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प्राधिकरण कर्मियों ने भरी हुंकार,नही सहेंगे अत्याचार

उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा मुख्य अतिथि व सचिव डॉक्टर वेद प्रकाश मिश्रा विशिष्ट अतिथि

  • एकजुट कर्मचारियों की मजबूत आवाज विकास प्राधिकरण बैठक में समाधान की दिशा तय
  • प्रदेशभर से जुटे कर्मचारी, एक मंच पर उठीं मांगें
  • अवधेश कुमार सिंह ने रखी 11 सूत्रीय मांगों की रूपरेखा
  • संवाद और समाधान की उम्मीद के बीच बढ़ी एकजुटता
  • विनियमितीकरण और सेवा नियमावली पर जोर
  • वेतन विसंगतियों और स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता
  • प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी से बढ़ा विश्वास
  • विभिन्न जनपदों के प्रतिनिधियों ने साझा की समस्याएं
  • संघर्ष के साथ समाधान की दिशा में बढ़ते कदम

वाराणसी। वीडीए सभागार में आयोजित उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण कर्मचारी संयुक्त संगठन की प्रांतीय बैठक ने एक सकारात्मक और सशक्त संवाद, एकजुटता और अधिकारों के प्रति सजगता का संदेश दिया। यह बैठक केवल मांगों को दोहराने का मंच नहीं रही, बल्कि कर्मचारियों के बीच समन्वय, स्पष्ट रणनीति और समाधान की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण अवसर बनी। प्रदेश के विभिन्न जिलों गाजियाबाद, मेरठ, मुरादाबाद, आगरा, मथुरा, लखनऊ, उन्नाव, कानपुर, प्रयागराज, अयोध्या, सहारनपुर और गोरखपुर से आए प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को व्यापकता और मजबूती प्रदान की। यह दर्शाता है कि कर्मचारी अब अपनी समस्याओं को स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि पूरे प्रदेश में एक साझा आवाज के रूप में सामने आना चाहते हैं। बैठक की अगुवाई करते हुए अवधेश कुमार सिंह ने कर्मचारियों की 11 सूत्रीय मांगों को विस्तार से रखते हुए कहा कि संगठन लगातार सरकार और विभागीय अधिकारियों के साथ संवाद कर रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारियों का उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि समाधान है। हालांकि, लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद मांगों के क्रियान्वयन में देरी चिंता का विषय बनी हुई है। बैठक का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि इसमें प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति ने संवाद की संभावनाओं को और मजबूत किया। पुर्ण बोरा और डा. वेद प्रकाश मिश्रा की मौजूदगी ने कर्मचारियों को यह भरोसा दिया कि उनकी आवाज सीधे निर्णय लेने वाले स्तर तक पहुंच रही है। इस पूरे आयोजन का संदेश स्पष्ट था। कर्मचारी अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं, लेकिन वे समाधान के लिए संवाद और सकारात्मक प्रयासों को प्राथमिकता देना चाहते हैं। यह बैठक संघर्ष का संकेत जरूर देती है, लेकिन वह संघर्ष टकराव का नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार और न्यायपूर्ण समाधान का है।

प्रदेश स्तर पर एकजुटता का प्रदर्शन

वाराणसी में आयोजित इस प्रांतीय बैठक ने यह साबित कर दिया कि विकास प्राधिकरण के कर्मचारी अब संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करने के लिए तैयार हैं। अलग-अलग जिलों से आए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं को साझा किया, जिससे एक व्यापक तस्वीर सामने आई।

11 सूत्रीय मांगों का स्पष्ट एजेंडा

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह ने कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को रखते हुए कहा कि दैनिक वेतन और वर्कचार्ज कर्मचारियों का विनियमितीकरण, सेवा नियमावली का प्रख्यापन, वेतन विसंगतियों का समाधान और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार बेहद जरूरी है।

संवाद की प्रक्रिया और उम्मीदें

कहा कि सरकार और विभागीय अधिकारियों के साथ लगातार संवाद जारी है। कई बार सकारात्मक संकेत भी मिले हैं, लेकिन ठोस परिणाम सामने आने में देरी हो रही है। इसके बावजूद संगठन ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। बैठक में उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा और सचिव डा.वेद प्रकाश मिश्रा की उपस्थिति ने कर्मचारियों को यह संदेश दिया कि उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जा रहा है।

विभिन्न संगठनों की सक्रिय भागीदारी

वाराणसी विकास प्राधिकरण कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजकिशोर सिंह, महामंत्री मोहम्मद फराज खान, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ और डिप्लोमा इंजीनियर संघ के पदाधिकारियों ने भी अपनी समस्याएं और सुझाव रखे। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि कर्मचारी केवल अपने अधिकारों की बात नहीं कर रहे, बल्कि वे अपनी जिम्मेदारियों को भी समझते हैं। उनका उद्देश्य कार्यक्षमता बढ़ाना और संस्थागत सुधार में योगदान देना है।

व्यापक असर और भविष्य की दिशा

हालांकि कर्मचारियों ने यह संकेत दिया कि यदि मांगें पूरी नहीं होती हैं तो वे संघर्ष का रास्ता अपना सकते हैं, लेकिन उनका प्राथमिक लक्ष्य संवाद के जरिए समाधान निकालना है। यह बैठक आने वाले समय में कर्मचारी आंदोलन की दिशा तय कर सकती है। यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय होते हैं, तो यह पूरे प्रदेश के कर्मचारियों के लिए एक मिसाल बनेगा।

* प्रदेश भर से आए कर्मचारियों की मजबूत एकजुटता
* 11 सूत्रीय मांगों पर स्पष्ट एजेंडा
* विनियमितीकरण और सेवा नियमावली प्रमुख मुद्दे
* वेतन विसंगतियों और स्वास्थ्य सुरक्षा पर जोर
* प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी से बढ़ा भरोसा
* संवाद के साथ संघर्ष की रणनीति तैयार
* विभिन्न कर्मचारी संगठनों की सक्रिय भागीदारी
* समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल

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