
- दान राशि पर उठे सवालों ने बढ़ाई राजनीतिक सरगर्मी
- राम मंदिर ट्रस्ट में सब मोदी व शाह के लोग ही शामिल
- ट्रस्ट की सफाई और विपक्ष के आरोप आमने-सामने
- चंपत राय की भूमिका पर लगातार उठ रहे हैं प्रश्न
- योगी सरकार और केंद्र सरकार की भूमिका पर भी बहस
- रामभक्तों की आस्था और पारदर्शिता की सबसे बड़ी परीक्षा

दिल्ली/लखनऊ/अयोध्या/दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि चंदा चोर और दिल्ली दरबार के कुछ लोग योगी आदित्यनाथ की कुर्सी के पीछे पड़े हैं अरविंद केजरीवाल की बात पर भरोसा न भी किया जाय तो यह बड़ा प्रश्न है कि चंपत राय इतनी ताकत कहां से मिल रही थी कि वो चारों ओर से घिरे होने के बावजूद इस्तीफा नहीं दे रहे थे।
चंपत राय की नियुक्ति किसने की थी हर व्यक्ति जानता है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार ने ट्रस्ट का गठन किया था।और चंपत राय को महासचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गई।
राम भक्तों की आस्था से खिलवाड़ ही नहीं चंदा चोरी की इस निंदनीय घटना के बाद चंपत राय ने जिस तरह की बेशर्मी दिखाई है उसके लिए उनको ताकत कहां से मिल रही थी ।
ट्रस्ट के द्वारा मुकदमा न दर्ज कराया जाना अपने आप में काफी चीज स्पष्ट कर देता है निश्चित रूप से योगी आदित्यनाथ ने इंतजार किया लेकिन ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार की ओर से कोई भी प्रतिक्रिया न मिलने के बाद मुख्यमंत्री के तौर पर उनको एस आई टी का गठन करना पड़ा।
हर छोटी बड़ी देश-विदेश की घटनाओं पर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े आंदोलन के परिणाम स्वरूप बने राममंदिर में चंदा चोरी पर मौन है वो भी तब जब ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने किया है।
योगी के खिलाफ गुजरात गैंग लगातार रच रहा है साजिश
क्या भाजपा ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में हिंदुत्व के सबसे बड़े चेहरे के रूप में स्थापित हो चुके योगी आदित्यनाथ के खिलाफ गुजरात से कोई साजिश रची जा रही है।
मंदिर आंदोलन में योगी आदित्यनाथ के गोरखनाथ पीठ की कई पीढियां के संघर्ष का योगदान रहा है आज इस राम मंदिर में दान चोरी का आरोप लग रहा है पूरा उत्तर प्रदेश जानता है कि राम मंदिर ट्रस्ट में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गुजराती गैंग का कब्जा है।
जब लाल कृष्ण आडवाणी ने इस्तीफा दे दिया था
वर्ष 1996 में जैन हवाला कांड में नाम आने के बाद लाल कृष्ण आडवाणी ने इस्तीफा दिया और कहा कि जब तक हम जांच में बेदाग नहीं साबित हो जाते तब तक हमें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
वहीं पर राममंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने राम मंदिर चंदा घोटाले पर सबसे पहले मीडिया के सामने आकर यह कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है उन्होंने और उनके साथियों ने चंदा चोरी को समाजवादी पार्टी और विपक्षियों की साजिश भी बताया था ।

बिना चंपत राय बंसल को ट्रस्ट से बाहर किए और उनकी गिरफ्तारी किये निष्पक्ष जांच संभव नहीं
चंपत राय द्वारा तथ्य छुपाना, घटना से इंकार करना आंतरिक जांच की बात करना काफी कुछ स्पष्ट करता है।
बात सीधी सी है जब ट्रस्ट का महासचिव दान चोरी की घटना से इंकार कर रहा है तो या तो वह चोरी में शामिल है या तो वह चोरों को बचाना चाहता है
जब चंपत राय ने मीडिया से आकर सारी घटनाओं को निराधार बताया उसके बाद उनकी चापलूसी में डेढ़ रोटी और शाम को रामदाने की खिचड़ी खाने वाले लेख लिखे जाने लगे चापलूसी भरा सबसे पहला लेख विश्व हिंदू परिषद के अंबरीश जी ने लिखा, अध्यक्ष जिला पंचायत अयोध्या के पति ने भी लिखा तभी मैं जान गया कि यह भाई साहब लोग किन चीजों पर पर्दा डालना चाहते हैं।
राम मंदिर चंदा चोरी प्रकरण में सबसे ज्यादा संदिग्ध भूमिका श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की है जिस दिन घटना का खुलासा हुआ उस दिन सबसे पहले चंपत राय मीडिया के सामने आए और उन्होंने दान राशि में हेर फेर की बात को सिरे से खारिज किया।
लेकिन चंपत राय के बयान के बाद भी लगातार जिस तरह से परते दर परते खुलती रही।
उस शाम तक ये चीज पूरी तरह से स्पष्ट हो गई
चंदा चोरी में स्पष्ट रूप से सीधी भूमिका चंपत राय की है क्योंकि सारे लोग जो भी इस मामले में प्रथम दृष्टया आरोपी दिख रहे हैं सभी सीधे तौर पर चंपत राय से जुड़े हुए हैं कोई ड्राइवर है तो कोई कुछ और है।
क्या चंपत राय के पास इस प्रश्न का कोई उत्तर है कि उनके और अनिल मिश्रा का ड्राइवर चंद्र दिनों में करोड़पति कैसे बन गया।
ट्रस्ट के किस पदाधिकारी ने कैमरा लगवाने से इनकार किया था।
क्या चंपत राय इस बात का जवाब देंगे की राम शंकर यादव टिन्नू जो कभी चंपतराय का ड्राइवर हुआ करता था अब वह उनका सहयोगी बन गया और अरबपति कैसे बन गया उसके यहां भागवत कथा के कार्यक्रम में चंपत राय किस हैसियत से गए थे क्या दिन प्रतिदिन उसकी हैसियत में बढ़ोतरी चंपत राय को नहीं दिख रही थी वह आधा से ज्यादा रेस्टोरेंट में पार्टनर और चार-पांच प्लाट का मालिक कैसे बन गया।
मिल्कीपुर का लवकुश मिश्रा जो कभी कार मिस्त्री हुआ करता था उसके घर के घर में घूर से रुपए मिल रहे हैं और चंपत राय मामले को राजनीतिक बता रहे हैं घटना से इंकार कर रहे हैं।
इतने बड़े मामले के बाद चंपत राय अचानक में शुगर ब्लड प्रेशर के मरीज हो गए अनिल मिश्रा अपनी आंख दिखाने के लिए बाहर चले गए जिनका वेतन 18 से ₹ बीस हजार था वह करोड़ों रुपए के मालिक बन गए और पूरी तरह से यह स्पष्ट हो गया है कि चंपत राय मामले को उलझाने की कोशिश कर रहे थे और जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन सदस्यीय एसआईटी टीम का गठन कर दिया
तो उसके अयोध्या पहुंचने के पहले उन दोनों लोगों का स्वास्थ्य खराब हो गया है जिन दोनों लोगों के ड्राइवर करोड़पति बन गए हैं।
राम मंदिर की दान राशि में हुए गबन मामले में अब तक 2.98 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। यह रकम पकड़े गए संदिग्धों की निशानदेही पर बरामद की गई है। गुपचुप ढंग से चल रही जांच में आठ करोड़ रुपये से अधिक के हुए हेरफेर के संकेत व साक्ष्य मिले हैं। हालांकि जांच पूरी होने के बाद यह राशि घट या बढ़ भी सकती है।
गबन का खुलासा जब से हुआ है, तब से ट्रस्ट गोपनीयता से जांच में जुटा है। पदाधिकारी चुप्पी साधे हैं। आधिकारिक तौर पर पुलिस को भी शामिल नहीं किया गया है, चूंकि करोड़ों का गबन हुआ है इसलिए रिकवरी की जद्दोजहद में सभी जुटे हैं। यह भी पता किया जा रहा है कि पकड़े गए संदिग्धों के अलावा और कौन-कौन लोग इसमें शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि गबन की राशि कुल कितनी है। हालांकि, संदिग्धों से पूछताछ में मिली जानकारी व अन्य साक्ष्यों से अंदेशा है कि आठ करोड़ से अधिक का खेल किया गया है।
जो संदिग्ध पकड़े गए हैं, वे मामूली पैसों की नौकरी करते थे। कुछ लोगों ने पार की गई रकम से निवेश भी किया है। इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। चूंकि नकदी अधिक थी, इसलिए उसे सही से ठिकाने नहीं लगाया जा सका। यही वजह है कि करोड़ों की नकदी बरामद हो चुकी है। कुछ ने अपने घर तो कुछ ने अपने रिश्तेदारों व परिचितों के घरों में भी नकदी छिपाई थी।
संदिग्धों के घर व ठिकानों के अलावा बैंक खाते भी खंगाले जा रहे हैं। इनमें अवनीश के खाते से पांच लाख रुपये मिले हैं। यह वही रकम है, जो उसने दान राशि से गायब कर अपने खाते में जमा की थी। इसके अलावा कुछ जेवरात भी मिले हैं। अवनीश के एक रिश्तेदार ने जमीन खरीदी है। आशंका है कि इस जमीन खरीद में अवनीश ने भी रकम लगाई है।
ट्रस्ट की चुप्पी तमाम सवाल पैदा कर रही है। क्या गबन के खेल के पीछे कोई बड़ा नाम सामने आ रहा है। लोग खुलकर चंपत राय के आकाओं की बात कर रहे हैं कौन हैं चंपत राय के आका ।
क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है उत्तर प्रदेश में अगले 6 महीने में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं जब भारतीय जनता पार्टी का सबसे बड़ा एजेंडा सनातन एवं हिंदुत्व है और हिंदुत्व के नाम पर इस तरह की चंदा चोरी जिसमें भारतीय जनता पार्टी के ही मातृ संगठन के लोगों के ऊपर उंगली उठ रही है उस दौर में भारतीय जनता पार्टी को और योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा यह सब को पता है। इसलिए योगी आदित्यनाथ के खिलाफ ये एक बड़ी साज़िश है इस बात से कतई इंकार नहीं किया जा सकता।
चंदा चोर के आरोपी चंपत राय की विदाई नैतिकता के आधार पर इस्तीफा नहीं है बल्कि योगी आदित्यनाथ के दबाव का परिणाम है
चंपत राय ही असली चोर है
मामले का खुलासा होने के पहले दिन से ही चंपत राय को सत्य निष्ठा, ईमानदारी, समर्पण और त्याग का महापुरुष बताया जाने लगा था।
डेढ रोटी और रामदाने की खिचड़ी खाने वाले महान व्यक्तित्व के साथ-साथ राम मंदिर आंदोलन का प्रमुख चेहरा स्थापित करने का प्रयास विश्व हिंदू परिषद और कुछ चापलूसों के द्वारा किया गया। विश्व हिन्दू परिषद के अंबरीष जी ने तो हद ही कर दी थी।
चंपत राय बेशर्मी के साथ अपने पद पर बने रहे ।जिन लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ है उसमें से कुछ चंपत राय के अत्यंत करीबी रहे हैं जिनकी नियुक्ति चंपत राय ने ही की थी और वह चंपत राय के साथ काम करते थे कुछ के घर तो चंपत राय जा भी चुके हैं। चपत राय के बेशर्मी की पराकाष्ठा इतनी उच्चतम स्तर पर थी की पहले दिन ही चंपत राय ने मामले को झूठा करार दिया था और चंपत राय के चापलूसों ने इसे समाजवादी पार्टी और विपक्षियों की साजिश बताया था लेकिन जब मामले में लगातार खुलासा होने लगा तब योगी आदित्यनाथ से बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने स्पष्ट रूप से अयोध्या के कार्यक्रम में चंपत राय को अपने अगल-बगल फटकने ना देने का आदेश जारी किया।
लेकिन चंपत राय ठहरे बड़े वाले बेशर्म वह उस समय भी ट्रस्ट से चंपत हो जाते तो यह माना जाता की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद जिस नैतिकता की बात करती है उसके कुछ बिंदु चंपत राय में विद्यमान है। फिलहाल चंपत राय ट्रस्ट से चंपत हो चुके हैं लेकिन मामला यहां पर रुकने वाला नहीं है क्योंकि अयोध्या के भाजपा नेता मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को पत्र लिखने वाले योगी आदित्यनाथ के करीबी डॉ रजनीश सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा है कि चंपत राय को जेल भिजवा कर ही दम लेंगे।

योगी की बढ़ती लोकप्रियता से गुजरात गैंग परेशान
योगी आदित्यनाथ जब से दोबारा मुख्यमंत्री बने तब से ये मोदी और अमित शाह के आखों में खटक रहे है। गाहे बगाहे गुजरात गैंग लगातार योगी आदित्यनाथ की छवि खराब करने का प्रयास करता रहता है,ये बात अलग है कि हर बार इन्हें मुँह की खानी पड़ती है।आप को बताते चले कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े सभी लोग मोदी व अमित शाह के प्रबल समर्थक है।प्रथम दृष्टया चंदा चोरी गुजरात गैंग की सोची समझी साजिश प्रतीत हो रही है।राजनीति में जो होता है वो दिखता नही जो दिखता नही वही होता है,सारे राजनैतिक दलों को पता है कि योगी का मोदी व शाह से छत्तीस का आंकड़ा है।मोदी व शाह बाबा को लगातार नीचा दिखाने का प्रयास करते रहते है,लेकिन अभी तक दोनों सफल नही हो पाए है।पूरी की पूरी भाजपा मोदी व शाह के चरणों मे नतमस्तक है बस योगी आदित्यनाथ ही मोदी व शाह की आखों में नजर मिला कर बाते करते है।योगी कभी भी मोदी व शाह के दबाव को नही मानते है।यही कारण है पूरा गुजरात गैंग योगी के पीछे पड़ा रहता है।
योगी की बढ़ती लोकप्रियता से गुजरात गैंग परेशान



