के जानकारों को भी हैरान कर दिया है। सूरत के उधना रेलवे स्टेशन से ‘वोटर्स स्पेशल’ ट्रेन के जरिए बड़ी संख्या में बंगाली मतदाताओं को उनके ही गृह राज्य में भेजा जा रहा है, ताकि वे अपने मताधिकार का सही इस्तेमाल कर सकें। करीब 1300 लोग पहली ट्रेन से रवाना हुए हैं, जबकि कुल मिलाकर चार ट्रेनों के जरिए लगभग 5000 मतदाताओं को बंगाल भेजने की योजना है। सूरत में रहने वाले करीब 2.5 लाख बंगाली मजदूर मुख्य रूप से हीरा पॉलिशिंग और कपड़ा मिलों में काम करते हैं। ये लोग लंबे समय से अपने घरों से दूर हैं, और कई बार अपने वोट का इस्तेमाल नहीं कर पाते थे। अब इनकी स्थिति बदलने के लिए भाजपा ने यह ‘वोटर्स स्पेशल’ ट्रेन योजना शुरू की है। इन ट्रेनों में सिर्फ असली और सत्यापित मतदाता ही यात्रा कर रहे हैं, जिनके नाम वोटर लिस्ट में मौजूद हैं। टिकट, खाना और पानी की व्यवस्था पूरी तरह से पार्टी की तरफ से मुफ्त है। पहली ट्रेनों का संचालन 18-20 अप्रैल के आसपास हुआ है, और बाकी ट्रेनों 24 अप्रैल को रवाना होंगी। ये ट्रेनें सीधे कोलकाता पहुंचेंगी और वहां से मतदाता अपने गांव जाकर मतदान करेंगे।




