अडानी को अमेरिका कर सकता है अरेस्ट, या मोदी जी कर देंगे सब सेट
घूसखोरी मामला: अब अदानी को ई-मेल से मिलेगा अमेरिकी कोर्ट का समन, क्या पीएम मोदी बचा पाएंगे अपने दोस्त को?

घूसखोरी मामला: अब अदानी को ई-मेल से मिलेगा अमेरिकी कोर्ट का समन, क्या पीएम मोदी बचा पाएंगे अपने दोस्त को?
– 235 मिलियन डॉलर की घूसखोरी और धोखाधड़ी का है मामला
– ईमेल पर समन भेजने से अदानी के पास नहीं होगा कोई बहाना
-समन की तामील न करने से अदानी को किया जा सकता है अरेस्ट
– लगातार 14 महीने से अदानी को बचाए रखा था मोदी सत्ता ने
अजय कुमार शुक्ला
नई दिल्ली।
एक छोटी सी खबर से सत्ता के मजबूत कंधे पर टिके किले भीरभराकर गिर जाते हैं। यह बात भारत के दूसरे सबसे अमीर गौतम अदानी के मामले में पहले भी सच हुई थी और शुक्रवार 23 जनवरी को एक बार फिर सही साबित हुई है। अमेरिका में बिजली बनाने का ठेका हासिल करने के लिए 2200 करोड़ की घूसखोरी के मामले में अब अमेरिकी सिक्योरिटी एक्सचेंज कमीशन के कोर्ट ने भारत सरकार को किनारे कर सीधे अदानी को समन भेजने का फैसला किया है। भारत की नरेंद्र मोदी सत्ता बीते 14 महीने से अपने दोस्त अदानी को कोर्ट का समन नहीं दे रही थी। इसे देखते हुए अमेरिकी कोर्ट ने यह फैसला किया है।
यह मामला 2023 का है। इस मामले में गौतम अदानी और उसके भतीजे सागर अदानी पर प्रोजेक्ट हथियाने के लिए 265 मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी और घूसखोरी का आरोप है।

इस फैसले का वैधानिक मतलब क्या है?
इस फैसले के दो नतीजे होंगे- एक तो यह कि एक बार मेल भेजे जाते ही रिसीव का निशान आने पर यह साफ हो जाता है कि सामने वाले को ई-मेल मिल गया है। इसके बाद सामने वाला इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि उसे कोर्ट का समन नहीं मिला। कोर्ट का समन न्यायिक प्रक्रिया में भाग लेने के लिए बुलावा माना जाता है। इसका मतलब है कि कोर्ट आपका पक्ष जानना चाहता है। इसीलिए अदालती समन को संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाना एक जिम्मेदारी बनती है। अमेरिकी कोर्ट ने इसीलिए अदानी को ईमेल से समन भेजने का निर्णय लिया है, ताकि अगर कंपनी के किसी छोटे कर्मी को भी समन मिले तो वह उसे ले जाकर सीधे अपने मालिक को पेश करे। फैसले का दूसरा अहम पहलू यह भी है कि अब अदानी के मामले में अमेरिकी कोर्ट का भरोसा भारत सरकार पर उठ गया है। भारत सरकार 14 महीने से अदानी को व्यक्तिगत रूप से समन देने की कानूनी प्रक्रिया को टाले हुए है। इसी के कारण अब अमेरिकी कोर्ट को प्रोटोकॉल से बाहर जाकर यह कदम उठाना पड़ा है।
अदानी के शेयर 15 प्रतिशत गिरे
भारत की न्याय प्रक्रिया के अनुसार, कोर्ट के समन की तामील न करने पर गिरफ्तारी वारंट जारी होता है और आरोपी को पकड़कर कोर्ट लाने के लिए पुलिस भेजी जाती है। अमेरिकी न्याय व्यवस्था भी यही कहती है कि अगर कोर्ट से बार-बार समन जारी होने के बाद भी आरोपी अगर अदालत में पेश न हो तो उसे पकड़कर लाया जाए। इससे कोर्ट को यह अंदेशा हो जाता है कि आरोपी न्यायिक प्रक्रिया से भाग रहा है और कोर्ट आने से बचना चाहता है। यह आरोपी के गुनहगार होने के शक को और भी मजबूत करता है।
अमेरिकी कोर्ट के इस कदम को देखकर अदानी के शेयरों में पैसा लगाने वाले निवेशकों में डर का माहौल है। यही कारण है कि शुक्रवार 23 जनवरी को अदानी के शेयरों में 15 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई और शेयर बाजार से अदानी की कंपनियों का मार्केट कैप 12.5 बिलियन डॉलर कम हो गया। इससे गिरावट से अदानी को करीब 1 लाख 10 हजार करोड़ का चूना लगा है। इससे पहले हिंडनबर्ग रिपोर्ट में शेयरों की हेराफेरी कर मुनाफा कमाने का आरोप लगने के बाद अदानी का मार्केट कैप 15 खरब रुपए घट गया था।
अब आगे क्या हो सकता है ?
अदानी समूह की सभी 12 कंपनियां शेयर बाजार में रजिस्टर्ड है। रजिस्टर्ड कंपनियों को पंजीकरण के समय अपना कॉरपोरेट पता, फोन नंबर और ई-मेल लिखना ही पड़ता है। ऐसे में अमेरिकी कोर्ट अब कंपनी को बार-बार समन भेज सकती है। अगर अदानी समूह से समन का कोई जवाब नहीं आए तो कानून के तहत कंपनी यह दावा नहीं कर सकती कि उसे समन नहीं मिला। बार-बार समन भेजने के बाद भी अगर गौतम अदानी और अन्य आरोपी अमेरिकी कोर्ट में हाजिर नहीं होते हैं तो दबाव बए़ाने के लिए कोर्ट अदानी की गिरफ्तारी का आदेश भी दे सकती है।
दूसरा कदम यह भी उठाया जा सकता है कि अदानी की कंपनियों को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज से ब्लैकलिस्ट कर देना और अमेरिका में अदानी की कंपनियों की संपत्ति को फ्रीज, यानी जब्त कर लेना। अदानी और भारत सरकार पर दबाव बनाने के लिए अमेरिकी कोर्ट अदानी की कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बैंकों से मिले कर्ज की रकम को जब्त करने की कार्रवाई भी कर सकती है। इससे गौतम अदानी की रही-सही व्यावसायिक साख भी मिट्टी में मिल सकती है और भारत समेत दुनिया के कई देशों में उसकी कंपनियों का दिवाला निकल सकता है। शुक्रवार 23 जनवरी को अदानी ग्रुप की जिन 12 कंपनियों के शेयर गिरे, उनमें सबसे बड़ा झटका अदानी ग्रीन एनर्जी को लगा है। कंपनी के शेयर में करीब 14.5% की गिरावट हुई, जबकि अदानी एनर्जी सॉल्यूशन में 11.68% की गिरावट दर्ज की गई।
जोखिम के बाद भी इन बैंकों ने लगाया पैसा
अदानी के खिलाफ अमेरिकी कोर्ट के समन और उस पर गिरफ्तारी की लटकी तलवार के बादवूजद अदानी पावर के 90 फीसदी कर्ज को भारत की प्रमुख सार्वजनिक बैंकों और निजी वित्त संस्थानों ने खरीदा है। अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि हाल में दअदानी ने अदानी पावर के 75 अरब रूप के कर्ज को बेचा है। इस कर्ज का 90% यानी करीब 70 अरब रुपए भारतीय बैंकों ने खरीदा है। बताया जाता है कि अदानी पावर ने दो साल के बॉन्ड के रूप में करीब 29 अरब और तीन साल के बॉन्ड के रूप में 27 अरब रुपए जुटाए हैं। बाकी के 19 अरब रुपए से ज्यादा चार और पांच साल के बॉर्न्ड हैं। इनमें से 25 अरब के बॉन्ड एसबीआई म्यूचुअल ने और 6 अरब रुपए के बॉर्न्ड कोटक महिंद्रा ने खरीदे हैं। आईसीआईसीआई ने 11 अरब और एक्सिस बैंक ने 10 अरब रुपए के बॉन्ड खरीदे हैं। शुक्रवार को अदानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट के बाद अब तमाम वित्तीय संस्थाओं और निवेश प्रबंधकों ने अपने होंठ सिल लिए हैं।




