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तमिलनाडु चुनाव: जिसके पास सबसे ज्यादा फ्री की रेवड़ियां, वही चढ़ेगा सत्ता की सीढ़ियां

सभी 234 सीटों पर वोटिंग हुई 23 अप्रैल को, चुनाव के नतीजे 4 मई को

– वोटरों को फायदा देने में डीएमके की सत्ता पसबसे आगे, सत्ता पर दावा भी औरों से ज्यादा मजबूत
– 120 से ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान
– तमिलनाडु पर पहले ही 8 लाख करोड़ रुपए का भारी-भरकम कर्ज
– राज्य के एक-चौथाई उम्मीदवार करोड़पति, 18 पर आपराधिक मुकदमों का दाग
– एआईएडीएमके के 170 में से 160 उम्मीदवार करोड़पति

नई दिल्ली/ चेन्नई। मंगलवार 21 अप्रैल को तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार का आखिरी दिन है। गुरुवार 23 अप्रैल को वोटिंग होनी है। प्रचार का काम मंगलवार शाम को खत्म हो जाएगा। राज्य की सभी 234 सीटों के लिए एक ही साथ मतदान होगा और चुनाव के नतीजे 4 मई को आएंगे।

तमिलनाडु में सारे राजनीतिक मुद्दे आम लोगों के लिए इस बात पर आकर टिक जाते हैं कि कौन सा राजनीतिक दल किसे क्या फायदा दे रहा है। शराब और साड़ी-धोती से बात अब आगे बेरोजगारी भत्ता और महिलाओं को सहायता तक आ चुकी है। फ्री की इस रेवड़ी का सभी फायदा उठाना चाहते हैं। राजनीतिक दलों से लेकर आम लोगों को भी उम्मीदवारों के चाल-चलन और चरित्र से आगे बढ़कर इन घोषणाओं का इंतजार रहता है कि आखिर कौन कितना पैसा लुटा रहा है।

फ्री की परंपरा दशकों पुरानी

तमिलनाडु की राजनीति में सामाजिक कल्याण के नाम पर फ्री में पैसा और सामान बांटना दशकों पुरानी परंपरा रही है। पार्टियां चुनाव से पहले वादा करती हैं कि अगर वह सत्ता में आई तो वह जनता को क्या-क्या फ्री में देंगी। सरकार बनने के बाद जनता पर उन्हीं के टैक्स का पैसा लुटाया जाता है लेकिन इससे राज्य के आर्थिक विकास पर भी असर पड़ता है। यह परंपरा तमिलनाडु में 1950-1960 के दशक से पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज और एमजी रामचंद्रन से शुरू होकर एम के स्टालिन तक पहुंच गई है।

पढ़ाई से लेकर फ्री बिजली तक

तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके सरकार पहले ही 1.37 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये दे रही है। नए घोषणापत्र में इसे बढ़ाकर 2000 रुपये का वादा किया गया है। छात्राओं को हायर एजुकेशन के लिए हर महीने 1 हजार रुपये मिलते हैं जिन्हें बढ़ाकर 1500 करने का वादा डीएमके ने किया है। इसके साथ ही 20 लाख से ज्यादा किसान फ्री बिजली का लाभ उठा रहे हैं। ‘कलाईनार मगलीर उरिमाई योजना’ के मौजूदा समय में राज्य सरकार हर महीने 1000 रुपये महिलाओं को दे रही है। इस योजना पर सालान योजना पर सालाना लगभग 12,000 से 13,720 करोड़ रुपये का खर्च आता है। अगर सरकार ने यह राशि 1500 रुपये कर दी तो राज्य सरकार पर सीधा 6 हजार करोड़ का बोझ बढ़ जाएगा। सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली सब्सिडी देती है। इसके लिए सालान 7500 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। भारी सब्सिडी के कारण तमिलनाडु का राजस्व घाटा 2025-26 में लगभग 41,635 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। राज्य का कुल बकाया कर्ज 8 लाख करोड़ रुपये से ऊपर जा चुका है।

तमिलनाडु में इस बार विधानसभा का चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों में से 25 प्रतिशत यानी एक चौथाई उम्मीदवार करोड़पति हैं। 18 प्रतिशत उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं। असोसिएशन फॉर डिमोक्रैटिक रिफॉर्म्स की हालिया रिपोर्ट में तमिलनाडु के कुल 4023 उम्मीदवारों के एफिडेविट में 185 उम्मीदवार राष्ट्रीय पार्टियों के, 640 राज्य स्तरीय पार्टियों के, 990 रजिस्टर्ड पार्टियों के और 2208 उम्मीदवार निर्दलीय हैं।

18 फीसदी उम्मीदवार दागी

तमिलनाडु में 4023 में से 722 उम्मीदवार ऐसे है जिनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं। यानी 18 प्रतिशत उम्मीदवार दागी हैं। कुल 404 यानी 10 प्रतिशत उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके खिलाफ हत्या, बलात्कार और लूट जैसे गंभीर अपराध के मामले चल रहे हैं। 4023 में से 981 यानी 25 प्रतिशत उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके पास कम से कम 1 करोड़ रुपये की संपत्ति है यानी वे करोड़पति हैं। पिछले चुनाव से इस बार की तुलना की जाए तो पिछली बार 13 प्रतिशत दागी उम्मीदवार थे और इस बार 18 प्रतिशत दागी उम्मीदवार है। गंभीर आपराधिक मुकदमे वाले उम्मीदवार पिछले चुनाव में 6 प्रतिशत थे लेकिन इस बार 10 प्रतिशत हैं। पहली बार चुनाव में उतरी तमिलागा वेट्री कझगम के 92 यानी 40 प्रतिशत उम्मीदवार आपराधिक छवि के हैं। कांग्रेस के 50 प्रतिशत, एआईएडीएमके के 69 प्रतिशत, डीएमके के 40% और बीजेपी के 48 प्रतिशत उम्मीदवार दागी छवि के हैं। कुल 18 उम्मीदवार हैं जिनके खिलाफ महिला विरोधी आपराधिक मामले चल रहे हैं। 13 उम्मीदवारों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज है। वहीं, 44 उम्मीदवारों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला चल रहा है।

22 विधायकों की संपत्ति 100 करोड़ से ज्यादा

तमिलनाडु के 22 उम्मीदवार ऐसे हैं जिनकी संपत्ति 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा हैं। 415 उम्मीदवारों की संपत्ति 5 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। वहीं, कुल 981 उम्मीदवार करोड़पति हैं। 2021 के चुनाव में कुल 652 उम्मीदवार ही करोड़पति थे। इस बार सबसे ज्यादा 170 करोड़पति उम्मीदवार डीएमके के पास हैं। एआईएडीएमके के 170 में से 160 उम्मीदवार करोड़पति हैं। बीजेपी के 33 में से 31, टीवीके के 231 में से 156 और कांग्रेस के 28 में से 27 उम्मीदवार करोड़पति हैं। कुल 3992 उम्मीदवारों को मिलाकर इन नेताओं के पास 20,678 करोड़ रुपये की संपत्ति है। इस तरह औसत संपत्ति 5.17 करोड़ रुपये है जबकि पिछले चुनाव में औसत संपत्ति 1.72 करोड़ रुपये ही थी।

सैंटियागो मार्टिन सबसे अमीर

लॉटरी किंग के नाम से मशहूर सैंटियागो मार्टिन तमिलनाडु की सबसे उम्मीदवार कैंडिडेट हैं और उन्होंने 5863 करोड़ की संपत्ति घोषित की है। दूसरे नंबर पर थलपति विजय है जिनकी संपत्ति 648 करोड़ रुपये हैं। टीवीके के नेता और सैंटियागो मार्टिन के दामाद आढव अर्जुन की संपत्ति कुल 534 करोड़ है और वह तीसरे सबसे अमीर उम्मीदवार हैं। चार नेताओं ने अपनी संपत्ति 0 घोषित की है। वहीं, निर्दलीय चुनाव लड़ रहे महेश कुमार ने अपनी कुल संपत्ति 15 रुपये घोषित की है। नेल्शन (सुलूर विधानसभा) और एस धर्मराज (पल्लादम विधानसभा) ने अपनी संपत्ति 500 रुपये घोषित की है। तमिलनाडु में चुनाव लड़ रहे 95 उम्मीदवार अनपढ़ हैं और कुल 56 उम्मीदवार ऐसे हैं जो सिर्फ पढ़-लिख सकते हैं। 7 उम्मीदवार ऐसे हैं जिन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता नहीं बताई है। कुल 1822 उम्मीदवार ऐसे हैं जिन्होंने ग्रेजुएशन या उससे ज्यादा पढ़ाई की है। 1711 उम्मीदवार ऐसे हैं जो 5वीं से 12वीं तक पढ़े हैं।

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