सूबे के पुलिस प्रमुख राजीव कृष्णा का नशे पर करारा प्रहार,मौत के कारोबारियों को भेज देंगे जिला कारागार
DGP राजीव कृष्ण ने बदली नशे के खिलाफ लड़ाई की रणनीति, तस्करों की कमर तोड़ने के साथ अवैध संपत्ति पर भी प्रहार

2029 तक नशामुक्त यूपी का लक्ष्य
- सिर्फ नशे की खेप नहीं, नशे के साम्राज्य पर वार
- नशे के कारोबारियों की पहचान और गिरफ्तारी।
- बार-बार अपराध में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई।
- नशे के नेटवर्क और उसके सहयोगियों तक पहुंचना।
- अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों को कार्रवाई के दायरे में लाना।
- नशे के कारोबार की आर्थिक रीढ़ कमजोर करना।
- युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए लगातार अभियान।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई अब केवल तस्करों की गिरफ्तारी और नशीले पदार्थों की बरामदगी तक सीमित नहीं रह गई है। पुलिस ने इस लड़ाई को उसके सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक आधार तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई है। नशे के कारोबार से होने वाली अवैध कमाई और उससे बनाई गई संपत्ति पर कार्रवाई इसी रणनीति का अहम हिस्सा है।
प्रदेश को वर्ष 2029 तक नशामुक्त बनाने का लक्ष्य लेकर यूपी पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने साफ संदेश दिया है कि नशे का कारोबार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क और अवैध कमाई के स्रोतों को निशाना बनाया जाएगा।
यानी अब नशे के कारोबारियों के लिए संदेश स्पष्ट है—नशे की खेप पकड़ी जाएगी, तस्कर गिरफ्तार होगा और अवैध कमाई से खड़ा किया गया आर्थिक साम्राज्य भी कार्रवाई के दायरे में आएगा।

DGP राजीव कृष्ण की रणनीति: अपराध के साथ अपराध की कमाई पर भी प्रहार
नशीले पदार्थों का कारोबार केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है। यह युवाओं के भविष्य, परिवारों की सुरक्षा और समाज की सामाजिक संरचना से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। इसी वजह से यूपी पुलिस ने नशे के खिलाफ अपनी कार्रवाई को बहुआयामी बनाया है।
DGP राजीव कृष्ण के नेतृत्व में पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की कार्रवाई का फोकस अब तीन स्तरों पर दिखाई देता है।
यही वह रणनीति है जो नशे के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई को सामान्य पुलिस कार्रवाई से आगे ले जाती है।
PIT NDPS Act के तहत बढ़ी कार्रवाई, आंकड़े दे रहे तस्वीर
यूपी पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, 23 सितंबर 2026 तक प्रदेश में नशे के कारोबार में बार-बार शामिल रहे 71 लोगों के खिलाफ PIT NDPS Act के तहत कार्रवाई की गई है। इनमें 33 मामलों में ANTF की कार्रवाई शामिल है।
इन आंकड़ों की तुलना पिछले वर्षों से करें तो कार्रवाई की गति में बड़ा बदलाव दिखाई देता है।
2024 में पूरे प्रदेश में ऐसे सिर्फ 7 लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी।
2025 में यह संख्या बढ़कर 19 हो गई।
लेकिन 2026 में 23 सितंबर तक 71 लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है।
यानी पुलिस की कार्रवाई केवल बढ़ी ही नहीं है, बल्कि नशे के कारोबार में लगातार सक्रिय रहने वाले लोगों पर शिकंजा कसने की रणनीति अधिक आक्रामक हुई है।
कार्रवाई का बढ़ता दायरा
2024 — 7 लोग
2025 — 19 लोग
2026 — 71 लोग, 23 सितंबर तक
2026 में इनमें यूपी पुलिस की ओर से 38 और ANTF की ओर से 33 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
तस्करों की अवैध संपत्ति पर भी शिकंजा
नशे के कारोबार की सबसे बड़ी ताकत उसकी अवैध कमाई होती है। तस्कर नशीले पदार्थों की बिक्री से पैसा कमाते हैं और इसी पैसे को जमीन, मकान, वाहन और अन्य संपत्तियों में बदलने की कोशिश करते हैं।
यूपी पुलिस ने इसी आर्थिक कड़ी पर चोट करने की रणनीति अपनाई है।
NDPS Act की विभिन्न धाराओं के तहत 2026 में अब तक 69 मामलों में करीब 80 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त किए जाने की कार्रवाई की गई है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, ANTF ने 40 मामलों में करीब 13 करोड़ रुपये की संपत्ति पर कार्रवाई की है। उपलब्ध विभागीय विवरण में यूपी पुलिस और ANTF की संपत्ति जब्ती के आंकड़ों में विवरण के स्तर पर कुछ अंतर दिखाई देता है, इसलिए कुल आंकड़े को विभागीय प्रेस नोट के अनुसार लगभग 78.5 करोड़ रुपये के रूप में भी बताया गया है।
यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि पुलिस अब नशे के कारोबार को केवल अपराध के रूप में नहीं, बल्कि उसके पीछे खड़े आर्थिक तंत्र के रूप में भी देख रही है।
2025 में करीब 19 करोड़ की संपत्ति पर कार्रवाई
पिछले वर्षों के आंकड़े भी पुलिस की बदलती रणनीति को समझने में मदद करते हैं।
2024 में ANTF ने चार मामलों में करीब एक करोड़ रुपये की संपत्ति पर कार्रवाई की थी।
वहीं 2025 में कुल 29 मामलों में करीब 19 करोड़ रुपये की संपत्ति पर कार्रवाई हुई। इनमें ANTF ने 28 मामलों में करीब 17 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त किए जाने की कार्रवाई की थी।
2026 में कार्रवाई का दायरा और व्यापक हुआ है।
इससे साफ है कि नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस की रणनीति अब केवल बरामदगी के आंकड़े बढ़ाने की नहीं, बल्कि तस्करी से पैदा होने वाले पूरे आर्थिक नेटवर्क को कमजोर करने की है।
PIT NDPS Act: बार-बार अपराध करने वालों पर सख्ती
PIT NDPS Act के तहत उन लोगों के खिलाफ हिरासत की कार्रवाई की जा सकती है जो लगातार या बार-बार नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार में शामिल पाए जाते हैं।
इसका उद्देश्य ऐसे लोगों की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाना है, जो सामान्य कार्रवाई के बावजूद नशे के कारोबार से बाहर नहीं आते।
यही वजह है कि 2026 में 71 लोगों के खिलाफ कार्रवाई का आंकड़ा महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
इसका संदेश उन लोगों के लिए भी स्पष्ट है जो नशे के कारोबार को आसान कमाई का जरिया समझते हैं—कानून की नजर से बचकर बार-बार अपराध करना आसान नहीं होगा।
अवैध संपत्ति पर कार्रवाई से टूटेगी तस्करों की आर्थिक ताकत
नशे के खिलाफ लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि तस्करों को केवल जेल भेजना ही पर्याप्त नहीं है। यदि अवैध कारोबार से अर्जित धन सुरक्षित रहता है, तो अपराधी या उसका नेटवर्क दोबारा सक्रिय होने की कोशिश कर सकता है।
इसीलिए NDPS Act की धारा 68(E) और 68(F) के तहत नशे के कारोबार से अर्जित संपत्ति को फ्रीज करने और कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्ती की कार्रवाई की जाती है।
इस व्यवस्था का व्यापक उद्देश्य यही है कि अपराध से अर्जित संपत्ति को अपराधी के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच न बनने दिया जाए।
DGP राजीव कृष्ण का स्पष्ट संदेश: नेटवर्क खत्म करना है
DGP राजीव कृष्ण ने नशे के खिलाफ पुलिस की रणनीति को केवल गिरफ्तारी केंद्रित नहीं रखा है। उनका जोर पूरे नेटवर्क को खत्म करने और नशे के कारोबार से आने वाले पैसे पर कार्रवाई करने पर है।
यह दृष्टिकोण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नशे का कारोबार अक्सर एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। इसके पीछे सप्लायर, तस्कर, वितरक और आर्थिक सहयोग की अलग-अलग कड़ियां हो सकती हैं।
ऐसे में किसी एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के बजाय पूरे नेटवर्क की पहचान करना और उसकी आर्थिक क्षमता को कमजोर करना ज्यादा प्रभावी रणनीति बनती है।
राजीव कृष्ण का संदेश भी इसी दिशा में है कि युवाओं को नशे की ओर धकेलने वाले तत्वों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
युवाओं को बचाना सबसे बड़ा लक्ष्य
नशे के खिलाफ यह लड़ाई केवल अपराधियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं है। इसका सबसे बड़ा मकसद प्रदेश के युवाओं को नशे के जाल से बचाना है।
नशीले पदार्थों का कारोबार जितना फैलता है, उसका असर उतना ही व्यापक होता है। परिवार प्रभावित होते हैं, युवा अपराध की ओर बढ़ सकते हैं और समाज में कई दूसरी समस्याएं जन्म ले सकती हैं।
इसलिए 2029 तक नशामुक्त उत्तर प्रदेश का लक्ष्य केवल प्रशासनिक लक्ष्य नहीं, बल्कि सामाजिक अभियान भी है।
पुलिस की सख्ती, अवैध संपत्ति पर कार्रवाई, नेटवर्क की पहचान और युवाओं में जागरूकता—इन सभी मोर्चों पर एक साथ काम करने से ही इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
2029 का लक्ष्य, आज से मजबूत तैयारी
उत्तर प्रदेश को 2029 तक नशामुक्त बनाने का लक्ष्य बड़ा है, लेकिन 2026 में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि कार्रवाई की दिशा में तेजी आई है।
7 से 19 और फिर 71 तक पहुंचा PIT NDPS Act की कार्रवाई का आंकड़ा पुलिस की बढ़ती सक्रियता को दर्शाता है।
इसी तरह नशे के कारोबार से जुड़ी संपत्तियों पर कार्रवाई भी लगातार बढ़ रही है।
यह बदलाव बताता है कि यूपी पुलिस अब नशे के खिलाफ लड़ाई में एक नई नीति पर आगे बढ़ रही है—तस्कर को पकड़ो, नेटवर्क को तोड़ो और अवैध कमाई की आर्थिक ताकत खत्म करो।
नशे के खिलाफ निर्णायक संदेश
उत्तर प्रदेश में नशे के कारोबार के खिलाफ DGP राजीव कृष्ण की रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यही है कि पुलिस ने कार्रवाई का दायरा व्यापक किया है।
अब लड़ाई केवल यह नहीं है कि कितनी नशीली खेप पकड़ी गई और कितने तस्कर गिरफ्तार हुए। असली लड़ाई यह है कि नशे के कारोबार को आर्थिक रूप से इतना कमजोर कर दिया जाए कि उसका नेटवर्क दोबारा खड़ा ही न हो सके।
2029 तक नशामुक्त उत्तर प्रदेश का लक्ष्य इसी सोच को आगे बढ़ाता है।
यदि कार्रवाई इसी गति और रणनीतिक तरीके से जारी रहती है तो नशे के कारोबारियों के लिए उत्तर प्रदेश में अपना अवैध साम्राज्य चलाना लगातार मुश्किल होता जाएगा।
DGP राजीव कृष्ण के नेतृत्व में संदेश साफ है—नशे का कारोबार करने वालों के लिए कानून का शिकंजा केवल गिरफ्तारी तक नहीं, बल्कि उनकी अवैध कमाई और संपत्ति तक पहुंचेगा।




