सीपी मोहित अग्रवाल का फरमान, जिसका होगा बढ़िया काम उसको मिलेगा ईनाम
अब काम बोलेगा, पद नहीं वाराणसी कमिश्नरेट में दरोगाओं की होगी अंक आधारित रैंकिंग

- पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल की नई पहल, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले उपनिरीक्षकों को मिलेगी चौकी
- दरोगाओं की कार्यकुशलता का होगा अंक आधारित मूल्यांकन
- 100 अंकों की रैंकिंग से तय होगी जिम्मेदारी और पहचान
- बेहतर प्रदर्शन पर चौकी प्रभारी बनने का मिलेगा मौका
- थानों की आधी फोर्स दिनभर सड़कों और चौराहों पर रहेगी सक्रिय
- रात्रि गश्त में लापरवाही पर होगी सीधी जवाबदेही तय
- नए आरक्षियों को 12 घंटे का व्यावहारिक प्रशिक्षण, अपराधियों पर सख्ती का संदेश

वाराणसी। अपराध नियंत्रण, जवाबदेही और पुलिसिंग की गुणवत्ता को नई दिशा देने के उद्देश्य से पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने कमिश्नरेट प्रणाली में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक पहल की शुरुआत की है। अब थानों में कार्यरत उपनिरीक्षकों (दरोगाओं) के कार्यों का मूल्यांकन केवल वरिष्ठ अधिकारियों की टिप्पणियों या पारंपरिक व्यवस्था के आधार पर नहीं, बल्कि एक पारदर्शी अंक प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक दरोगा को उसके कार्य प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाएंगे और उसी के अनुरूप उसकी रैंकिंग तैयार होगी। विगत सप्ताह शाम रोहनिया थाने में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान पुलिस आयुक्त ने रोहनिया, मंडुवाडीह और लोहता थानों की कार्यप्रणाली का गहन परीक्षण किया। बैठक में विवेचनाओं के निस्तारण, प्रार्थना पत्रों की सुनवाई, वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी, यातायात प्रबंधन और अपराध नियंत्रण के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि अब पुलिसिंग का मूल्यांकन परिणामों के आधार पर होगा और जो अधिकारी बेहतर कार्य करेंगे उन्हें पदोन्नति एवं महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में प्राथमिकता मिलेगी। नई मार्किंग प्रणाली का उद्देश्य पुलिस व्यवस्था में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित करना, कार्यकुशलता बढ़ाना और आम नागरिकों को त्वरित न्याय दिलाना है। इसके साथ ही पुलिस आयुक्त ने थानों में उपलब्ध पुलिस बल को अधिकतम समय जनता के बीच रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस की वास्तविक उपस्थिति सड़कों और क्षेत्रों में दिखाई देनी चाहिए, तभी अपराधियों में भय और जनता में विश्वास का वातावरण बनेगा। बैठक के दौरान नए नियुक्त आरक्षियों के प्रशिक्षण, रात्रि गश्त, सड़क सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और जनसंपर्क को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। पुलिस आयुक्त ने संकेत दिया कि कमिश्नरेट पुलिस अब केवल घटनाओं के बाद प्रतिक्रिया देने वाली व्यवस्था नहीं रहेगी, बल्कि अपराध की रोकथाम और प्रभावी जनसेवा की दिशा में सक्रिय पुलिसिंग का मॉडल विकसित किया जाएगा।


काम के आधार पर तय होगी दरोगाओं की रैंकिंग
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने कमिश्नरेट में उपनिरीक्षकों के मूल्यांकन के लिए अंक आधारित प्रणाली लागू करने की घोषणा की। इस व्यवस्था में प्रत्येक अधिकारी के दैनिक एवं मासिक कार्यों का विश्लेषण कर अंक प्रदान किए जाएंगे। इससे यह स्पष्ट होगा कि कौन अधिकारी अपने दायित्वों का बेहतर निर्वहन कर रहा है और कौन अपेक्षित स्तर से पीछे है।
पुलिस विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह व्यवस्था कार्य संस्कृति में सकारात्मक बदलाव लाएगी तथा निष्क्रियता पर अंकुश लगाने में मदद करेगी।
इन कार्यों पर मिलेंगे अंक
नई प्रणाली के अंतर्गत विभिन्न कार्यों के लिए निर्धारित अंक तय किए गए हैं
🔹 60 दिन के भीतर विवेचना का निस्तारण 25 अंक
🔹 प्रार्थना पत्रों का समयबद्ध एवं संतोषजनक निस्तारण 25 अंक
🔹 एनबीडब्ल्यू (गैर जमानती वारंट) के तहत गिरफ्तारी 10 अंक
🔹 बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों को सीज करने की कार्रवाई 10 अंक
🔹 विपरीत दिशा में वाहन चलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई 10 अंक
🔹 जुआ, सट्टा, वेश्यावृत्ति, अवैध खनन, मादक पदार्थों के निर्माण एवं बिक्री के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई अथवा अन्य सराहनीय कार्य 20 अंक। इस प्रकार कुल 100 अंकों के आधार पर प्रत्येक उपनिरीक्षक की कार्यक्षमता का आकलन किया जाएगा।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को मिलेगा लाभ
पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि केवल वरिष्ठता ही नहीं, बल्कि कार्य प्रदर्शन भी जिम्मेदारियां तय करेगा। रैंकिंग में बेहतर स्थान प्राप्त करने वाले दरोगाओं को चौकी प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाएगी। इस निर्णय को पुलिस विभाग में मेरिट आधारित व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे अधिकारियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कार्य निष्पादन की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
आधी फोर्स जनता के बीच रहेगी
बैठक में पुलिस आयुक्त ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया कि थानों में उपलब्ध पुलिस बल का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा दिन के समय प्रमुख चौराहों, बाजारों, मुख्य मार्गों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सक्रिय रूप से मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि जनता को पुलिस की उपस्थिति महसूस होनी चाहिए। पुलिस का सड़क पर दिखना ही अपराध नियंत्रण का सबसे प्रभावी माध्यम है।
रात्रि गश्त को लेकर भी सख्त निर्देश
रात्रिकालीन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस आयुक्त ने निर्देश दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम 25 प्रतिशत तथा शहरी क्षेत्रों में 20 प्रतिशत पुलिस बल नियमित गश्त पर रहे। चेतावनी दी कि इस व्यवस्था का औचक निरीक्षण स्वयं उनके द्वारा किया जाएगा। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
नए आरक्षियों को मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
पुलिस आयुक्त ने नव नियुक्त आरक्षियों को बेहतर पुलिसकर्मी बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया। इसके तहत प्रतिदिन छह घंटे इनडोर तथा छह घंटे आउटडोर प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में जनसंपर्क, अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, व्यवहारिक पुलिसिंग और क्षेत्रीय जिम्मेदारियों से संबंधित विषय शामिल किए जाएंगे। उद्देश्य यह है कि नए पुलिसकर्मी मैदान में उतरने से पहले व्यावहारिक रूप से दक्ष बन सकें।
अपराधियों में भय, जनता में विश्वास का संदेश
पुलिस आयुक्त की यह नई पहल केवल प्रशासनिक सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक उद्देश्य पुलिसिंग को अधिक जवाबदेह, परिणामोन्मुख और जनकेंद्रित बनाना है। अंक आधारित मूल्यांकन, सड़क पर पुलिस की बढ़ती मौजूदगी, अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई और नए जवानों के प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाएं यह संकेत देती हैं कि कमिश्नरेट पुलिस अब प्रदर्शन आधारित कार्यसंस्कृति की ओर तेजी से बढ़ रही है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो न केवल अपराध नियंत्रण मजबूत होगा, बल्कि आम नागरिकों को भी पुलिस व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव का अनुभव होगा।
* पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने रोहनिया थाने में की समीक्षा बैठक
* रोहनिया, मंडुवाडीह और लोहता थानों की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन
* उपनिरीक्षकों के लिए अंक आधारित मार्किंग प्रणाली लागू
* विवेचना और प्रार्थना पत्र निस्तारण को सर्वाधिक 25-25 अंक
* अपराध नियंत्रण एवं अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई के लिए 20 अंक
* उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दरोगाओं को चौकी प्रभारी बनने में प्राथमिकता
* दिन में 50 प्रतिशत पुलिस बल सड़कों और चौराहों पर तैनात रहेगा
* ग्रामीण क्षेत्रों में 25 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 20 प्रतिशत बल रात्रि गश्त पर रहेगा
* नए आरक्षियों को प्रतिदिन 12 घंटे का प्रशिक्षण मिलेगा
* पुलिस आयुक्त स्वयं करेंगे औचक निरीक्षण




