
- मोदी सरकार जल्द ही अस्त्र मार्क 2 का निर्माण सौंपेगी प्राइवेट कंपनियों को
- इसके बाद नंबर प्रलय बैलिस्टिक मिसाइलों का
- डीआरडीओ की बनाई मिसाइलों का उत्पादन प्राइवेट को सौंपना मतलब देश के लिए खतरा
- इंडोनेशिया जाकर डील कर आए हैं पीएम मोदी

नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी के हालिया इंडोनेशिया दौरे में अस्त्र मार्क 2 मिसाइलों की मांग के बाद अब रक्षा मंत्रालय हवा से हवा में मार करने वाली इन मिसाइलों का निर्माण निजी क्षेत्र को सौंपने जा रहा है। अभी तक यह मिसाइल सरकारी कंपनी भारत डायनामिक्स लिमिटेड बना रही थी। लेकिन रक्षा मंत्रालय ने अचानक सरकारी कंपनी को दरकिनार कर अडानी, टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियों को मिसाइल बनाने का ठेका देने के रास्ते खोले हैं। अगर यह योजना लागू होती है, तो अब तक जिस काम पर भारत डायनामिक्स का लगभग एकाधिकार खत्म हो जाएगा। इस खबर के बाद भारत के शेयर टूटने लगे हैं।
खबर है कि भारत का रक्षा मंत्रालय जल्द ही इन मिसाइलों को बनाने के लिए निजी कंपनियों से प्रस्ताव मंगाने जा रहा है। अस्त्र मार्क 2 मिसाइलों को डीआरडीओ ने विकसित किया था। इन्हें निजी हाथों में सौंपने पर इन मिसाइलों की डिजाइन के दूसरे देशों, खासकर पाकिस्तान के हाथों पड़ने की आशंका बढ़ जाएगी। यह भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा भारी खतरा साबित हो सकता है।

भारत की सुरक्षा पर खतरा क्यों?
अस्त्र मार्क 2 चीन की पीएल 15 मिसाइलों की तरह है, जो बियांड विजुअल रेंज पर 200 किलोमीटर दूर से आने वाले विमानों और मिसाइलों पर वार करती है। इन्हें दागो और भूल जाओ वाली मिसाइल भी कहा जाता है। बीते साल पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के समय पड़ोसी देश ने हमारे खिलाफ चीन में बने पीएल 15 मिसाइलों का इस्तेमाल कर राफेल विमानों को गंभीर नुकसान पहुंचाया था। चीन से मिले पाकिस्तान के जेएफ 15 विमान इन्हीं बियॉन्ड विजुअल रेंज पीएल 15 मिसाइलों से लैस हैं, जो अस्त्र की तरह 200 किमी दूर से मार करते हैं। हाल में नरेंद्र मदेी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान वहां की सरकार ने अस्त्र मार्क 2 मिसाइलों को खरीदने की इच्छा जताई थी। अब केंद्र सरकार इन मिसाइलों का उत्पादन निजी कंपनियों से कराना चाहती है। वह भी एक बड़ी सरकारी कंपनी को नजरअंदाज कर, जो कि मिसाइल की तकनीक को जानती है। अगर यह तकनीक पाकिस्तान के हाथ पड़ गई तो न केवल वह ऐसी मिसाइलों का उत्पादन खुद करेगा, बल्कि दूसरे देशों को बेचेगा भी। लेकिन भारत सरकार इस खतरे पर बिना कोई बात या बहस किए अपना फैसला लेने जा रही है।

भविष्य की मांग का बहाना
रक्षा मंत्रालय का मानना है कि भविष्य में अस्त्र मिसाइलों की मांग दुनिया में और तेजी से बढ़ सकती है। इसे देखते हुए अडानी, टाटा और महिंद्रा को इसे बनाने का ठेका देना चाहिए। अस्त्र मिसाइल को सरकारी कंपनी डीआरडीओ ने बनाया था। निजी कंपनियों से इसे बनाने पर मिसाइल की पूरी तकनीक उनके हवाले करनी होगी। रक्षा मंत्रालय मिसाइल की मांग बढ़ने का बहाना बनाकर असल में इसके निर्माण को निजी हाथों में सौंपने जा रही है। अभी इसके लिए निजी कंपनी से प्रस्ताव नहीं मांगे गए हैं, लेकिन जल्दी ही रक्षा मंत्रालय इस दिशा में कदम उठा सकता है। इस प्रस्ताव के जरिए भारतीय निजी कंपनियों को डीआरडीओ द्वारा विकसित अस्त्र मार्क 2 मिसाइल बनाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। अब सिर्फ सरकारी कंपनी ही नहीं, बल्कि निजी कंपनियां भी इस मिसाइल के निर्माण में हिस्सा ले सकेंगी।अब तक सिर्फ भारत डायनामिक्स ही बनाती थी। यह कंपनी इस मिसाइल की एकमात्र निर्माता थी। लेकिन सरकार का मानना है कि भविष्य में मिसाइलों की मांग इतनी तेजी से बढ़ सकती है कि केवल भारत डायनामिक्स की मौजूदा उत्पादन क्षमता पर्याप्त नहीं होगी। इसी वजह से सरकार उत्पादन का दायरा बढ़ाना चाहती है।
इन कंपनियों को मौका
रक्षा मंत्रालय की ओर से प्रस्ताव जारी किए जाने पर कई बड़ी भारतीय कंपनियां इसमें हिस्सा ले सकती हैं। अडानी डिफेंस, भारत फोर्ज, टाटा, महिंद्रा, आईकॉम आदि। ये सभी कंपनियां भारत सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत डिफेंस उत्पादन का हिस्सा हैं। इस बीच, बाजार को चिंता इस बात की है कि अगर अस्त्र मिसाइल का निर्माण कई कंपनियां करने लगेंगी, तो भारत डायनामिक्स का शेयर गिर सकता है। अभी तक कंपनी को इस मिसाइल के ऑर्डर लगभग पूरी तरह मिलते थे। लेकिन निजी कंपनियों के आने से-ऑर्डर कई कंपनियों में बंट सकते हैं। प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। कीमतों पर दबाव आ सकता है। भविष्य की कमाई की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने इस खबर को भारत डायनामिक्स के लिए नकारात्मक माना। सिर्फ अस्त्र ही नहीं, रणनीतिक रूप से भारत के लिए अहम प्रलय मिसाइल को भी निजी हाथों में देने की तैयारी है। प्रलय एक शॉर्ट-रेंज सतह से सतह में मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता करीब 500 किलोमीटर तक है। यह ध्वनि की गति से करीब 6 गुना ज्यादा रफ्तार से उड़ान भर सकती है। अगर इसका उत्पादन भी निजी कंपनियों को मिलता है, तो डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। ऑपरेशन सिंदूर में भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से बनाई गई ब्रह्मोस मिसाइल की चर्चा पूरी दुनिया में हैं। लेकिन इसके साथ ही अस्त्र मार्क-2 मिसाइल ने भी इस अभियान में अपनी भूमिका निभाई थी। हवा से हवा में मार करने वाली इस मिसाइल की मारक क्षमता करीब 180 से 200 किलोमीटर तक है। सबसे खास बात है कि यह मिसाइल पूरी तरह से भारत में ही बनाई गई है।
खतरे में डालेगा यह रोडमैप
हाल के वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर काफी जोर दिया है।
डिफेंस उपकरणों और मिसाइलों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार चाहती है कि सिर्फ एक सरकारी कंपनी पर निर्भर रहने के बजाय कई कंपनियां उत्पादन करें ताकि उत्पादन क्षमता बढ़े, समय पर सप्लाई हो, भविष्य की जरूरतें पूरी हो सकें और निर्यात के अवसर भी बढ़ें। लेकिन, मिसाइल तकनीक के लीक होने की आशंका को देखते हुए भारत सरकार का यह रोडमैप देश को खतरे में डाल सकता है।
डिफेंस में नाकाम रहा प्राईवेट सेक्टर
एडवांस मल्टीरोल लड़ाकू विमान, यानी एएमसीए परियोजना में सरकार ने पहली बार बड़े स्तर पर निजी उद्योग को साझेदार बनाया है. मकसद सिर्फ एक विमान बनाना नहीं, बल्कि देश में ऐसा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करना है, जहां सरकारी और निजी कंपनियां मिलकर अत्याधुनिक हथियारों का उत्पादन करें. हालांकि, प्राइवेट सेक्टर की कोई भी भारतीय कंपनी अभी तक एएमसीए नहीं बना सकी है। इसी तरह तेजस फाइटर विमान बनाने की परियोजना भी यूपीए के समय से अटकी हुई है, क्योंकि भारत इन विमानों के इंजन के लिए अमेरिका के आगे मोहताज है। भारत ने दुनियाभर में ब्रह्मोस और जिस अस्त्र मिसाइलों को बेचने के करार किए हैं, वे सभी रूस और भारत के साथ तकनीक और रक्षा करार से बनीं मिसाइलें हैं, जिन्हें डीआरडीओ ने बनाया है, किसी प्राइवेट कंपनी ने नहीं। इसीलिए इन मिसाइलों की तकनीक अभी तक भारत से बाहर नहीं जा सकी है।




