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एप्स्टीन के गुनहगारों के हाथों बिकने जा रहा है भारत का बीमा बाजार, मोदी का एक और निंदनीय किरदार

एचडीएफसी अर्गो के सीओओ अनुज त्यागी को तोड़ लिया, अब मिलकर बनाएगी बीमा कंपनी

* ब्लैकस्टोन का 90 प्रतिशत निवेश होगा, त्यागी 10 फीसदी पैसा लगाएगा
* करीब 1700 करोड़ का निवेश होने की उम्मीद, बीमा बाजार को निगल जाएगी मछली
* एप्स्टीन फाइल में आया था ब्लैकस्टोन का नाम
* दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा बीमा बाजार है भारत

नई दिल्ली। अमेरिकी न्याय विभाग के कुख्यात एप्स्टीन फाइल्स में शािमल धनपशु ब्लैकरॉक कंपनी अगले माह भारत के 12 लाख करोड़ के बीमा बाजार में एंट्री कर सकती है। भारत दुनिया का पांचवां बड़ा बीमा बाजार है। बताया जा रहा है कि ब्लैकस्टोन ने बीते दिनों एचडीएफसी कंपनी के एगो जनरल इंश्योरेंस के पूर्व सीओओ अनुज त्यागी को तोड़ लिया है। जनवरी में अपने पद से इस्तीफा दे चुके त्यागी जल्दी ही अपनी बीमा कंपनी शुरू करने जा रहे हैं, जिसमें ब्लैकस्टोन का पैसा लगा होगा। त्यागी एचडीएफसी के मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं। ब्लैकस्टोन का भारत के बीमा बाजार में पैसा लगाना पीएम नरेंद्र मोदी की अमेरिका के आगे सरेंडर होने की नीति का एक और ताजा उदाहरण है।

ब्लैकस्टोन कंपनी दुनिया की जानी-मानी अमेरिकी इक्विटी मैनेजिंग कंपनी की है। इसका मार्केट कैप करीब 1.3 ट्रिलियन डॉलर का है। सूत्रों का कहना है कि अनुज त्यागी की प्रस्तावित बीमा कंपनी में ब्लैकस्टोन का 90 प्रतिशत शेयर होगा, जबकि त्यागी 10 फीसदी शेयर रखेंगे। हालांकि, ब्लैकस्टोन ने भारत के जनरल इंश्योरेंस में अभी किसी तरह के संयुक्त उपक्रम में पैसा लगाने से इनकार कर दिया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि कंपनी पहले भी इसी तरह निवेश से इनकार करती रही है, लेकिन अब यह पक्की जानकारी है कि कंपनी भारत के बीमा क्षेत्र में बड़ा निवेश करने जा रही है।

इक्विटी के रूप में पैसा लगाएगी

कहा जा रहा है कि ब्लैकस्टोन अनुज त्यागी की नई बीमा कंपनी में 1000 से 1700 करोड़ तक का निवेश कर सकती है। निवेश का पैसा इक्विटी के रूप में होगा। इसके लिए कंपनी अगस्त 2026 में भारतीय बीमा नियामक अधिकरण के पास बाकायदा आवेदन करेगी। त्यागी ने इस बारे में पूछे जाने पर अभी कोई जवाब नहीं दिया है। इससे पहले ब्लैकस्टोन ने ब्रोकरेज फर्म ऐस इंश्योरेंस में 1700 करोड़ रुपए लगाए थे। इसे भारत के बीमा ब्रोकरेज में आज तक का सबसे बड़ा निवेश माना जाता है।

इसलिए हो रही है चर्चा

भले ही ब्लैकस्टोन ने निवेश की खबरों का खंडन किया हो, लेकिन इस तरह की अफवाहों का सामने आना भारतीय इंश्योरेंस सेक्टर के लिए ग्लोबल निवेशकों के बढ़ते आकर्षण को दर्शाता है। खासतौर पर, फरवरी 2026 से लागू हुए नए नियमों के तहत अब इंश्योरेंस सेक्टर में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की इजाजत है, जिसने इस बाजार को पहले से कहीं ज्यादा आकर्षक बना दिया है। भारतीय इंश्योरेंस मार्केट जबरदस्त ग्रोथ के पथ पर है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि 2034 तक यह 867.89 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर सकता है, जिसमें 2026-2034 के दौरान 11.04% की सालाना ग्रोथ रेट देखने को मिल सकती है। नॉन-लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम में हर साल 13-15% की तेज बढ़ोतरी का अनुमान है। इस पॉजिटिव आउटलुक के पीछे भारत की मजबूत इकोनॉमिक ग्रोथ (FY26 के लिए 7.3% अनुमानित), बढ़ती कंज्यूमर अवेयरनेस और युवा आबादी की वित्तीय सुरक्षा की चाहत जैसे कारण हैं।

मोदी के आत्मनिर्भर भारत का क्या हुआ?

अगर ब्लैकस्टोन जैसी कोई बड़ी कंपनी भारत के बीमा क्षेत्र में उतरती है तो पीएम नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत का नारा एक जुमले में बदल जाएगा, क्योंकि 1.3 ट्रलियन डॉलर की अमेरिकी कंपनी एक व्हेल मछली की तरह 12 लाख करोड़ के बीमा बाजार को एक झटके में निगल लेगी। भारत ने वैसे ही अमेरिकी इशारे पर बीमा क्षेत्र में 100 फीसदी विदेशी निवेश की इजाजत दे रखी है। भारत के लिए ब्लैकस्टोन की एंट्री भारी पड़ सकती है। भारत के बीमा क्षेत्र पर लाखों परिवार- जिसमें किसान और छोटे व्यापारी भी जुड़े हैं, सभी का भविष्य एप्स्टीन फाइल्स में नाम आने वाली एक ऐसी कंपनी पर आश्रित हो जाएगा, जिसका अपना भविष्य असुरक्षित नजर आया है।

एशिया के बाजार से जुटाए 10 बिलियन

ब्लैकस्टोन इंक ने अपने लेटेस्ट एशिया बायआउट फंड के लिए 10 बिलियन डॉलर का टारगेट हासिल कर लिया है, क्योंकि इनवेस्टर्स को भरोसा है कि भारत में इसकी स्ट्रॉन्ग प्रेजेंस और जापान में इसके एक्सपैंशन से अच्छा रिटर्न मिलता रहेगा। दुनिया की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी अगले साल की पहली तिमाही तक फंड रेजिंग पूरा कर लेगी। न्यूयॉर्क बेस्ड कंपनी के 12.9 बिलियन डॉलर के हार्ड कैप तक पहुंचने की संभावना है, जो मार्केटिंग मैटेरियल में बताई गई मैक्सिमम लिमिट है। ब्लैकस्टोन का यह फंड रेजिंग ऐसे टाइम में हो रहा है, जब ग्लोबल इनवेस्टर्स प्राइवेट इक्विटी को लेकर ज्यादा सावधान हो रहे हैं, क्योंकि हाई ब्याज दरें, कम स्टॉक लिस्टिंग्स और कम सेकेंडरी बायआउट्स की वजह से कैपिटल लंबे समय तक लॉक रहता है। फिर भी, सबसे बड़े अल्टरनेटिव एसेट मैनेजर्स अपनी ग्लोबल रीच, लॉन्ग ट्रैक रिकॉर्ड और डेडिकेटेड फंडरेजिंग टीमें यूज करके टफ मार्केट में भी कमिटमेंट्स अट्रैक्ट कर रहे हैं। ब्लैकस्टोन के लिए, इसके पिछले एशियाई फंड के करीब 90% इनवेस्टर्स नए फंड में वापस आए हैं, और उनकी एवरेज कमिटमेंट पिछले फंड से लगभग 30% बढ़ गई है, एक सूत्र ने बताया.ब्लैकस्टोन ने सितंबर 2024 में अपने तीसरे एशियाई फ्लैगशिप फंड का मार्केटिंग शुरू किया। 24 जुलाई को एक इनवेस्टर कॉल के मुताबिक, जुलाई में इसने 3.5 बिलियन डॉलर और जुटाए, जिससे टोटल 8 बिलियन डॉलर हो गया। ब्लैकस्टोन के हॉन्गकॉन्ग बेस्ड स्पोक्सपर्सन ने कमेंट करने से मना कर दिया। अपने पहले फंड के इंडिया-फोकस्ड अप्रोच से बचने के लिए, ब्लैकस्टोन जापान को मेन हब बनाकर फंड II में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का प्लान कर रहा है। सूत्रों ने बताया कि पिछले दो फंड्स के लिए, 31% कैपिटल इंडिया और 22% जापान में गया था, जबकि ऑस्ट्रेलिया से 9% कैपिटल आया था।

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