वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा का अवैध निर्माण पर करारा प्रहार, अवैध निर्माण माफियाओं पर किया वार

- पांच भवन सील सिस्टम को आईना दिखाती कार्रवाई
- दशाश्वमेध में अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
- बिना नक्शा और नियमों की अनदेखी पर चला प्राधिकरण का डंडा
- अतिरिक्त तल और सेटबैक उल्लंघन बने कार्रवाई की वजह
- वीसी के निर्देश पर सचिव ने खुद संभाली कमान
- धारा 27 व 28 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई
- पुलिस अभिरक्षा में सौंपे गए सील भवन
- प्रवर्तन टीम की सक्रियता या दबाव में कार्रवाई

वाराणसी। जिसे आध्यात्मिक राजधानी कहा जाता है, आज एक और संकट से जूझ रही है। शहर की ऐतिहासिक पहचान, उसकी संरचना और उसकी जीवन-शैली को सबसे ज्यादा खतरा अगर किसी चीज से है, तो वह है बिना योजना के खड़े हो रहे कंक्रीट के जंगल। ऐसे में वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा दशाश्वमेध वार्ड में की गई कार्रवाई न केवल प्रशासनिक सख्ती का संकेत है, बल्कि यह उस लंबे समय से चले आ रहे ‘मौन समझौते’ पर भी चोट है, जिसके सहारे अवैध निर्माण पनपते रहे हैं। वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा के स्पष्ट निर्देश पर जोन-3 में यह अभियान चलाया गया, जहां सचिव डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा ने खुद मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सामने आई तस्वीर चौंकाने वाली थी। पांच ऐसे भवन जिनका निर्माण या तो बिना मानचित्र स्वीकृति के हो रहा था या फिर स्वीकृत नक्शे को धता बताकर उसमें अतिरिक्त तल जोड़े जा रहे थे। कहीं सेटबैक को पूरी तरह खत्म कर दिया गया था, तो कहीं छोटे प्लॉट में बहुमंजिला इमारत खड़ी की जा रही थी। यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि शहर के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। वाराणसी की गलियां पहले से ही संकरी हैं, जनसंख्या घनी है और यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यदि भवन निर्माण के नियमों को नजरअंदाज किया जाएगा, तो यह स्थिति भविष्य में बड़े हादसों को जन्म दे सकती है। आग लगने की स्थिति हो या भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा बिना सेटबैक और अनियोजित निर्माण राहत और बचाव कार्यों को असंभव बना सकते हैं। वीडीए ने उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा 27 और 28 के तहत इन पांचों भवनों को सील कर संबंधित थानों की अभिरक्षा में सौंप दिया। यह कार्रवाई अपने आप में एक मजबूत संदेश है। अब केवल नोटिस देकर औपचारिकता पूरी नहीं की जाएगी, बल्कि मौके पर जाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। लेकिन इस कार्रवाई ने कई असहज सवाल भी खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब ये निर्माण हो रहे थे, तब प्राधिकरण और उसके प्रवर्तन तंत्र की आंखें कहां थीं? क्या यह कार्रवाई केवल शिकायत मिलने के बाद की गई, या फिर यह किसी बड़े दबाव का परिणाम है? यदि समय रहते निरीक्षण किया जाता, तो शायद ये निर्माण इस स्तर तक पहुंचते ही नहीं।
दशाश्वमेध वार्ड, जो धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, वहां इस तरह के अवैध निर्माण यह संकेत देते हैं कि शहर के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। यह केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि शहरी नियोजन की पूरी व्यवस्था पर सवाल है।


कार्रवाई नहीं, चेतावनी लेकिन कितनी प्रभावी
वीडीए की यह कार्रवाई केवल पांच भवनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक संदेश देने की कोशिश है कि अब नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह संदेश उन लोगों तक पहुंचेगा, जो वर्षों से इस ‘सिस्टम’ का हिस्सा बने हुए हैं?
वाराणसी में अवैध निर्माण कोई नई समस्या नहीं है। यह एक संगठित नेटवर्क की तरह काम करता है, जिसमें बिल्डर, स्थानीय ठेकेदार, कुछ भ्रष्ट अधिकारी और कभी-कभी राजनीतिक संरक्षण भी शामिल होता है। ऐसे में केवल पांच भवनों को सील कर देना इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
दशाश्वमेध जहां आस्था और अव्यवस्था साथ-साथ
दशाश्वमेध वार्ड, जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु आते हैं, वहां इस तरह के अवैध निर्माण न केवल शहर की सुंदरता को प्रभावित करते हैं, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक हैं। केराकतपुर, मंडुवाडीह और लोहता जैसे इलाकों में तेजी से बढ़ते निर्माण इस बात का संकेत हैं कि शहर का विस्तार अनियोजित तरीके से हो रहा है। जमीन की कीमतों में तेजी और मुनाफे की लालसा ने नियमों को पीछे छोड़ दिया है।
पांच भवन, पांच कहानियां
धर्मेंद्र कुमार सिंह : बी+जी+2 के स्थान पर बी+जी+3 का निर्माण यह स्पष्ट रूप से अतिरिक्त लाभ कमाने की कोशिश है।
हीरा लाल यादव : सेटबैक को पूरी तरह कवर कर जी+3 निर्माण यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि भविष्य में विवाद और दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।
दीपक गुप्ता : छोटे प्लॉट में सटरिंग कर निर्माण यह दर्शाता है कि छोटे स्तर पर भी नियमों की अनदेखी आम हो चुकी है।
धीरज सिंह : जी+2 के ऊपर तीसरे तल की तैयारी यह उस मानसिकता को दिखाता है, जहां ‘पहले बना लो, बाद में देखेंगे’ का रवैया अपनाया जाता है।
अन्य निर्माण केराकतपुर : स्टील्ट+3 निर्माण यह दर्शाता है कि बिना किसी अनुमति के बड़े पैमाने पर निर्माण किया जा रहा है।
कानून की ताकत बनाम लागू करने की कमजोरी
धारा 27 और 28 के तहत कार्रवाई करना आसान है, लेकिन इन्हें लागू करना चुनौतीपूर्ण है। नोटिस जारी करना, समय देना, फिर कार्रवाई करना। यह पूरी प्रक्रिया इतनी लंबी है कि तब तक निर्माण पूरा हो जाता है। यही कारण है कि लोग पहले निर्माण करते हैं और बाद में जुर्माना भरकर उसे वैध कराने की कोशिश करते हैं।
क्या खत्म होगा ‘सेटिंग सिस्टम’
स्थानीय स्तर पर ‘सेटिंग’ शब्द बहुत प्रचलित है। इसका मतलब है। कुछ लोगों से मिलकर नियमों को दरकिनार करना। इस कार्रवाई के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह ‘सेटिंग सिस्टम’ खत्म होता है या फिर कुछ दिनों बाद सब कुछ पहले जैसा हो जाता है।
प्रवर्तन टीम सक्रियता या औपचारिकता
जोनल अधिकारी श्रीप्रकाश और उनकी टीम की मौजूदगी इस कार्रवाई में दिखी। लेकिन यह सवाल बना रहता है कि क्या यह टीम नियमित रूप से ऐसे निरीक्षण करती है। यदि हां, तो फिर इतने बड़े स्तर पर अवैध निर्माण कैसे हो गए, यदि नहीं, तो फिर यह पूरी व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है। यह केवल प्रशासन की विफलता नहीं है। आम नागरिक भी इसमें बराबर के भागीदार हैं। सस्ते में ज्यादा जगह पाने की चाह नियमों की अनदेखी ‘सब कर रहे हैं’ वाली मानसिकता जब तक यह सोच नहीं बदलेगी, तब तक अवैध निर्माण रुकना मुश्किल है।
डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम
जवाबदेही तय करना, संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई
सख्त दंड, केवल सीलिंग नहीं, बल्कि भारी जुर्माना
जन जागरूकता, लोगों को नियमों के प्रति जागरूक करना। यह कार्रवाई सिर्फ पांच भवनों की सीलिंग नहीं है यह उस सड़े हुए तंत्र की झलक है, जहां नियम किताबों में जिंदा हैं और जमीन पर दम तोड़ चुके हैं।
* 5 अवैध भवनों पर वीडीए की बड़ी कार्रवाई
* दशाश्वमेध वार्ड में नियमों की खुली अनदेखी उजागर
* अतिरिक्त तल और सेटबैक उल्लंघन मुख्य कारण
* धारा 27 और 28 के तहत सीलिंग
* पुलिस अभिरक्षा में सौंपे गए भवन
* प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत पर सवाल
* शहर की सुरक्षा और नियोजन पर खतरा
* कार्रवाई से ज्यादा सिस्टम सुधार की जरूरत




