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आबकारी आयुक्त आदर्श सिंह बने गूंगा बहरा व अंधा,डीओ सुभाष चन्द्र करवा रहा चन्दौली में गांजे का काला धंधा

  • आबकारी आयुक्त आदर्श सिंह बने गूंगा बहरा व अंधा,डीओ सुभाष चन्द्र करवा रहा चन्दौली में गांजे का काला धंधा
  • नशामुक्ति के नारों के बीच पनपता ‘गांजा सिंडिकेट’
  • गांजा तस्करी के आरोपों से गरमाया चंदौली, प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
  • कार्यकाल खत्म, लेकिन कुर्सी कायम आबकारी विभाग पर उठे संदेह
  • ग्रामीणों का आरोप जिले में खुला ‘नशे का नेटवर्क’
  • मुगलसराय क्षेत्र में निगरानी कमजोर होने की चर्चा
  • कारखास और बिचौलियों के जरिए तस्करी मैनेज होने के आरोप
  • छापेमारी से पहले सूचना लीक होने की चर्चाएं
  • युवाओं तक पहुंच रहा गांजा, सामाजिक चिंता बढ़ी
  • नशामुक्ति अभियान और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर

चंदौली। प्रदेश सरकार भले ही ‘नशामुक्त प्रदेश’ का नारा देकर कठोर कार्रवाई का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर कई जिलों से जो तस्वीर सामने आ रही है, वह इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। चंदौली जनपद भी इन दिनों ऐसे ही सवालों के केंद्र में है, जहां गांजा तस्करी को लेकर उठे आरोपों और चर्चाओं ने प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि गांजा का अवैध कारोबार न केवल जारी है, बल्कि कई जगहों पर खुलेआम संचालित होने की बातें कही जा रही हैं। ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, व्यापारियों और युवाओं का आरोप है कि यह कोई छोटी-मोटी गतिविधि नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क की जड़ें जिले के कई हिस्सों में फैली हुई हैं और इसका असर समाज के विभिन्न वर्गों पर पड़ रहा है। इसी बीच इस पूरे मामले में सुभाष चंद्र द्वारा लगाए गए आरोपों ने नई बहस छेड़ दी है। उनका कहना है कि जिले में गांजा तस्करी इतनी व्यापक रूप से चल रही है कि यह बिना किसी प्रकार के संरक्षण के संभव नहीं हो सकती। उन्होंने कई स्तरों पर संभावित मिलीभगत की आशंका भी जताई है। हालांकि इन आरोपों की अब तक किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इनकी चर्चा तेज हो गई है। इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल जिला आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहा है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल चर्चा में है कि आबकारी अधिकारी का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी जिले में बने रहना क्या सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है या इसके पीछे कोई विशेष परिस्थिति है। सूत्रों का दावा है कि कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद अधिकारी का जिले में बने रहना कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रहा है। हालांकि इस विषय में अभी तक विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ग्रामीण क्षेत्रों से आ रही शिकायतों के अनुसार, गांजा अब छिपकर नहीं बल्कि खुले तौर पर बिकने की बातें कही जा रही हैं। कई लोगों का कहना है कि यह स्थिति समाज के लिए चिंताजनक होती जा रही है, क्योंकि इसका असर युवाओं और किशोरों तक पहुंचता दिख रहा है। यही कारण है कि स्थानीय लोग इसे एक संगठित नेटवर्क के रूप में देख रहे हैं। इसी क्रम में आबकारी विभाग के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेष रूप से मुगलसराय क्षेत्र में निगरानी कमजोर होने की चर्चा स्थानीय स्तर पर सुनाई दे रही है। आबकारी इंस्पेक्टर संगीता जायसवाल का नाम भी चर्चाओं में लिया जा रहा है, जहां यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि उनके कुछ कथित कारखास संतोष, अजय और कल्लू क्षेत्र में गतिविधियों को प्रभावित करते हैं। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये सभी आरोप और स्थानीय चर्चाएं हैं, जिनकी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का पक्ष भी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। इस पूरे प्रकरण में एक और चर्चा यह है कि विभाग में बिचौलियों और कारखासों की भूमिका कार्रवाई की दिशा को प्रभावित कर सकती है। कुछ लोगों का दावा है कि छापेमारी की सूचना पहले ही लीक हो जाती है, जिसके कारण छोटे स्तर पर कार्रवाई दिखाकर बड़े नेटवर्क को बचाने की बात कही जाती है। हालांकि यह भी आरोपों और स्थानीय चर्चाओं पर आधारित बातें हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। फिलहाल चंदौली जिले में उठे ये सवाल केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे नशामुक्ति अभियान की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इन आरोपों की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच होगी या फिर यह मामला भी समय के साथ चर्चाओं में ही सिमट कर रह जाएगा।

नशामुक्त प्रदेश के दावे और जमीनी सच्चाई

उत्तर प्रदेश सरकार लगातार नशामुक्त प्रदेश अभियान को मजबूत करने की बात करती रही है। मुख्यमंत्री स्तर से लेकर जिला प्रशासन तक कई बार इस अभियान को लेकर सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर चंदौली जिले से जो शिकायतें और चर्चाएं सामने आ रही हैं, वे इस अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों से उठ रही आवाज

जिले के कई गांवों से यह शिकायत सामने आई है कि गांजा अब छिपकर नहीं बल्कि खुले तौर पर बिकने की चर्चा है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले यह कारोबार सीमित था, लेकिन अब कई जगहों तक इसकी पहुंच हो गई है।

युवाओं तक पहुंचती नशे की लत

स्थानीय लोगों का कहना है कि सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि गांजा की उपलब्धता युवाओं और किशोरों तक पहुंचती दिख रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि इस पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका असर आने वाली पीढ़ी पर पड़ सकता है।

सुभाष चंद्र के आरोपों से तेज हुई बहस

इस पूरे मामले में सुभाष चंद्र पर लगाए गए आरोपों ने नई बहस को जन्म दिया है। उन्होंने यह सवाल उठाया है कि यदि जिले में गांजा तस्करी इतनी व्यापक रूप से चल रही है तो यह बिना किसी संरक्षण के कैसे संभव है।
कार्यकाल के बाद भी जमे अधिकारी स्थानीय स्तर पर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि जिला आबकारी अधिकारी का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी उनका जिले में बने रहना क्या सामान्य प्रक्रिया है। सूत्रों का कहना है कि इस स्थिति ने कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया है।

मुगलसराय क्षेत्र में निगरानी पर सवाल

मुगलसराय क्षेत्र को लेकर भी कई तरह की बातें सामने आ रही हैं। कुछ स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां निगरानी अपेक्षाकृत कमजोर है। स्थानीय क्षेत्र में कारखास और बिचौलियों की चर्चा में यह भी कहा जा रहा है कि विभाग के भीतर कुछ बिचौलिये और कारखास सक्रिय रहते हैं। ये लोग सूचना और कार्रवाई की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।

छापेमारी की सूचना लीक होने की चर्चा

कुछ लोगों का दावा है कि कई बार छापेमारी की सूचना पहले ही संबंधित लोगों तक पहुंच जाती है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी सुनने को मिलती है कि इस नेटवर्क को अप्रत्यक्ष राजनीतिक संरक्षण मिलता है। हालांकि किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति का नाम लेकर इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

* चंदौली जिले में गांजा तस्करी को लेकर लगातार शिकायतें
* स्थानीय लोगों का आरोप: संगठित नेटवर्क के रूप में फैल रहा कारोबार
* सुभाष चंद्र के आरोपों से मामला चर्चा में
* बिना संरक्षण इतना बड़ा नेटवर्क संभव नहीं
* कार्यकाल पूरा होने के बाद भी अधिकारी का जिले में बने रहने पर सवाल
* मुगलसराय क्षेत्र में निगरानी कमजोर होने की चर्चाएं
* आबकारी इंस्पेक्टर और कथित कारखासों के नाम चर्चा में
* छापेमारी की सूचना पहले लीक होने के आरोप
* युवाओं और किशोरों तक पहुंच रहा नशा
* विभागीय कार्यप्रणाली और नशामुक्ति अभियान पर सवाल

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