पूर्ण बोरा ने प्रवर्तन कार्मिकों को दिया अवैध निर्माण व प्लाटिंग पर ट्रेंनिग, विधि विरुद्ध कार्य करने वालो से न करे कोई सेटिंग
नियोजित विकास की ओर सख्त कदम अवैध प्लाटिंग-निर्माण पर नकेल

● पूर्ण बोरा ने प्रवर्तन कार्मिकों को दिया अवैध निर्माण व प्लाटिंग पर ट्रेंनिग, विधि विरुद्ध कार्य करने वालो से न करे कोई सेटिंग
● नियोजित विकास की ओर सख्त कदम अवैध प्लाटिंग-निर्माण पर नकेल
● उपाध्यक्ष के निर्देश पर जोनल अधिकारियों, जेई व सुपरवाइजरों का विशेष प्रशिक्षण
● फील्ड स्तर पर सख्त निगरानी और प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई के निर्देश
● बिना स्वीकृत मानचित्र निर्माण को शहर के भविष्य के लिए बताया खतरनाक
● 215 नए गांवों में प्लाटिंग के लिए स्पष्ट नियम तय
● 9 मीटर पहुंच मार्ग और 15 फीसदी हरित क्षेत्र अनिवार्य
● दबाव प्रलोभन से दूर रहकर कठोर कार्रवाई का अल्टीमेटम
◆ अमित मौर्य
वाराणसी। काशी के तेजी से फैलते शहरी विस्तार में अवैध प्लाटिंग और बिना मानचित्र निर्माण एक गंभीर चुनौती बन चुके हैं। यही कारण है कि वीडीए अब केवल कागजी चेतावनियों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि फील्ड स्तर पर ठोस, सख्त और निरंतर कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। इसी क्रम में वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा के निर्देशानुसार जोनल अधिकारियों, अवर अभियंताओं एवं सुपरवाइजरों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य सिर्फ नियमों की पुनरावृत्ति नहीं, बल्कि जमीनी अमले को अवैध प्लाटिंग और अवैध निर्माण की पहचान, त्वरित कार्रवाई और जवाबदेही की स्पष्ट समझ देना रहा। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने दो टूक कहा कि अवैध निर्माण केवल आज की समस्या नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए अव्यवस्थित शहर, जलभराव, संकरी सड़कों, सीवर-ड्रेनेज संकट और कानूनी विवादों की नींव डालता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत या आंख मूंदने की प्रवृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जोनल अधिकारी, जेई और सुपरवाइजर अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित भ्रमण कर अवैध गतिविधियों पर पैनी नजर रखें और प्रारंभिक स्तर पर ही कार्रवाई सुनिश्चित करें। उनका कहना था कि निर्माण पूरा होने के बाद कार्रवाई करना न तो कारगर है और न ही जनहित में। प्रशिक्षण सत्र के दौरान सुपरवाइजरों को विशेष रूप से यह समझाया गया कि अवैध प्लाटिंग या निर्माण की पहचान कैसे की जाए, मौके पर तत्काल क्या कदम उठाए जाएं और पूरे प्रकरण की रिपोर्टिंग उच्चाधिकारियों तक किस तरह पारदर्शी ढंग से पहुंचाई जाए। उपाध्यक्ष ने यह भी साफ कहा कि किसी भी प्रकार के दबाव, सिफारिश या प्रलोभन में आए बिना नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। वीडीए की यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल के वर्षों में वाराणसी के बाहरी इलाकों और नवसम्मिलित गांवों में कृषि भूमि पर धड़ल्ले से अवैध प्लाटिंग की शिकायतें सामने आई हैं। बिना लेआउट स्वीकृति, संकरी गलियों, बिना पार्क और बुनियादी सुविधाओं के विकसित हो रही ये कॉलोनियां भविष्य के शहरी संकट को न्योता दे रही हैं। ऐसे में वीडीए का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि शहर के नियोजित विकास की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
अवैध प्लाटिंग शहर के भविष्य पर सीधा हमला
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने कहा कि अवैध प्लाटिंग और बिना स्वीकृत मानचित्र निर्माण केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि शहर की आत्मा पर चोट है। ऐसी गतिविधियां न तो सड़क, न सीवर, न जलनिकासी और न ही हरित क्षेत्रों की कोई गारंटी देती हैं। परिणामस्वरूप कुछ वर्षों बाद वही कॉलोनियां प्रशासन और आम नागरिकों के लिए सिरदर्द बन जाती हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि अब वीडीए का फोकस डिमोलिशन के बाद बयानबाजी नहीं, बल्कि निर्माण से पहले रोक पर होगा। इसके लिए फील्ड अमले की सक्रियता सबसे अहम कड़ी है।
फील्ड स्टाफ की भूमिका केवल निरीक्षक नहीं, जवाबदेह प्रहरी
प्रशिक्षण में यह साफ किया गया कि जोनल अधिकारी, जेई और सुपरवाइजर सिर्फ निरीक्षण करने वाले कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि वे शहर के नियोजित विकास के प्रहरी हैं। यदि किसी क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग पनपती है, तो उसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी स्थानीय अमले की भी तय होगी। सुपरवाइजरों को बताया गया कि अवैध प्लाटिंग के शुरुआती संकेत क्या होते हैं। जैसे कृषि भूमि पर अचानक सड़क कटना, खंभे लगना, प्लॉट नंबरिंग, या अस्थायी बिक्री कार्यालय खुलना। ऐसे संकेत मिलते ही मौके पर नोटिस, सीलिंग और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।
दबाव और सिफारिशों पर सीधा वार
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम एक तरह से सिस्टम के भीतर बैठी ढिलाई और मिलीभगत के विरुद्ध चेतावनी भी था। उपाध्यक्ष ने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी प्रकार का राजनीतिक, सामाजिक या आर्थिक दबाव नियमों से ऊपर नहीं है। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमों की अनदेखी करता पाया गया, तो उस पर भी उतनी ही सख़्त कार्रवाई होगी, जितनी अवैध निर्माणकर्ता पर।
जन जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। उपाध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि केवल कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। फील्ड स्टाफ को आम नागरिकों, कॉलोनाइजरों और बिल्डरों को यह स्पष्ट जानकारी देनी होगी कि बिना मानचित्र और लेआउट स्वीकृति के कोई भी निर्माण या प्लाटिंग अवैध है। लोगों को यह समझाया जाए कि आज सस्ती ज़मीन का लालच कल बड़े कानूनी संकट में बदल सकता है।
215 नए गांव और महायोजना-2031
प्रशिक्षण के दौरान वीडीए क्षेत्र में हाल ही में सम्मिलित किए गए 215 गांवों को लेकर विशेष दिशा-निर्देश दिए गए। बताया गया कि इन गांवों का भू-उपयोग महायोजना-2031 के अंतर्गत अभी तक अभिसूचित नहीं है। ऐसे में कृषि योग्य भूमि पर प्लाटिंग तभी संभव होगी जब लेआउट स्वीकृत कराया जाए।
प्लाटिंग के लिए सख्त शर्तें
वीडीए ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्लाटिंग के लिए पहुंच मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई 9 मीटर अनिवार्य होगी।
यदि प्लाटिंग का कुल क्षेत्रफल 3000 वर्ग मीटर या उससे अधिक है, तो कम से कम 15 प्रतिशत क्षेत्र पार्क और हरित क्षेत्र के रूप में आरक्षित करना होगा। बिना इन शर्तों के की गई प्लाटिंग अवैध मानी जाएगी और उस पर सख्त कार्रवाई होगी।
नियोजित विकास बनाम मुनाफाखोरी
प्रशिक्षण में यह संदेश भी साफ था कि शहर का विकास कुछ कॉलोनाइजरों की मुनाफाखोरी के लिए गिरवी नहीं रखा जा सकता। नियोजित विकास ही वह रास्ता है जिससे काशी की सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण और नागरिक सुविधाओं की रक्षा संभव है। वीडीए ने संकेत दिए हैं कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल शुरुआत है। आने वाले समय में नियमित समीक्षा बैठकें, फील्ड निरीक्षण और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया और सख्त की जाएगी।
* अवैध प्लाटिंग निर्माण पर रोक के लिए वीडीए का फील्ड एक्शन
* जोनल अधिकारी, जेई व सुपरवाइजरों को स्पष्ट जिम्मेदारियां
* प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई पर जोर
* दबाव-प्रलोभन से दूर रहकर नियमों का पालन अनिवार्य
* 215 गांवों में प्लाटिंग के लिए लेआउट स्वीकृति जरूरी
* 9 मीटर पहुंच मार्ग और 15 फीसदी हरित क्षेत्र अनिवार्य
* जनजागरूकता को कार्रवाई के समान महत्व




