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हेमंत सोरेन के मंत्री व जिम्मेदारों ने 3000 करोड़ का किया वारा-न्यारा,केंद्रीय एजेंसी के आरोप-पत्र ने बिगाड़ दिया खेल सारा

झारखंड के मंत्री और इंजीनियरों ने 3000 करोड़ का टेंडर पास करवाने लिया 90 करोड़ का कमीशन, ईडी ने चार्जशीट दाखिल की तो सोरेन सरकार को आया टेंशन

* झारखंड के बहुचर्चित टेंडर घोटाले का प्रवर्तन निदेशालय ने किया भंडाफोड़
* ईडी ने 14 इंजीनियरों को बनाया आरोपी, पूरा रैकेट चल रहा था
* चार्जशीट में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम का भी नाम
* ग्रामीण विकास विभाग में मंत्री और इंजीनियरों ने तय कर रखा था फिक्स रेट
* मंत्री से लेकर सचिव तक सभी को मिलती थी बड़ी दलाली, मिलकर खाते थे

रांची। ईडी, यानी प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में हुए बहुचर्चित टेंडर घोटाले की पूरी पोल खोल दी है। कुल 3048 करोड़ के इस टेंडर घोटाले में अब जाकर पता चला है कि राज्य के मंत्री और उनके मातहत 14 इंजीनियरों ने ठेका पास करवाने के लिए 90 करोड़ की कमीशन ली थी। ईडी ने अपनी पांचवीं सप्लीमेंट्री चार्जशीट में इस घोटाले का पर्दाफाश किया है।चार्जशीट में और 14 इंजीनियरों को आरोपी बनाया गया है। इनके अलावा चार्जशीट में राज्य के तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम, तत्कालीन विभागीय सचिव तथा चीफ इंजीनियर के भी नाम लिए गए हैं।

 

चल रहा था दलाली का रैकेट

ईडी की जांच में यह भी स्थापित हुआ कि ग्रामीण कार्य विभाग, जेएसआरडीए के भीतर एक व्यवस्थित कमीशन-रिश्वतखोरी का रैकेट चल रहा था, जिसके तहत निविदा आवंटन के बदले ठेकेदारों से कुल निविदा मूल्य का 3 प्रतिशत कमीशन वसूला जाता था। इस दलाली का बंटवारा मंत्री, उसके सचिव और इंजीनियरों के बीच मं होता था। दलाली का 1.35 प्रतिशत मंत्री को मिलता था। यह पैसा मंत्री के प्राइवेट सेक्रेट्री के जरिए दिया जाता था। आलमगीर आलम के पीए का नाम संजीव कुमार लाल है। बाकी का 0.65 से 1.0 प्रतिशत कमीशन विभाग के सचिव को और फिर चीफ इंजीनियर और अन्य अधीनस्थ इंजीनियरों को बांटा गया। ईडी ने रांची स्थित पीएमएलए की विशेष अदालत में 17 मार्च को पांचवी पूरक चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट ग्रामीण कार्य विभाग के 14 नए इंजीनियरों के विरुद्ध दाखिल की गई है।

इन सभी ने मिलकर खाई दलाली

ईडी ने चार्जशीट में ग्रामीण कार्य विभाग ने जिन इंजीनियरों को आरोपित किया है, उनमें सेवानिवृत्त मुख्य इंजीनियर सिंगराई टुटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार व प्रमोद कुमार तथा कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राज कुमार टोप्पो, अशोक कुमार गुप्ता, सिद्धांत कुमार व अनिल कुमार (सेवानिवृत्त) के अलावा सहायक अभियंता राम पुकार, राम व रमेश ओझा (दोनों सेवानिवृत्त) इनके साथ पूर्व अधीक्षण अभियंता/मुख्य अभियंता उमेश कुमार (सेवानिवृत्त) शामिल हैं।

दलाली खाई और बांटा भी

ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच में पाया है कि ये इंजीनियर टेंडर आवंटन में अवैध तरीके से कमीशन की वसूली करते थे। सुनियोजित तरीके से कमीशन वसूले और जमा किया और उसे सभी संबंधितों, सीनियरों के बीच बांट दिया। सभी आरोपित इंजीनियर झारखंड सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग, ग्रामीण विकास विशेष क्षेत्र व झारखंड राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण से संबद्ध रहे हैं। पांचवी चार्जशीट के साथ ही इस पूरे प्रकरण में आरोपितों की संख्या 36 हो गई है। ईडी ने दाखिल चार्जशीट में कोर्ट को बताया है कि इस मामले में अब तक ईडी ने झारखंड, दिल्ली व बिहार में 52 जगहों पर तलाशी ली है।

अभी तक 9 गिरफ्तारियां

इस मामले में अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, संजीव कुमार लाल के सहायक जहांगीर आलम अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं। अब तक तीन अस्थाई जब्ती के माध्यम से ईडी अब तक 44 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर चुकी है। इस पर एडजुकेडिंग अथारिटी की मंजूरी भी मिल चुकी है। ईडी अलग-अलग अभियुक्तों के ठिकाने से लगभग 38 करोड़ रुपये नकदी भी जब्त कर चुकी है। इनमें संजीव कुमार लाल के ठिकाने से 32.20 करोड़ रुपये, ठेकेदार मुन्ना सिंह के ठिकाने से 2.93 करोड़ रुपये शामिल हैं। ईडी ने आठ लग्जरी गाड़ियां भी जब्त की हैं। इससे पहले इस मामले में ईडी ने न्यायालय के सामने एक मुख्य चार्जशीट व चार पूरक चार्जशीट दाखिल की थी, जिसपर न्यायालय ने संज्ञान ले लिया।

ऐसे खुला पूरा मामला

यह मामला एक जूनियर इंजीनियर सुरेश प्रसाद वर्मा की दस हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तारी से जुड़ा हुआ था। ईडी ने एसीबी जमशेदपुर में दर्ज कांड संख्या 13/2019 के आधार पर इंफॉर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज किया था। एसीबी ने तब तलाशी के दौरान तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र कुमार राम के ठिकाने से 2.67 करोड़ रुपये नकद बरामद किए थे। ईडी ने जांच के क्रम में वीरेंद्र कुमार राम के भ्रष्टाचार की कमाई को उजागर किया था और बताया था कि ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर आवंटन में कमीशन से वीरेंद्र कुमार राम ने करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की थी।

53 मामलों में से केवल 7 का ही निराकरण

2018 से 2025 के बीच दर्ज कुल 53 इंफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) में से करीब 20 मामले ऐसे हैं, जो चुनावी मौसम से ठीक पहले सामने आए। नवंबर 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले भी यही ट्रेंड देखने को मिला। साल 2023 में रिकॉर्ड 14 केस दर्ज हुए, जबकि 2024 में चुनाव से पहले 6 नए मामले सामने आए। पिछले सात वर्षों में दर्ज 53 ईसीआईआर में से एजेंसी अब तक सिर्फ 7 मामलों को ही निस्तारित कर पाई है। इनमें 2020 में एक, 2022 में तीन और 2025 में एक मामला शामिल है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन पांच मामलों में कोई भी हाई-प्रोफाइल या चुनाव से पहले दर्ज मामला शामिल नहीं है। यानी जिन मामलों ने राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा हलचल मचाई, वे अब भी जांच के दायरे में हैं और लंबित पड़े हैं। रांची जमीन घोटाला और ग्रामीण कार्य विभाग का टेंडर कमीशन कांड ऐसे दो बड़े मामले रहे, जिन्होंने सीधे सरकार को प्रभावित किया। तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पद छोड़ना पड़ा, उनकी गिरफ्तारी हुई और उन्हें लंबा समय जेल में बिताना पड़ा।

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