Newspublicई-पेपरउत्तर प्रदेशराजनीतिलखनऊ

योगी का बढ़ता कद यूपी की सत्ता से राष्ट्रीय राजनीति के क्षितिज तक मजबूत,बाबा की लोकप्रियता का यही है सबूत

भगवा पहचान से प्रशासनिक नेतृत्व तक योगी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को दी नई दिशा

  • कानून-व्यवस्था से एक्सप्रेसवे तक शासन की सख्त छवि के साथ विकास का मॉडल
  • अयोध्या, काशी और प्रयागराज आस्था को पर्यटन और अर्थव्यवस्था से जोड़ने की कोशिश
  • 2017 से 2022 तक सत्ता की वापसी योगी ने तोड़ी उत्तर प्रदेश की एंटी-इनकंबेंसी की धारणा
  • भाजपा के संगठन के सामने योगी का चेहरा यूपी में पार्टी की सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी
  • लखनऊ से आगे राष्ट्रीय क्षितिज क्या योगी भाजपा की अगली पीढ़ी के सबसे प्रभावशाली चेहरों में?

भारतीय राजनीति में कुछ नेता केवल पद पर नहीं बैठते, वे एक राजनीतिक पहचान में बदल जाते हैं। योगी आदित्यनाथ भी आज उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसे ही प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं। 2017 में जब गोरखपुर के गोरखनाथ मठ से जुड़े एक संन्यासी को उत्तर प्रदेश की सत्ता की कमान मिली, तब सवाल अनेक थे क्या धार्मिक पृष्ठभूमि वाला नेता देश के सबसे बड़े और सबसे जटिल राज्यों में से एक को प्रभावी ढंग से चला पाएगा? क्या कानून-व्यवस्था, निवेश, बुनियादी ढांचा और प्रशासन जैसी चुनौतियों का सामना किया जा सकेगा? समय ने इन सवालों का अपना उत्तर दिया। योगी आदित्यनाथ ने पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया और 2022 में भाजपा को लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि प्रदेश की राजनीति में सत्ता परिवर्तन की पुरानी परंपरा और एंटी-इनकंबेंसी को लंबे समय तक निर्णायक माना जाता रहा था। कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख, एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट जैसी बुनियादी परियोजनाएं, निवेश की कोशिशें, ओडीओपी के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा और अयोध्या-काशी-प्रयागराज की सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने का प्रयास योगी सरकार की राजनीतिक पहचान के प्रमुख हिस्से बने हैं। अब सवाल केवल यह नहीं कि योगी उत्तर प्रदेश को कितना बदल पाए हैं। बड़ा प्रश्न यह है कि क्या उन्होंने स्वयं को भाजपा के एक ऐसे राष्ट्रीय चेहरे के रूप में स्थापित कर लिया है, जिसकी राजनीतिक भूमिका आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश की सीमाओं से आगे भी दिखाई दे सकती है?

यूपी की सत्ता से राष्ट्रीय राजनीति के क्षितिज तक मजबूत नेतृत्व की दस्तक

भारतीय राजनीति में चुनाव केवल संगठन और घोषणाओं से नहीं जीते जाते। संगठन जमीन तैयार करता है, कार्यकर्ता उसे जनता तक पहुंचाते हैं, नीतियां सरकार की दिशा तय करती हैं, लेकिन चुनावी राजनीति में चेहरा भी निर्णायक भूमिका निभाता है। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के लिए पिछले वर्षों में योगी आदित्यनाथ ऐसा ही चेहरा बनकर उभरे हैं। योगी की राजनीतिक यात्रा को केवल मुख्यमंत्री पद से समझना उनके प्रभाव को सीमित करना होगा। गोरखपुर के गोरखनाथ मठ की परंपरा से निकले योगी आदित्यनाथ ने धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान, आक्रामक राजनीतिक शैली और प्रशासनिक निर्णय क्षमता को अपने राजनीतिक व्यक्तित्व का हिस्सा बनाया।

2017 में सवाल, 2022 में जवाब

2017 में जब योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया, तब यह निर्णय अपने आप में बड़ा राजनीतिक प्रयोग माना गया। एक ओर उनके सामने 24 करोड़ से अधिक आबादी वाले प्रदेश की प्रशासनिक चुनौती थी, दूसरी ओर उनके सामने अपराध, कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, निवेश, बुनियादी ढांचे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे जटिल प्रश्न थे।
लेकिन पांच वर्ष बाद 2022 में भाजपा ने सत्ता में वापसी की। लगातार दूसरी बार सरकार बनना उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण घटना थी। यहीं योगी केवल मुख्यमंत्री नहीं रहे, बल्कि भाजपा के एक मजबूत राजनीतिक ब्रांड के रूप में उभरने लगे।

कानून-व्यवस्था बनी सबसे बड़ी पहचान

योगी सरकार की सबसे स्पष्ट राजनीतिक पहचान कानून-व्यवस्था को लेकर बनी। सरकार ने अपराध और संगठित अपराध के खिलाफ कठोर कार्रवाई को अपनी प्राथमिकता बताया। गैंगस्टर एक्ट, संपत्ति जब्ती और अवैध निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई के जरिए सरकार ने अपराध की आर्थिक ताकत को कमजोर करने का संदेश दिया। मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद जैसे चर्चित अपराधी चेहरों के खिलाफ कार्रवाई ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। सरकार के समर्थकों के लिए यह जीरो टॉलरेंस का उदाहरण बना, जबकि विपक्ष ने कुछ कार्रवाइयों की प्रक्रिया और कानूनी तौर-तरीकों पर सवाल उठाए। लेकिन राजनीतिक प्रभाव के स्तर पर इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि कानून-व्यवस्था योगी सरकार की सबसे मजबूत पहचान बनी।

बुलडोजर बना राजनीतिक प्रतीक

योगी सरकार के दौर में बुलडोजर एक प्रशासनिक उपकरण से आगे बढ़कर राजनीतिक प्रतीक बन गया।
सरकार ने इसे अपराधियों और अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई का प्रतीक बताया। समर्थकों ने इसे कानून के भय को मजबूत करने वाली कार्रवाई माना। वहीं आलोचकों ने इसके इस्तेमाल में कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठाए। लेकिन राजनीति में प्रतीकों की ताकत अलग होती है। बुलडोजर बाबा जैसे संबोधन ने यह दिखाया कि प्रशासनिक कार्रवाई किस तरह राजनीतिक पहचान में बदल सकती है।

नो कर्फ्यू, नो दंगा

नो कर्फ्यू, नो दंगा का संदेश भी योगी सरकार की राजनीतिक भाषा का हिस्सा बना। कानून-व्यवस्था को निवेश और आर्थिक विकास से जोड़कर सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सुरक्षित वातावरण उद्योग, व्यापार और पर्यटन के लिए जरूरी है। किसी भी बड़े राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए प्रशासनिक स्थिरता महत्वपूर्ण होती है। उत्तर प्रदेश में निवेश आकर्षित करने की रणनीति में कानून-व्यवस्था को प्रमुख आधार बनाना इसी सोच का हिस्सा रहा।

एक्सप्रेसवे से एयरपोर्ट तक विकास का नेटवर्क

योगी सरकार ने बुनियादी ढांचे को भी अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में काम किया। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं के जरिए उत्तर प्रदेश को विमानन, लॉजिस्टिक्स और रक्षा उत्पादन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है। इन परियोजनाओं का वास्तविक आर्थिक प्रभाव आने वाले वर्षों में अधिक स्पष्ट होगा, लेकिन राजनीतिक स्तर पर इनका संदेश साफ है उत्तर प्रदेश को केवल आबादी और कृषि प्रधान राज्य के रूप में नहीं, बल्कि औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश।

आस्था और अर्थव्यवस्था का नया समीकरण

योगी आदित्यनाथ की राजनीति में धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्विकास और प्रयागराज में महाकुंभ जैसे आयोजनों ने उत्तर प्रदेश की धार्मिक पहचान को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नए तरीके से प्रस्तुत किया। लेकिन इसका एक आर्थिक पक्ष भी है। जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु किसी शहर में आते हैं तो होटल, परिवहन, भोजन, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प, टैक्सी और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों की आय बढ़ने की संभावनाएं पैदा होती हैं। यानी योगी सरकार ने आस्था को पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की है।

योगी की सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी चेहरा

सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न भाजपा के संदर्भ में है। भाजपा के पास मजबूत संगठन है। उसके पास विशाल कार्यकर्ता नेटवर्क है। उसके पास चुनावी रणनीति और संसाधनों की बड़ी क्षमता है। लेकिन इन सबके बीच योगी आदित्यनाथ का चेहरा अपनी अलग राजनीतिक शक्ति रखता है। उनके समर्थक उन्हें हिंदुत्व, कानून-व्यवस्था और मजबूत नेतृत्व का प्रतीक मानते हैं। आलोचक उनकी नीतियों और शासन शैली पर सवाल उठाते हैं।
लेकिन दोनों पक्षों की बहस में एक बात समान है—योगी को नजरअंदाज करके आज उत्तर प्रदेश की राजनीति को समझना संभव नहीं।

 

लखनऊ से दिल्ली तक चर्चा

उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री पद भारतीय राजनीति में राष्ट्रीय राजनीति की प्रयोगशाला माना जाता रहा है।
मुलायम सिंह यादव और मायावती जैसे नेताओं ने उत्तर प्रदेश की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका बनाई। इसलिए योगी आदित्यनाथ को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा होना भी स्वाभाविक है। हालांकि भविष्य में भाजपा की ओर से नेतृत्व को लेकर क्या समीकरण बनेंगे, यह कहना अभी जल्दबाजी होगा। राजनीति में लोकप्रियता, संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के समीकरण समय के साथ बदलते रहते हैं। फिर भी योगी ने अपने लिए ऐसी राजनीतिक पहचान बनाई है जिसे केवल प्रदेश तक सीमित करके देखना कठिन है।

एक संन्यासी से राष्ट्रीय राजनीतिक चेहरे तक

2017 में सवाल था कि क्या एक संन्यासी उत्तर प्रदेश चला सकता है? 2022 में जवाब मिला योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा ने सत्ता में वापसी की।
अब सवाल बदल गया है क्या यही चेहरा आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति की दिशा को प्रभावित करने वाली प्रमुख ताकत बन सकता है? इसका जवाब भविष्य देगा। लेकिन वर्तमान राजनीतिक तस्वीर में इतना स्पष्ट है कि योगी आदित्यनाथ केवल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं हैं। वह भाजपा की राजनीतिक रणनीति में एक महत्वपूर्ण चेहरा और उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रभावशाली राजनीतिक प्रतीक बन चुके हैं। उनकी ताकत केवल पद में नहीं, बल्कि उस राजनीतिक पहचान में है जिसे उन्होंने पिछले वर्षों में निर्मित किया है। राजनीति में चेहरे बदलते रहते हैं, सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन जिस नेता के नाम पर जनता स्वयं राजनीतिक बहस करने लगे, वह केवल पदाधिकारी नहीं रहता वह राजनीतिक शक्ति बन जाता है और उत्तर प्रदेश की वर्तमान राजनीति में योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी उपलब्धि शायद यही है।

* 2017 योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला।
* 2022 भाजपा ने उनके नेतृत्व में लगातार दूसरी बार सरकार बनाई।
* कानून-व्यवस्था सरकार की सबसे प्रमुख राजनीतिक पहचान।
* बुलडोजर अपराध और अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई का चर्चित राजनीतिक प्रतीक।
* बुनियादी ढांचा पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेस वे जैसी परियोजनाओं पर जोर।
* एयरपोर्ट, डिफेंस कॉरिडोर और औद्योगिक परियोजनाओं के जरिए निवेश आकर्षित करने की कोशिश।
* स्थानीय उत्पाद और पारंपरिक उद्योगों को बाजार से जोड़ने का प्रयास।
* अयोध्या, काशी और प्रयागराज को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूत करने की कोशिश।
* मिशन शक्ति सहित विभिन्न अभियानों को प्राथमिकता।
* उत्तर प्रदेश के बाहर भी योगी की राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा।
* रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसान, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही के मोर्चे पर प्रदर्शन।
* क्या योगी आदित्यनाथ आने वाले वर्षों में भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख चेहरों में और मजबूत होकर उभरेंगे?

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button