
– कहा- अदानी से निजी और पेशेवर रिश्तों के खातिर लगाया पैसा
– ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड के रास्ते हवाला के जरिए आया धन
– एक बार फिर गौतम के बड़े भाई विनोद अदानी का आया नाम
– इंटली और स्विस बैंक ने जांच बिठाई, रोक दिया सारा भुगतान

नई दिल्ली। भारत में सबसे अमीर व्यक्तियों में दूसरे नंबर पर आने वाले उद्योगपति गौतम अदानी का नाम लेना सड़क से संसद तक मना है, क्योंकि वे राष्ट्रसेठ माने जाते हैं। भाजपा समर्थकों का यह मानना है कि अदानी आज जो भी कर रहे हैं, वही देश का विकास है। ऐसे में उन पर सवाल उठाना देशद्रोह के समान है।अब केंद्र सरकार के इसी भरोसे को कायम रखते हुए गौतम अदानी ने अपने खाते में विदेश से 3 बिलियन डॉलर की रकम हासिल की है। यह रकम 2023 में संयुक्त अरब अमीरात के नासेर अली शाबान अहली और ताईवान के चांग चुंग लिंग नाम के दो व्यक्तियों से प्राप्त की गई है। नासेर से जहां अदानी को 2.02 बिलियन डॉलर की रकम मिली है, वहीं चांग चुंग ने 1.02 बिलियन डॉलर दिए हैं। अदानी के बैंक खाते में 3 बिलियन डॉलर से ज्यादा की यह रकम साफ दिखने लगी है। अदानी के खाते पर नजर रखने वाली पत्रकारों की टीम ओसीसीआरपी ने बैंक अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है।



ऐसे खुला यह राज
फरवरी 2023 में बैंक अधिकारियों ने एक अनौपचारिक बातचीत में इस राज का खुलासा किया। ओसीसीआरपी के पास उपलब्ध अदानी के बैंक खाते के दस्तावेज के अनुसार, इसमें से एक बड़ी रकम ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड से आई है। यह द्वीप कालेधन को सफेद करने का एक अंतरराष्ट्रीय स्रोत माना जाता है। बैंक दस्तावेजों में नासेर और चांग चुंग लिंग ने यह माना है कि उनके दानी समूह से करीबी रिश्ते हैं। इस रिश्ते की आशंका इससे पहले हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट में भी सामने आई थी, लेकिन तब अदानी समूह ने इससे साफ इनकार कर दिया था। नासेर और चांग चुंग ली ने यह भी माना है कि दोनों के पास अदानी समूह के अरबों डॉलर के शेयर हैं। अदानी के बैंकिंग दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि 2023 मेंजमा हुआ काला धन गल्फ एशिया ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट (अहली) और लिंगो इन्वेस्टमेंट लिमिटड से आया, जो चांग चुंग ली की कंपनी है। इस पूरे पैसे को ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड के रास्ते इसलिए लाया गया, ताकि इसके मूल स्रोत की पहचान छिपाई जा सके। बैंक दस्तावेजों में इस काले धन को अदानी की कंपनियों से निजी और पेशेवर रिश्तों के नाते निवेश के रूप में दिखाया गया है, जबकि पूरा लेन-देन हवाला के जरिए हुआ है।
क्या कहते हैं स्विस बैंक के दस्तावेज?
स्विस बैंक के जिनेवा स्थित दफ्तर में आइरईवायएल सानपाओलो नाम के एक समूह के दस्तावेजों से पता चलता है कि अहली और चांग चुंग ने अदानी के समूह में उम्मीद से ज्यादा निवेश कर रखा है। इससे पहले हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में यह सामने आया था कि अदानी समूह में दोनों के निवेश की रकम 2013 से 2018 के बी मिलियन डॉलर में थी। लेकिन अब पता चल रहा है कि 2023 में दोनों ने अदानी समूह की कंपनियों के शेयरों में 3 बिलियन डॉलर झोंक रखे हैं। इससे पहले बैंक के अधिकारियों ने चांग चुंग लिंग के खिलाफ जांच की कार्रवाई में उसे अदानी समूह का आदमी मानकर उसके 310 मिलियन डॉलर की संपत्तियों को जब्त कर लिया था। अधिकारियों ने चांग की पहचान को लेकर अभीकुछ नहीं कहा है, लेकिन यह जरूर साफ किया है कि जांच एक आपराधिक मामले में की गई। यह जांच धन शोधन और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़ी है। अदानी ग्रुप चांग और अहली समूह के साथ किसी तरह के संबंध होने से पहले ही इनकार कर चुका है।
इटली की प्राइवेट बैंक ने की खातों की जांच
अदानी समूह में विदेश से आ रहे काले धन की जांच इटली की एक प्राइवेट बैंक फिदेरियूम इटेस्टा सानपाओलो ने की। बैंक की इस आंतरिक जांच में पाया गया कि अदानी के खाते में दुबई की कंपनी राइल एमईए, अहली और चांग चुंग की कंपनियों ने 3 बिलियन डॉलर से ज्यादा झोंके हैं। यि बात सामने आने पर बैंक ने अहली और चांग को सफाई देने के लिए बुलाया। यह बैठक फरवरी 2023 में हुई। इसमें अहली और चांग ने एक लिखित बयान में कहा कि उन्होंने अदानी से निजी और पेशेवर रिश्ते के नाते अदानी समूह की कंपनियों में 3 बिलियन डॉलर से अधिक रकम का निवेश किया है। दोनों ने इस आरोप से इनकार किया कि उनके निवेश का पैसा हवाला से आया हुआ काला धन नहीं है। इसके बाद बैंक ने सावधानी बरतते हुए दोनों के खाते से कोई और निवेश करने पर रोक लगा दी है।
हेज फंड से किया निवेश
ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड के जरिए अदानी समूह की कंपनियां में हुआ निवेश का पैसा मूल रूप से हेज फंड का पैसा था। अहली और चांग चुंग ली ने तीनों हेज फंड में से पैसा निकालकर अदानी के शेयरों में निवेश किया। ये तीन हेज फंड हैं ग्लेनेइगल्स इन्वेस्टमेंट, पैनेगी फंड और ओएस्टर बे फंड। इन तीनों फंड का प्रबंधन एपेक्स फंड सर्विसेज करता है। यही कंपनी बरमूडा में ग्लोबल ऑपरच्युनिटी फंड का भी पंबंधन करती है, जिसने अदानी समूह की कंपनियां में 430 मिलियन डॉलर का निवेश किया था और जिसका उल्लेख हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में भी हुआ था। तब उस निवेश पर भी अहली और चांग चुंग की संलिप्तता सामने आई थी। इसके अलावा इलारा नाम के फंड से भी मॉरिशस के रास्ते अदानी की कंपनियों में पैसा लगाया गया था। हेज फंड एक प्रकार का निजी, सक्रिय रूप से प्रबंधित निवेश फंड हैं जो बहुत अमीर व्यक्तियों और संस्थानों से पैसा इकट्ठा कर शेयरों में निवेश कर उनके भाव को उठाने या गिराने का काम करते हैं। ये फंड लीवरेज, शॉर्ट सेलिंग और डेरिवेटिव्स जैसी जटिल रणनीतियों का उपयोग करते हैं, जो म्यूचुअल फंड से अधिक जोखिम भरे और फ्लेक्सिबल होते हैं।
कौन हैं अहली, चांग चुंग और क्या है इनका अदानी से रिश्ता ?
अहली और चांग चुंग ली के बारे में बीते कुछ अरसे में कई बार मीडिया रिपोर्ट में जिक्र हो चुका है। भारत के राजस्व गुप्तचर निदेशालय ने 2007 में की गई जांच के बाद अपनी रिपोर्ट में कहा था कि चांग चुंग ली अदानी की 3 कंपनियों में डायरेक्टर है, जबकि अहली एक ट्रेडिंग कंपनी के रूप में जुड़ा है। चांग के घर का पता सिंगापुर में वही है, जो गौतम अदानी के बड़े भाई विनोद अदानी के घर का पता है। 2014 में राजस्व गुप्तचर निदेशालय ने दावा किया था कि अदानी समूह अदानी समूह ने आयातित बिजली उत्पादन उपकरणों के लिए अपनी सहायक कंपनियों को ज्यादा भुगतान कर 1 बिलियन डॉलर का धन विदेश ले गया है। इस जांच रिपोर्ट में भी चांग चुंग और अहली का नाम आया था। लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई और बाद में विनोद अदानी ने दोनों को अपनी कंपनियों का डायरेक्टर बना दिया। विनोद अदानी की दोनों कंपनियों में से एक संयुक्त अरब अमीरात में और दूसरी मॉरिशस में है। अब ताजा रिपोर्ट में भी दोनों देशों का नाम आया है। हिंडनबर्ग रिपोर्ट के अनुसार चांग या तो सिंगापुर की उस कंपनी का डायरेक्टर है, जो कि अदानी से संबंधित कंपनी बताई गई है या फिर शेयर होल्डर। अदानी समूह की कंपनी के एक आला अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि चांग चुंग और अहली दोनों को अदानी समूह से सीधे निर्देश मिलते हैं और ये बात ओसीसीआरपी के पास उपलब्ध दस्तावेजों से भी साबित होती है।



