
– राष्ट्रीय खेल विकास फंड के पैसे में एक नहीं, कई बार लगाई सेंध
– अपनी कॉलोनी में जुटाईं वर्ल्ड क्लास खेल सुविधाएं
– पीएम मोदी के खेलो इंडिया के नाम पर हुई खुली लूट
– जब रखवाले ही बन गए लुटेरे तो भला देखेगा कौन?

नई दिल्ली। दृश्य-1: दिल्ली के लुटियंस जोन का मोतीबाग इलाका, जहां भारत के शीर्ष नौकरशाह बसते हैं। यही एक पारदर्शी शीट के तले बने स्वीमिंग पूल में नौकरशाहों और अमीरों के बच्चे अटखेलियां कर रहे हैं। पास में ही कुछ किशोर बच्चे टेनिस कोर्ट में जोर-आजमाइश कर रहे हैं। अगर कोई आम आदमी अंदर जाना चाहे तो बाहर खड़े सिक्योरिटी गार्ड उन्हें झट से रोक देते हैं। वे उन्हें ही घुसने देते हैं, जिन्हें अंदर आने की इजाजत है।
दृश्य-2: मोती बाग से 3 किलोमीटर दूर सिविल सेवा इंस्टीट्यूट में बना एक स्क्वॉश कोर्ट। दोपहरी की सुनहरी धूप में वहां लोग स्क्वॉश खेलकर अपना पसीना बहा रहे हैं। बाहर एक बोर्ड टंगा है। उसमें लिखा है- बिना आईडी के प्रवेश वर्जित है।
एक अंग्रेजी अखबार ने दोनों जगहों की पड़ताल कर यह पता लगाया है कि देश के शीर्ष नौकरशाहों के लिए बने इन मनोरंजन स्थलों का खर्च राष्ट्रीय खेल विकास के फंड से आया है। केंद्र सरकार ने यह पैसा देश के एथलीटों को खेल का विश्व स्तरीय ढांचा उपलब्ध कराने के नाम पर दिया थाथा। दिलचस्प बात यह है कि यह फंड भी इन्हीं सरकारी बाबुओं ने आवंटित किया था। अखबार ने बीते पांच साल में आवंटित फंड की डीटेल्स निकाली। कुछ जानकारियां आरटीआई कानून के दायरे में आईं। रिपोर्टर ने कुछ वर्तमान और पूर्व नौकरशाहों से बात कीकी तो पता चला कि इसी फंड से निकला कुछ पैसा मोती बाग और सिविल सेवा इंस्टीट्यूट में बने खेल ढांचों में भी खर्च हुआ है।


कैसे आरएसएस और क्रिकेट बोर्ड तक पहुंचा पैसा?
राष्ट्रीय खेल विकास के फंड का पैसा टारगेट ओलिंपिक पोडियम स्कीम के तहत एथलीटों के लिए आवंटित हुआ था। लेकिन इस पैसे का लाभ राजस्थान और छत्तीसगढ़ में आरएसएस से जुड़े दो संस्थानों के साथ ही एशिया और कैरेबियाई क्रिकेट बोर्ड को गया, जिनके बारे में देश में बहुत कम लोग ही जानते हैं। केंद्रीय खेल मंत्री की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय परिषद के पास राष्ट्रीय खेल विकास फंड का दारोमदार है। लेकिन पैसे का आवंटन 6 सदस्यीय कमेटी करती है, जो खेल मंत्रालय के अधीन है। 2021 से 2025 के बीच राष्ट्रीय खेल विकास फंड से 6.2 करोड़ रुपया सिविल सेवा अधिकारियों के इंस्टीट्यूट, सेंट्रल सिविल सर्विसेज कल्चरल एंड स्पोर्ट बोर्ड के साथ न्यू मोती बाग रेसिडेंशियल कॉम्प्लेक्स को भी जारी हुआ। राष्ट्रीय खेल विकास फंड के कुल आवंटित 6.7 करोड़ में से 6.2 करोड़ रुपए बाबुओं ने अपने विकास के लिए हड़प लिया। ये सारी जानकारियां खेल मंत्रालय के रिकॉर्ड में हैं। इसी अवधि में रिकॉर्ड यह भी बताते हैं कि खेल मंत्रालय के फंड से आरएसएस से जुड़े दो संगठनों को भी टूर्नामेंट आयोजित करने के लिए 2.66 करोड़ बांटा गया। इस पैसे से इन्हें कुछ खेल ढांचे भी खड़े करने थे। यानी 5.07 करोड़ के कुछ आवंटित धन से 2.66 करोड़ रुपए आरएसएस से जुड़े संगठनों को बांट दिया गया। इसके अलावा भारतीय खेल प्राधिकरण ने एनएसडीएफ के जरिए करीब 1.08 करोड़ रुपए क्रिकेट के सामान खरीदने के लिए हड़प लिया। इन सामानों को मॉलदीव, जमैका और सेंट विन्सेंट एंड द ग्रेनेडियर्स के क्रिकेट बोर्डों के लिए खरीदा जाना बताया गया। कानूनन यह सरकारी पैसे का गबन है। दुरुपयोग है, लेकिन यह काम केंद्र सरकार के खेल मंत्रालय के अफसरों ने आपस में मिलकर किया। इसका नतीजा यह हुआ कि राष्ट्रीय खेल विकास फंड में पैसे की आमद
संसदीय समिति ने आपत्ति जताई
राष्ट्रीय खेल विकास फंड में इस कदर लूटमार हुई कि संसद की स्थायी समिति को इस बंदरबांट पर आपत्ति जतानी पड़ी। समिति ने एनएसडीएफ के फंड को लूट से बचाने के लिए कड़े नियम लागू करने की जरूरत बताई। अगस्त 2025 में लोकसभा के पटल पर संसदीय समिति की रिपोर्ट को कुछ समय के लिए रखने के बाद भुला दिया गया, क्योंकि लूटमार करने वाले अफसर केंद्र की मोदी सरकार के ही थे। रिपोर्ट में लिखा है- कमेटी के संज्ञान में यह बात आई है कि पिछले कुछ वर्षों के अनुदान में से कुछ पैसा आवासीय कॉलोनियों और सिविल सेवा अधिकारियों के संगठन को भी गया है। समिति यह सिफारिश करती है कि इस तरह की प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए।
लूट के लिए बाकायदा प्रस्ताव भेजा
रिकॉर्ड बताते हैं कि 2024 के मध्य में राष्ट्रीय खेल विकास फंड की देखरेख करने वाली 6 सदस्यीय कमेटी के पास भारत के शीर्ष नौकरशाहों के आवासीय परिसरों में खेल सुविधाओं के लिए अनुदान देने का बाकायदा एक प्रस्ताव भेजा गया। ये आवासीय कॉलोनियां दिल्ली में करीब 100 एकड़ क्षेत्र में फैली हैं। हालांकि, इस तरह का गैरकानूनी प्रस्ताव पहली बार नहीं आया था। रिकॉर्ड बताते हैं कि 31 जुलाई 2019 को भारतीय खेल प्राधिकरण ने खेलो इंडिया स्कीम के न्यू मोती बाग कॉप्लेक्स में खेल ढांचे बनाने के लिए 2.8 करोड़ रुपए आवंटित किए थे। फिर 7 जून 2024 को 2.2 करोड़ रुपए का आवंटन हुआ। यह आवंटन राष्ट्रीय खेल विकास फंड से किया गया था। फंड सीधे मोती बाग के आवासीय कल्याण एसोसिएशन को मिला। इस बार फंड लेने का मकसद खेल ढांचों का नवीनीकरण और उन्नयन था। इसके लिए भी पहले 1.1 करोड़ रुपए और फिर पिछले साल 88 लाख रुपए आवंटित किए गए। यानी केंद्र सरकार के अफसरों ने खुद ही मिलकर जब चाहे कानून तोड़ा, क्योंकि यह पैसा देश के एथलीटों के लिए खेल ढांचा बनाने के लिए था, जो भारत के लिए ओलिंपिक में मेडल लेकर आते हैं।
खिलाड़ियों के लिए थर्ड क्लास, अपने लिए वर्ल्ड क्लास ढांचे
राष्ट्रीय खेल विकास फंड के पैसे में हेरफेर कर भारत के टॉप नौकरशाहों ने अपने लिए बेहतरीन खेल ढांचे खड़े किए हैं। भले ही भारत के खिलाड़ियों के लिए देशभर में थर्ड क्लास खेल ढांचे बनाए गए हों। बैडमिंटन कोर्ट में लकड़ी की फ्लोरिंग है। स्वीमिंग पूल में ठंड और गर्मी के दौरान तापमान ऑटोमेटिक रूप में नियंत्रित हो जाता है। एक जिम है, बिलियर्ड रूम और दो टेनिस कोर्ट भी हैं। भारतीय खेल प्राधिकरण की प्रोजेक्ट स्टेटस रिपोर्ट कहती है- टेनिस कोर्ट 2019 के खेलो इंडिया प्रोजेक्ट का हिस्सा थी। पांच साल बाद इनका नवीनीकरण किया गया।




