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सीएजी ने पकड़ा मोदी सरकार में 34 लाख करोड़ का घोटाला,देश का पीएम निकाल रहे दिवाला 

  • फर्जी लाभार्थियों पर लुटाई देश की 2% जीडीपी 
  • बीते साल केआखिर में  संसद में रखी गई थी सीएजी की रिपोर्ट 
  • मोदी सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाओं में बड़ा घोटाला पकड़ाया 
  • डिजिटल इंडिया बना भ्रष्टाचार का जरिया, सबने बांटकर खाया 
  • दिसंबर में संसद के पटल पर रखी रिपोर्ट में यूपी का खास जिक्र 
पँचशील अमित मौर्य
नई दिल्ली।
साल 1985 की बात है। भारत के तत्कालीन पीएम राजीव गांधी ने एक रैली में कहा- भारत के गरीबों के कल्याण के लिए दिल्ली से मिलने वाले एक रुपए का केवल 15 पैसा ही लोगों तक पहुंचता है। बाकी का 85 पैसा भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के पेट में समा जाता है। उस समय विपक्ष में रही भारजीय जनता पार्टी ने वर्षों तक राजीव के इस बयान को यह कहकर भुनाया कि कांग्रेस राज में भ्रष्टाचार चरम पर था।
लेकिन 2014 में देश की सत्ता संभावलने के 12 साल के भीतर यह आलम है कि सरकार में बैठे राजनेता और अफसर इन्हीं जनकल्याणकारी योजनाओं के नाम पर 34 लाख करोड़ रुपए डकार गए। भारत के महालेखाकार व नियंत्रक यानी सीएजी ने बीते साल के आखिर में देश की संसद में अपनी ऑडिट रिपोर्ट रखी। लेकिन देश का दुर्भागण् है कि देश के माननीय सांसद केवल राजनीति करने के लिए संसद में आते हैं। उन्हें भारत की इस अर्ध संवैधानिक संस्था सीएजी की रिपोर्टों से कोई लेना-देना नहीं है। वे न तो ऐसी रिपोर्टों को पढ़ते हैं और न ही इस पर पूरी इमानदारी से बहस करते हैं। सत्ता पक्ष की तो क्या ही कहें। वे तो चाहते हैं कि मीडिया से लेकर सड़क और संसद में ऐसे घोटालों पर बात ही न हो और उनकी तिजोरी भरती रहे।
लेकिन अपने पाठकों के लिए हमेशा से ही सच की आवाज बना अचूक संघर्ष आपके लिए आजाद भारत के इस सबसे बड़े घोटाले के हर पहलू को सामने लेकर आया है। इसमें हम पर्त-दर-पर्त यह बताएंगे कि कैसे डिजिटल इंडिया की आड़ लेकर आम जनता के टैक्स के पैसों से 34 लाख करोड़ रुपए लूटे गए और केंद्र की नरेंद्र मोदी सत्ता आंख मूंदे बैठी है।
कौशल विकास के नाम पर घपला
पिछले साल ही सीएजी की इस ऑडिट रिपोर्ट का एक हिस्सा इस रूप में सामने आया था कि केंद्र की कौशल विकास योजना का लाभ लेने वाले 90 लाख युवाओं के बैंक खाते फर्जी निकले और उनको मिले प्रमाणपत्र नकली पाए गए। लेकिन यह तो आटे में नमक के बराबर मामला था। केंद्र सरकार की ओर से जानबूझकर इस घोटाले का एक छोटा सा हिस्सा आगे कर मामले को दबाने का पूरा प्रयास किया गया, ताकि 34 लाख करोड़ के घोटाले को मीडिया खास तवज्जो न दे।
खाते में नकद भुगतान के नाम पर हुआ खेल 
केंद्र की मोदी सरकार आए दिन अपने विज्ञापनों में डिजिटल इंडिया का जिक्र करते हुए दावा करती है कि किसी तरह हितधारकों के खाते में उसने 34 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर कर करीब 3 लाख करोड़ रुपए बचाए। लेकिन 18 दिसंबर 2025 को संसद के पटल पर रखी गई सीएजी की रिपोर्ट में सरकार के इस दावे की धज्जियां उड़ गई हैं। रिपोर्ट में पाया गया कि केंद्र सरकार ने 2023 में हजारों की संख्या में उन रिटायर्ड कर्मियों के खाते में भी पेंशन की रकम डाल दी, जो कि तब तक मर चुके थे। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि सरकार का पेंशन मंत्रालय अपने डेटाबेस में मृतक कर्मियों के नाम नहीं हटा सका। इससे साफ है कि मोदी सरकार का डिजिटल इंडिया का नारा सिर्फ एक जुमले के सिवा और कुछ नहीं है। बिना डेटाबेस के डिजिटल इंडिया देश के लोगों को महज एक धोखा है।
रिजर्व बैंक के पास बेनामी जमा डेढ़ लाख करोड़
आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि 2023 से 2025 के बीच दो साल में भारतीय रिजर्व बैंक के पास केवल 250 खातों में बीते एक दशक से 1.5 लाख करोड़ से ज्यादा की रकम बेनामी पड़ी है। ये वे फर्जी खाते हैं, जिन्हें सरकारी योजनाओं के तहत नकद भुगतान प्राप्त करने के लिए खोला गया, लेकिन बाद में असलियत उजागर होने पर भुगतान रोक दिया गया। केवल बैंक खातों में भुगतान ही नहीं,  बल्कि भारत सरकार के पास आने वाला जीएसटी कलेक्शन का पैसा भी गड़बड़ी का शिकार है। 11 दिसंबर 2025 को एक बार फिर सीएजी ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में बताया कि सरकार के खाते में आने वाला जीएसटी का 21, 695 करोड़ रुपए शक के दायरे में है। सीएजी ने जीएसटी के 2519 खातों में इनपुट टैक्स क्रेडिट में गड़बड़ी और टैक्स एवं ब्याज की लघुकालीन अदायगी में अनियमितता पाई।
कौशल विकास के नाम पर फर्जीवाड़ा
संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में सीएजी ने 2015 से 2022 के बीच 90 लाख बोगस खातों के जरिए कौशल विकास योजना का पैसा डकार लेने की आशंका जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, हितधारक युवाओं के न तो बैंक खाते खोले गए और न ही उनके प्रमाण पत्र वैध मिले। कहीं नाम की जगह ‘123456’ लिखा मिला तो कहीं खाली जगह छूटी हुई थी। योजना के तहत हजारों की संख्या में नाबालिग और बोगस हितधारकों को सर्टिफिकेट बांटकर उनके नाम पर फंड का पैसा डकार लिया गया। इन घपलों के बावजूद बीते साल की शुरुआत में नरेंद्र मोदी सरकार ने योजना के ढांचे में सुधार करते हुए 8800 करोड़ रुपए और आवंटित किए, लेकिन यह रकम भी लाखों हितधारकों को इसलिए नहीं मिली, क्योंकि उनके बैंक खाते और प्रमाणपत्र ही फर्जी थे। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि फिर सरकार ने किसके खाते में पैसे डाल दिए ?
यूपी में पीएम आवास घोटाला
सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में यूपी में पीएम आवास योजना के तहत बड़ा घोटाला पकड़ा है। संसद में रखी गई रिपोर्ट में हजारों घरों को योजना के तहत पूरा बताया गया है, जबकि हकीकत में उन्हें बेहद घटिया सामग्री से बनाया गया और उन घरों में न तो शौचालय हैं और न ही बिजली की और पानी की सुविधा। सीएजी ने योजना के तहत यूपी में 86 लाख रुपए से अधिक के सायबर फ्रॉड पकड़े हैं, जिनके माध्यम से सारा पैसा 159 हितधारकों के खाते में गया और वहां से बेनामी खातों में पहुंच गया। इसी तरी छत्तीसगढ़ में 230 करोड़ का फंड घपलेबाजों के खाते में जाने से बचा, क्योंकि ऑडिट में राशि के दुरुपयोग की बात सही साबित हुई।
इंदौर में 9 लाख परिवारों को गंदा पानी 
मध्यप्रदेश के इंदौर में भागीरथपुरा के 27 लोगों के जनवरी में दूषित पानी पीने से मौत की आशंका सीएजी ने 2019 की अपनी रिपोर्ट में पहले से ही जता दी थी। सीएजी की 2013 से 2018 की रिपोर्ट में इंदौर शहर के 9 लाख परिवारों को दूषित पानी सप्लाई की बात कही गई थी। वहीं, 2024 की सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के शहरी निकायों में प्रशासन लोगों के पेयजल की गुणवत्ता का परीक्षण करने में लगातार नाकाम रहा है। सीएजी की रिपोर्ट आने के बाद दिल्ली जल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राजधानी में भूजल स्रोतों से लिया जा रहा 55% पानी पीने के काबिल नहीं है। एक अन्य निजी एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तरप्रदेश और राजस्थान में ठेकेदारों ने जल जीवन मिशन की गाइडलाइन का पालन न करते हुए 30% से ज्चादा फंड डकार लिया। दोनों प्रदेशों से इस बारे में 17 हजार से ज्यादा शिकायतों के बाद 2300 अधिकारियों पर कार्रवाई की गई औरी सैकड़ों ठेकेदारों को ब्लैकलिस्टेड किया गया।
7.5 लाख आयुष्मान कार्ड बोगस
सीएजी ने केंद्र सरकार के आयुष्मान भारत पीएम जन आरोग्य मिशन का परफॉर्मेंस ऑडिट करने पर पाया है कि इस योजना के करीब 7.5 लाख लाभार्थी फर्जी हैं। ये सभी लाभार्थी एक ही मोबाइल नंबर 9999999999 से रजिस्टर्ड हैं। इसके बाद केंद्र सरकार ने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए 1000 से ज्चादा अस्पतालों को इस योजना से बाहर कर दिया और उनसे 231 करोड़ की पेनाल्टी वसूली।
भारत में भ्रष्टाचार न्यू नॉर्मल हुआ 
कभी 2 जी टेलीकॉम घोटाले के बहाने सरकार गिरा देने वाले भारत में बीते 12 साल में भ्रष्टाचार अब न्यू नॉर्मल है। यही कारण है कि भारत का सबसे बड़ा 34 लाख करोड़ का घोटाला सामने आने के बाद भी न तो लोग विचलित हुए और न ही केंद्र सरकार के कानों में जूं रेंगी। डिजिटल इंडिया के आने से यह माना गया था कि इससे बिचौलियों को दूर किया जा सकेगा। लेकिन इसी डिजिटल इंडिया की आड़ लेकर बिचौलियों ने बोगस लाभार्थी खड़े किए और केंद्र एवं राज्यों की भाजपा सत्ता ने इसका राजनीतिक फायदा उठाते हुए अपने समर्थक वोटरों को हर तरह से खूब मालामाल किया है।
किस मुँह से पीएम मोदी करते है भ्र्ष्टाचार मुक्त सरकार की बात
भारी भ्र्ष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गयी।नरेन्द्र मोदी 2014 में भ्र्ष्टाचार का मुद्दा जनता के बीच ले जाकर प्रधानमंत्री बन गए।पीएम बनते ही इनका एक स्लोगन था न खाऊंगा न खाने दूंगा लेकिन हकीकत ये मोदी का ये एजेंडा रहा कि तुम खाओ और हमे इलेक्टोरल बांड में चंदा दे दो मने की चोर- चोर मौसेरे भाई चाहे देश के भट्टा बैठ जाई इनसे कोई मतलब नही है।सीएजी की ऑडिट में मोदी सरकार पूरी तरह नंगी हो गयी है,लेकिन पीएम खुद बड़े ही बेशर्मी से आज भी भ्र्ष्टाचार मुक्त सरकार का नारा देते हुए नजर आते है। इन सबको देखते हुए मोदी को ये कहना उचित प्रतीत हो रहा है कि बेहया द ग्रेट पीएम आफ इंडिया।

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