वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने ग्रीन बेल्ट में निर्माण न होने के दिये कड़े निर्देश, न मानने वालों का बिगाड़ देंगे भेष

- हरी पट्टी, सुरक्षित भविष्य वाराणसी में नियोजित विकास की निर्णायक पहल
- रिंग रोड और प्रमुख मार्गों पर ग्रीन बेल्ट अवैध निर्माण पर शून्य सहनशीलता
- 60 मीटर रिंग रोड के दोनों ओर 20-20 मीटर हरित पट्टी अनिवार्य
- पेट्रोल पंप से स्टेडियम तक केवल सार्वजनिक व पर्यावरण अनुकूल उपयोग अनुमन्य
- बिना मानचित्र स्वीकृति निर्माण ध्वस्तीकरण तय
- महायोजना-2031 में हरित पट्टी मार्गों की स्पष्ट सूची
- आज़मगढ़, जी.टी. रोड, संदहा मार्ग सहित रिंग रोड पर विशेष निगरानी
- भू-स्वामी, बिल्डर और विकासकर्ता की जिम्मेदारी तय
- हरियाली बनाम अतिक्रमण नागरिक हित सर्वोपरि
अमित मौर्य
वाराणसी। काशी एक शहर नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और सतत जीवन की निरंतर धारा है। यहां का हर मार्ग, हर मोहल्ला और हर मोड़ इतिहास और वर्तमान के बीच संवाद करता है। लेकिन बीते कुछ वर्षों में अनियंत्रित शहरीकरण, अवैध निर्माण और तात्कालिक मुनाफे की सोच ने इस संवाद को बाधित किया है। सड़कों के किनारे कंक्रीट के जंगल खड़े हो गए, हरियाली सिमटती चली गई और यातायात का दबाव लगातार बढ़ता गया। इसी पृष्ठभूमि में वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा रिंग रोड एवं प्रमुख मार्गों के किनारे ग्रीन बेल्ट (हरित पट्टी) के प्रावधान को सख्ती से लागू करने की अपील, शहर के भविष्य को बचाने की निर्णायक कोशिश के रूप में सामने आई है।।वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा की यह अपील केवल एक औपचारिक सूचना नहीं, बल्कि नगर नियोजन की उस मूल भावना की पुनः स्थापना है, जिसमें विकास और पर्यावरण को आमने–सामने नहीं, बल्कि साथ–साथ चलना चाहिए। रिंग रोड की कुल चौड़ाई 60 मीटर निर्धारित करते हुए उसके दोनों ओर 20-20 मीटर चौड़ी ग्रीन बेल्ट विकसित करने का निर्णय, यातायात प्रबंधन के साथ–साथ पर्यावरणीय संतुलन को भी मजबूत करता है। हरित पट्टी धूल, धुएं और शोर को अवशोषित करने के साथ-साथ शहर को तापमान संतुलन, जैव विविधता और खुली सार्वजनिक जगहें प्रदान करती है। आज वाराणसी जैसे तीव्र गति से फैलते शहर में हर खाली जमीन पर नज़र गड़ाए बैठे बिल्डरों और भू–माफियाओं के लिए ग्रीन बेल्ट सबसे बड़ा अवरोध है। यही कारण है कि इन क्षेत्रों में अवैध निर्माण की प्रवृत्ति लगातार बढ़ी है। प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि प्रस्तावित ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में सामान्यतः किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण पूर्णतः प्रतिबंधित है। केवल वही उपयोग अनुमन्य होंगे, जो सार्वजनिक हित और पर्यावरण संरक्षण से सीधे जुड़े हों, जैसे पार्क, खेल मैदान, स्टेडियम, ट्रैफिक पार्क या अन्य खुले सार्वजनिक स्थल। बिना मानचित्र स्वीकृति किए गए निर्माण को अवैध घोषित कर ध्वस्तीकरण और दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी, यह संकेत देती है कि अब नियम कागज़ों तक सीमित नहीं रहेंगे। यह अपील भू-स्वामियों, बिल्डरों और विकासकर्ताओं के लिए चेतावनी भी है और अवसर भी है कि वे अल्पकालिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक, टिकाऊ विकास का हिस्सा बनें। महायोजना-2031 (पुनरीक्षित) में हरित पट्टी वाले मार्गों की स्पष्ट सूची और चौड़ाई का उल्लेख, वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक अस्पष्टता पर विराम लगाता है। अब सवाल नियमों की मौजूदगी का नहीं, बल्कि उनके निष्पक्ष और सख्त क्रियान्वयन का है। ‘अचूक संघर्ष’ की दृष्टि से यह मुद्दा केवल अवैध निर्माण का नहीं, बल्कि उस सोच के खिलाफ संघर्ष है जो शहर को सिर्फ मुनाफे की वस्तु मानती है। हरित पट्टी का संरक्षण, वास्तव में जनस्वास्थ्य, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा है।

ग्रीन बेल्ट की अवधारणा और शहरी जीवन
शहरी नियोजन में ग्रीन बेल्ट केवल सजावटी हरियाली नहीं, बल्कि शहर के फेफड़े मानी जाती है। यह क्षेत्र प्रदूषण को नियंत्रित करता है, वर्षा जल के प्राकृतिक बहाव को बनाए रखता है और नागरिकों को खुला सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराता है। वाराणसी जैसे ऐतिहासिक और घनी आबादी वाले शहर में ग्रीन बेल्ट का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यहां यातायात, पर्यटन और आबादी का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
रिंग रोड और प्रमुख मार्गों पर बढ़ता दबाव
रिंग रोड फेज–1, 2 और 3 बभनपुरा से सजोई तक 60 मीटर चौड़ा है। इसके दोनों ओर प्रस्तावित 20–20 मीटर की हरित पट्टी, यातायात और आवासीय क्षेत्रों के बीच सुरक्षा कवच का काम करती है। आजमगढ़ रोड, जी.टी. रोड, संदहा मार्ग और अन्य प्रमुख मार्गों पर अतिक्रमण ने जाम, दुर्घटनाओं और प्रदूषण को बढ़ाया है। ग्रीन बेल्ट इन समस्याओं का स्थायी समाधान प्रस्तुत करती है।
क्या अनुमन्य है और क्या पूरी तरह प्रतिबंधित
वीडीए ने स्पष्ट किया है कि ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में केवल सार्वजनिक और पर्यावरण-अनुकूल उपयोग ही अनुमन्य हैं। इनमें पेट्रोल पंप, खेल का मैदान, स्पोर्ट्स ग्राउंड, स्विमिंग पूल, बहुउद्देशीय खुले स्थान, पार्क, स्टेडियम, पिकनिक स्थल, ट्रैफिक पार्क, मनोरंजन पार्क, एक्वेरियम, चिड़ियाघर, संग्रहालय तथा पक्षी और वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं। इनके अतिरिक्त किसी भी प्रकार का आवासीय, व्यावसायिक या निजी निर्माण पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
कानूनी प्रावधान और दंडात्मक कार्रवाई
उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम के अंतर्गत बिना मानचित्र स्वीकृति किया गया निर्माण अवैध है। ऐसे निर्माणों पर ध्वस्तीकरण, जुर्माना और अन्य दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। वी डी ए ने यह भी संकेत दिया है कि प्रभावशाली लोगों के मामलों में भी कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
महायोजना-2031 और हरित पट्टी वाले मार्ग
महायोजना-2031 में 30 मीटर और 20 मीटर हरित पट्टी वाले मार्गों की स्पष्ट सूची दी गई है, जिनमें वाराणसी-आजमगढ़, वाराणसी-गाजीपुर, सारनाथ-मुनारी, अखरी बाईपास-चुनार, मोहनसराय-विश्व सुंदरी पुल और पूरा रिंग रोड कॉरिडोर शामिल है। यह सूची प्रशासन और नागरिक दोनों के लिए मार्गदर्शक है।
भू-स्वामी, बिल्डर और विकासकर्ता की भूमिका
नियमों की अनदेखी कर बनाए गए ढांचे अंततः आर्थिक और कानूनी संकट में बदल जाते हैं। विधिवत मानचित्र स्वीकृति लेकर किया गया निर्माण ही सुरक्षित निवेश है। विकासकर्ताओं को समझना होगा कि टिकाऊ विकास ही दीर्घकालिक लाभ देता है।
नागरिक सहभागिता क्यों जरूरी
ग्रीन बेल्ट की रक्षा केवल प्रशासन का काम नहीं। नागरिकों की सतर्कता, शिकायत और निगरानी से ही अवैध निर्माण रोके जा सकते हैं। हर नागरिक का यह अधिकार भी है और कर्तव्य भी कि वह अपने शहर की हरियाली बचाए। वाराणसी का भविष्य कंक्रीट में नहीं, हरियाली में सुरक्षित है।
प्रशासन की सबसे बड़ी परीक्षा
घोषणाओं के बाद वास्तविक चुनौती सख्त और समान कार्रवाई की है। यदि नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं, तभी जनविश्वास कायम रहेगा।
* ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण, शहर के स्वास्थ्य पर सीधा हमला
* बिना मानचित्र स्वीकृति निर्माण अवैध
* प्रभावशाली हों या आम, नियम सब पर समान
* पर्यावरण संरक्षण, कोई विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता
* आज की सख्ती, कल की सुरक्षित काशी




