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नीट की परीक्षा का हो गया फिर सत्यानाश मोदी राज में छात्रों के भविष्य का हो रहा ह्रास

आधुनिक स्कैनर, प्रॉक्सी सर्वर और लीज लाइन की बदौलत लीक हुआ नीट-यूजी का पेपर, परीक्षा रद्द और जांच सीबीआई को, एक परचा 26 लाख में बिका

– परीक्षा से एक माह पहले महाराष्ट्र के नाशिक से लीक हुआ परचा पहले हरियाणा पहुंचा
– वॉट्सएप और टेलीग्राम चैनल से होता हुआ परचा कोचिंग सेंटरों और करिअर काऊंसिलरों तक आया
– बताया क्वेश्चन बैंक, लेकिन 300 में से आधे सवाल नीट के परचे से मेल खाने वाले निकले
– मीडिया के सवालों से भागे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान
– 2024 के नीट पेपर लीक के बाद कंप्यूटर मॉडल परचे की सिफारिश को सरकार ने अनदेखा किया

नई दिल्ली/पुणे। भारत में पहली बार मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा नीट-यूजी 2026 को पूरी तरह से रद्द किया गया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की बनाई नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने 3 मई 2026 को हुई नीट परीक्षा को रद्द करने का ऐलान करते हुए मंगलवार को कहा कि नई परीक्षा की तारीखों का एक हफ्ते में ऐलान कर दिया जाएगा। नीट की परीक्षा में इस साल 22.79 लाख स्टूडेंट्स ने भाग लिया था।

पेपर लीक के मामले को जांच के लिए सीबीआई के हवाले कर दिया गया है। एजेंसी ने मामले में एफआईआर दर्ज की है। परीक्षा लीक होने से देश के लाखों स्टूडेंट्स की सालों की मेहनत पर पानी फिर गया है। उनका गुस्सा सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर दिखने लगा हे, जिसमें केंद्र सरकार को इसके लिए जिम्मेदार बताते हुए कहा जा रहा है कि वह न केवल चुनाव, बल्कि देश में एक अहम एक्जाम भी बिना पेपर लीक के पूरा नहीं करवा सकती। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से दिल्ली में इस मामले में मीडिया ने सवाल पूछा तो वह बिना कुछ बोले निकल गए।

परीक्षा से पहले नाशिक में हुआ पेपर लीक

भारत में डॉक्टरी की पढ़ाई का प्रवेश द्वार माने जाने वाली नीट की परीक्षा का पेपर लीक होने की प्लानिंग असल में परीक्षा की देशव्यापी तारीख तीन मई से काफी पहले अप्रैल में ही हो चुकी थी। इसके पीछे अंतरराज्यीय गिरोहों का एक मजबूत नेटवर्क और अरबों रुपए की रकम जिम्मेदार है। इन गिरोहों की पहली बैठक इसी साल अप्रैल में महाराष्ट्र के नाशिक शहर में हुई थी। इस गिरोह के पास नीट-यूजी 2026 के मूल परचे की हाथ से लिखी एक कॉपी थी। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की अंग तक की जांच में यह सामने आया है कि परचा लीक गिरोह ने उसी हस्तलिखित परचे की कॉपी को पहले हरियाणा भेजा। वहां वही परचा पांच सेट के प्रश्नपत्र के रूप में छापा गया। परचे के हर सेट में लीक हुए प्रश्नपत्र की 10 कॉपियां शामिल थीं। उसके बाद उन्हीं कॉपियों को राज्स्थान, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भेजा गया। राजस्थान पुलिस की एसओजी ने इन कॉपियों को स्टूडेंट्स तक पहुंचाने में कोचिंग सेंटर संचालकों और परीक्षा माफिया की मिलीभगत से भी इनकार नहीं किया है। इनकी गिरफ्तारी के लिए देश के कई राज्यों में पुलिस और सीबीआई के छापे मारे जा रहे हैं।

सामने आया प्राइवेट माफिया का नाम
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के मामले में प्राइवेट माफिया नाम के एक वॉट्सऐप ग्रुप का भी नाम सामने आया है। जानकार सूत्रों का कहना है कि इस ग्रुप में 400 लोग जुड़े हैं। इसके अलावा कई टलीग्राम चैनल भी इससे जुड़े हैं। लीक हुआ पेपर पाने के लिए हजारों रुपए देने वाले स्टूडेंट्स तक पेपर पहुंचाने के लिए इन्हीं चैनलों का उपयोग किया गया था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह एक संगठित माफिया ग्रुप है, जो असली परीक्षाओं की सामग्री और गेस पेपर स्टूडेंट्स को मुहैया कराता है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह ग्रुप नीट जैसी राष्ट्रीय परीक्षा के पेपर लीक करवाने के लिए स्टूडेंट्स से 30 लाख रुपए तक की रकम लेता था। राजस्थान पुलिस ने इसका केंद्र महाराष्ट्र का नाशिक बताया है, जबकि इसके तार राजस्थान के सीकर से जुड़े होने का अंदेशा जताया जा रहा है।

 

पेपर लीक करने का हाईटेक इंतजाम
पेपर लीक गिरोह ने गेस पेपर को स्कैन करने के लिए हाई डेफिनिशन यानी एचडी स्कैनरों का उपयोग किया, ताकि उनकी एकदम साफ डिजिटल कॉपी निकाली जा सके। बाद में इन कॉपियों को टेलीग्राम और व्हाट्सएप चैनल्स के माध्यम से गिरोह ने अपने चुनिंदा ग्राहकों को भेजा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, यानी एनटीए की नजरों से बचने के लिए गिरोह ने एक शैडो सर्वर भी नाशिक शहर के बाहर बनाया था। इस सर्वर का काम संदिग्ध इंटरनेट गितिविधियों को एक सामान्य इंटरनेट ट्रैफिक की तरह दिखाना था। पेपर लीक गिरोह ने नीट-यूजी 2026 के पेपर्स को लीक करने के मकसद से एक स्थानीय स्टार्टअप कंपनी के लीज लाइन का उपयोग किया, ताकि एनटीए को इतने ज्यादा पैमाने पर डेटा ट्रांसफर पर शक न हो। राजस्थान पुलिस की एसओजी उस कूरिअर वाले से भी पूछताछ कर रही है, जिसने गिरोह के मास्टरमाइंड और अन्य सदस्यों के भाग निकलने से पहले प्रश्नपत्रों से भरे संदूक की हिफाजत की। जांचकर्ताओं का मानना है कि लगभग उसी दौरान परचों को स्कैन कर कॉपी किया गया। नाशिक की क्राइम ब्रांच ने शुभम खैरनार नाम के एक 30 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। शुभम नांदगांव में बीएएमएस का स्टूडेंट है। पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए शुभम ने अपना हुलिया बदल लिया था। लेकिन पुलिस के पास उसका पुराना फोटो और डिजिटल सर्विलांस का रिकॉर्ड था, जिसकी बदौलत वह पकड़ा गया।

असली परचे से हूबहू मेल खाते निकले 60 सवाल

राजस्थान पुलिस की अब तक की जांच में गेस पेपर में 60 सवाल असली नीट-यूजी 2026 के पेपर से मेल खाते हुए मिले हैं। इनमें बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 35 सवाल हैं। इस मामले की जांच करने वाली केंद्रीय एजेंसियों और पुलिस का दावा है कि अभी तक की जांच में जो बात सामने आई है, वह केवल छोटी मछलियों के बारे में है। इसका असली खेल उन बड़ी हस्तियों का है, जो देश के कई राज्यों में बिचौलियों और संगठित अपराधियों की मदद से अरबों रुपए के इस खेल को अंजाम दे रहे हैं।

‘क्वेश्चन बैंक’ से लीक हुआ परचा

नीट का पेपर ‘क्वेश्चन बैंक’ के जरिए लीक किया गया। इसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के 300 से ज्यादा सवाल थे। ये सभी हाथ से लिखे गए और इनकी हैंडराइटिंग भी एक ही थी। 3 मई को परीक्षा होने के बाद सीकर के एक पीजी संचालक ने उद्योग नगर थाने और एनटीए को यह शिकायत दी थी कि एक कथित ‘क्वेश्चन बैंक’ बड़ी संख्या में छात्रों को मिला है। आंसर-की और परीक्षा से जुड़ी चर्चाएं ऑनलाइन सामने आने के बाद छात्रों और कोचिंग सेंटर्स में एक कथित ‘क्वेश्चन बैंक’ को लेकर चर्चा शुरू हुई, जो कथित तौर पर असली परीक्षा से काफी मिलता-जुलता था। 7 मई को एनटीए ने पुष्टि की कि उसे परीक्षा के 4 दिन बाद, यानी 7 मई को कथित गड़बड़ियों से जुड़े इनपुट मिले थे। एजेंसी ने बताया कि यह मामला राजस्थान और उत्तराखंड से सामने आया। उसके अगले ही दिन, यानी 8 मई को एनटीए ने परीक्षा को रद्द करने का ऐलान करते हुए मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी।

300 में से 150 सवाल नीट में पूछे गए
‘क्वेश्चन बैंक’ में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के 300 से ज्यादा सवाल थे। इसमें से 150 सवाल हूबहू नीट के पेपर में आए। पेपर में कुल 180 सवाल हल करने होते हैं और प्रत्येक सवाल 4 अंक का होता है। यानी 720 में से 600 नंबर के सवाल सीधे ‘क्वेश्चन बैंक’ से आए। अब तक यह आंकड़ा तो सामने नहीं आया है कि कथित ‘क्वेश्चन बैंक’ कितने छात्रों तक पहुंचा, लेकिन यह संख्या बड़ी होने की आशंका है। दरअसल, जिन लोगों को ये वॉट्सएप पर यह मिला, उसमें मैसेज के साथ ‘फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स’ लिखा आ रहा है।

राजस्थान के एक स्टूडेंट पर शक

केरल में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे राजस्थान के एक स्टूडेंट पर जांच एजेंसियां शक कर रही हैं। असल में उसने ही पहली बार नीट का पेपर सीकर में एक स्टूडेंट को दिया था, जो नीट की तैयारी कर रहा था। बताया जा रहा है कि यह पेपर एक मई 2026 को दिया गया, यानी परीक्षा से दो दिन पहले। जांचकर्ताओं का मानना है कि उसके बाद वही पेपर कोचिंग सेंटर्स और करिअर काउंसिलर्स की मदद से नीट परीक्षा के लीक पेपर के रूप में पांच-पांच लाख रुपए में बेचा गया। 2 मई की आधी रात तक इस पेपर के भाव घटकर 30 हजार रुपए रह गए।

सरकार ने पिछली गलती से नहीं सीखा सबक

नीट-यूजी की परीक्षा 2024 में भी लीक हुई थी। यह वही समय था, जब केंद्र की नरेंद्र मोदी सत्ता लाकसभा चुनाव जीतकर तीसरी बार सत्ता में आई थी। लीक की खबरों के बीच अपना दाग धोने के लिए केंद्र सरकार ने इसरो के पूर्व प्रमुख के राधाकृष्णन की अध्यक्षता में सात सदयीय कमेटी बनाई थी। कमेटी ने 2024 के आखिर में केंद्र सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कई सिफारिशें की थीं।
• समिति ने देश में चुनाव और परीक्षा के आयोजन की एक जैसी तैयारी करने को कहा था, ताकि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा मुकम्मल की जा सके।
• परीक्षा केंद्रों को जिला प्रशासन और एनटीए अधिकारियों की मौजूदगी में सील कर दिया जाए। परीक्षा शुरू होने तक उनकी सुरक्षा की जाए।
• परीक्षा के दिन केंद्रों को अनसील कर जिला प्रशासन और एनटीए की मौजूदगी में परीक्षा करवाई जाए।
• परीक्षा के लिए एनटीए को राज्यों और जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित करना चाहिए।
• नीट जैसी परीक्षाओं को जेईई की तरह कंप्यूटर आधारित पेपर के रूप में संचालित किया जाए। अभी नीट की परीक्षा कागज और पेंसिल से होती है।

हालांकि, केंद्र सरकार ने इस साल की नीट परीक्षा में कमेटी की कुछ सिफारिशें लागू की हैं, लेकिन वे नाकाफी हैं। एनटीए ने परीक्षा से पहले जिला प्रशासन से समन्वय तो बनाया और स्टूडेंट्स का बायोमीट्रिक प्रमाणन भी किया। एनटीए ने जिन वाहनों से परीक्षा सामग्री भेजी, उन्हें भी जीपीएस से लैस किया गया। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी सर्विलांस भी लगाया गया। इसके बाद भी पेपर का लीक होना यह बताता है कि इस मामले में सरकारी अधिकारियों की भी मिलीभगत है, जो परीक्षा माफिया के साथ साठगांठ कर इस पूरे गिरोह को बचाए हुए हैं।

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