धर्मेंद्र प्रधान की गई प्रधानी,देश के युवाओं ने मोदी का उतार दिया पानी
कॉकरोचों के आगे झुकी सरकार- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, पीएम को लिखी चिट्ठी; दीपके बोले- झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए, छात्रों में जश्न

- आठ साल में नरेंद्र मोदी सरकार में दूसरे कैबिनेट मंत्री का इस्तीफा
- 2017 में राजनाथ सिंह बोले थे- एनडीए सरकार में इस्तीफे नहीं होते
- धर्मेंद्र प्रधान के पत्र को पीएम इस्तीफा मानकर राष्ट्रपति को मंजूरी के लिए भेजेंगे
- सभी विपक्षी दलों ने इसे भारत की युवा शक्ति की बड़ी जीत बताया
- राहुल गांधी बोले-अतीत बन गए हैं पीएम मोदी, अब उन्हें जाना होगा

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में बीते 36 दिन से चल रहे जेन जी और युवाओं के आंदोलन के बाद आखिरकार शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान ने एक पोस्ट के जरिए कहा कि 10 दिन से उनका मन दुखी थी। मैंने अपना इस्तीफा पीएम नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के इस आंदोलन की शुरुआत 6 जून को हुई थी। उनकी मांग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की थी। साथ ही नीट पेपर लीक की वजह से आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना भी आंदोलन में एक मांग के तौर पर रखा गया था। अब इसी कड़ी में प्रधान का इस्तीफा हुआ है।

झुकती है दुनिया…
प्रधान के इस्तीफे की खबर मिलते ही जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा, “झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए। लोकतंत्र में डरना नहीं बोलना है।” अभिजीत ने कहा कि युवाओं का शांतिपूर्ण संघर्ष ज़ाया नहीं गया। उन्होंने 2017 में भाजपा नेता और कैबिनेट मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान को याद करते हुए कहा- जो कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, वहां आखिर इस्तीफा हो गया। कॉकरोच जनता पार्टी ने गांधी जी को याद करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से लक्ष्य को प्राप्त करना उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से सीखा है। कॉकरोच जनता पार्टी ने ‘एक्स’ पर वीडियो भी जारी की है, जिसमें युवाओं में खुशी देखी जा सकती है। युवा ढोल पर थिरक रहे हैं, गमछे उड़ा रहे हैं और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अपनी खुशी ज़ाहिर कर रहे हैं।
आज भी होनी थी बातचीत
शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी और सरकार की बैठक भी हुई थी। बैठक के बाद पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष राका और सौरव दास ने कहा था कि उन्होंने सरकार के सामने तीन मांगे रखी हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। उनका कहना था कि प्रधान के इस्तीफे के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कॉकरोच जनता पार्टी ने स्पष्ट कहा था कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता तब तक जंतर मंतर पर प्रदर्शन जारी रहेगा। कॉकरोच जनता पार्टी और केंद्र सरकार के बीच शनिवार को भी दोपहर 3.30 बजे बैठक होनी थी, लेकिन उससे पहले ही प्रधान का इस्तीफा हो गया।

आखिर धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया?
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा असल में आरएसएस औरा केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के बीच की रस्साकशी का नतीजा है। इस पूरे मामले को मोदी सरकार ने जिस तरह से मैनेज किया, उसने भारत की युवा शक्ति को एकजुट कर दिया। केवल दिल्ली के जंतर-मंतर ही नहीं, बल्कि मुंबई, महाराष्ट्र के नागपुर, नाशिक और मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड से लेकर विदेशों में भी युवाओं ने केंद्र सरकार का विरोध करना शुरू किया। नागपुर में तो उत्तेजित छात्रों ने आरएसएस के मुख्यालय का चार दिन से घेराबंदी कर रखी थी। देश के बिगड़ते हालात और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की जिद और दमनकारी कार्रवाई से चिंतित आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत को शुक्रवार को यह बयान देना पड़ा कि सरकार को युवा बच्चों की बात सुननी चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि युवाओं को एकतरफा आदेश देने से वे नहीं मानेंगे। उनके साथ संवाद होना चाहिए। भावगत का यह बयान धर्मेंद्र प्रधान के लिए एक इशारा था कि अब उनके पास अपने पद पर बने रहने का कोई विकल्प नहीं है।
जंतर-मंतर पर बच्चे खुश
जंतर-मंतर के प्रोटेस्ट साइट पर मौजूद एक छात्रा ने कहा, “अनशन रंग लाया है। हम खुश हैं कि बच्चों के द्वारा लाठी खाने और इतना प्रोटेस्ट करने के बाद किसी ने तो जिम्मेदारी ले ली है।” एक प्रदर्शनकारी छात्र ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हम इस बात की तारीफ करते हैं कि कम से कम शिक्षा मंत्री ने माना कि उनसे कोई गलती हुई है और अपनी जिम्मेदारी ली है।” एक अन्य छात्र ने कहा, “यह देश और छात्रों के लिए बहुत बड़ी बात है कि अब भविष्य में कोई भी मंत्री गलती करेगा, तो वो डरेंगे कि छात्र एकजुट हो सकते हैं। छात्रों के फ्यूचर के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होगा। छात्रों के भविष्य के लिए यह बहुत प्रेरणादायक होगा।” एक छात्रा ने कहा, “देश के लिए इससे अच्छी कोई चीज हो ही नहीं सकती है। प्रोटेस्ट का फाइनल डिमांड यही था। मेरे हिसाब से सोनम वांगचुक ने अपनी तरफ से एंड कर दिया है, अभिजीत दीपके की भी फाइनल डिमांड पूरी हो चुकी है।” छात्र ने आगे कहा कि धर्मेंद्र प्रधान की वजह से ही पूरा प्रोटेस्ट हो रहा था। अगर मांग पूरी हो चुकी है और सरकार ने जिम्मेदारी ले है, तो यह प्रोटेस्ट सफल है।

ऐसे शुरू हुआ सीजेपी का सफर
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का आंदोलन मूल रूप से एक व्यंग्य और मजाक से शुरू हुआ था। इस आंदोलन की शुरुआत तब हुई, जब भारत के चीफ जस्टिस ने सरकार के आलोचकों और बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवी से कर दी थी। इसके बाद अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पूछा, “क्या होगा अगर सभी कॉकरोच एक साथ आ जाएं?” इसके तुरंत बाद दीपके ने लोगों को जोड़ने के लिए एक वेबसाइट बनाई और उनके इंस्टाग्राम पेज पर लाखों फॉलोअर्स जुड़ गए। देखते ही देखते फॉलोअर्स की ये संख्या देश की सबसे बड़ी पार्टियों- भाजपा और कांग्रेस से भी ज्यादा हो गई। तब सीजेपी ने अपने पेज पर कई मांगें रखी थीं। इनमें बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, नेताओं के लगातार दल-बदल और अन्य मुद्दों को जोर-शोर से उठाया गया। अभियान को जमीनी स्तर के आंदोलन में बदलने के लिए दीपके जून में अमेरिका से नई दिल्ली आए। इसके बाद सीजेपी का यह आंदोलन शुरू हुआ। इस प्रदर्शन को जोर तब मिला, जब हाल ही में हुए परीक्षा पेपर लीक, तकनीकी खामियों और रद्द हुई परीक्षाओं के विरोध में और मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ धीरे-धीरे युवा इससे जुड़ने लगे। इसके बाद सीजेपी और दीपके ने नीट पेपर लीक को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करने की मांग की।
सोनम वांगचुक को उठाने से मचा बवाल
इस आंदोलन में अचानक तब उबाल आ गया, जब बीते शनिवार को दिल्ली पुलिस ने वांगचुक की बिगड़ती सेहत और अदालत के आदेश का हवाला देते हुए उन्हें जंतर-मंतर से जबरन हटा दिया और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कर दिया। वांगचुक की पत्नी- गीतांजलि जे अंगमो ने पुलिस की इस कार्रवाई को अवैध हिरासत करार दिया।
धर्मेंद्र प्रधान की चिट्ठी की 5 मुख्य बातें
युवाओं को संदेश- प्रधान ने लिखा कि मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है।
परीक्षा पर संज्ञान- 3 मई की नीट परीक्षा में अनियमितता पर सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया और सीबीआई को जांच को सौंपी। परीक्षा को रद्द किया। अगले साल की नीट परीक्षा ऑनलाइन होगी।
जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा- पहले दिन से ही इस पर जिम्मेदारी ली। मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य खराब नहीं होने देंगे।
संतोषजनक रहे परिणाम- 16 जुलाई को जारी हुए नीट के रिजल्ट संतोषजनक रहे जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली।
10 दिनों से मन दुखी है- पिछले 10 दिनों से हो रही घटनाओं को लेकर मन दुखी था। देश के युवाओं के भविष्य को देखते हुए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया।
क्या बोले प्रधान?
जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को लेकर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वहां पर जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें फायदा न उठा सकें। देश की एकता बनी रहे, भारत का एक भी छात्र का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फोकस करें। इस बात पर विचार करते हुए मैंने इस्तीफा दे दिया है।
8 साल में दूसरी बार मंत्री का इस्तीफा
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अपने आप में दुर्लभ घटना है जब विवाद के कारण मोदी सरकार में किसी मंत्री ने इस्तीफा दिया हो। इससे पहले 17 अक्तूबर, 2018 में विवाद की वजह से ही एमजे अकबर को विदेश राज्य मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इस्तीफा देने के बाद, प्रधान ने कहा कि उन्होंने नीट पेपर लीक की पूरी जिम्मेदारी ली और कभी भी स्थिति से मुंह नहीं मोड़ा, लेकिन जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने बाधाएं पैदा करने और छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की।
क्या चिट्ठी भर से छूट जाएगा मंत्री पद?
राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या सिर्फ एक पत्र या सार्वजनिक घोषणा से मंत्री पद कानूनी रूप से समाप्त हो जाता है? भारतीय संविधान के अनुसार किसी भी केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा सिर्फ प्रधानमंत्री को पत्र सौंपने या सोशल मीडिया पर घोषणा करने मात्र से तुरंत प्रभावी नहीं होता है। जब तक राष्ट्रपति इसे स्वीकार कर आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं करते, तब तक मंत्री कानूनी रूप से अपने पद पर बने रहते हैं। मंत्री पद से हटने की पूरी संवैधानिक प्रक्रिया भारतीय संविधान और संसदीय नियमों के अनुसार, किसी मंत्री के इस्तीफे की प्रक्रिया चार प्रमुख चरणों से गुजरती है।
1. पीएम को भेजा जाता है इस्तीफा
संविधान के अनुसार मंत्रिपरिषद का प्रमुख प्रधानमंत्री होता है, इसलिए कोई भी मंत्री अपना इस्तीफा सीधे राष्ट्रपति को न भेजकर पहले प्रधानमंत्री को सौंपता है। इस्तीफा मिलने के बाद प्रधानमंत्री यह तय करते हैं कि उसे स्वीकार करना है या नहीं। यदि प्रधानमंत्री इस्तीफे को मंजूरी देते हैं, तो वे इसे अपनी औपचारिक सिफारिश के साथ राष्ट्रपति के पास भेजते हैं।
2. कैबिनेट सचिवालय अधिसूचना जारी करता है
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय द्वारा भारत के राजपत्र में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाती है। इस गजट नोटिफिकेशन के प्रकाशन के बाद ही कानूनी रूप से मंत्री का पद खाली माना जाता है। हालांकि यह शक्ति राष्ट्रपति के नाम पर होती है, लेकिन इसका वास्तविक उपयोग प्रधानमंत्री की सलाह पर किया जाता है।
किसने क्या कहा-
अब इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है- राहुल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारे एजुकेशन सिस्टम को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है, शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है, सड़कों पर आ कर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डट कर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई, 2 मांगें अभी भी बाकी हैं – प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफ़ी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो, ये समाज के दूसरे वर्गों किसानों, मजदूरों, गरीबों, हर वो व्यक्ति जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है, अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है, इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है, डरो मत!शनिवार को आंदोलन करने वाले छात्रों के एक समूह के साथ मीडिया से बात करते हुए कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं, पीएम मोदी अतीत हैं, और अतीत कभी भविष्य का मुकाबला नहीं कर सकता। राहुल गांधी ने दिल्ली में 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए पुलिस कार्रवाई के लिए जवाबदेही की मांग करते हुए कहा, ‘इसका आदेश देने वाले और इसको अमल करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और उनको सजा होनी चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘वे (युवा) भारत का भविष्य हैं और कोई उनसे लड़ नहीं सकता। नरेंद्र मोदी भारत का अतीत हैं; अतीत कभी भविष्य से नहीं लड़ सकता।’
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत बताया है।
अखिलेश यादव बोले- यह देश के युवाओं की ऐतिहासिक जीत
अखिलेश यादव ने इसे देश की युवा पीढ़ी और छात्रों के संघर्ष की एक बड़ी लोकतांत्रिक जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक युवाओं ने जिस तरह से एकजुट होकर आवाज उठाई, उसी दबाव के बीजेपी सरकार को झुकना पड़ा है। सपा प्रमुख ने कहा कि अब समय आ गया है जब सरकार को प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक के पूरे शिक्षा ढांचे की समीक्षा करनी चाहिए। परीक्षाओं में बार-बार हो रही धांधली और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए एक पारदर्शी और पुख्ता व्यवस्था बनाना बेहद जरूरी है। अखिलेश यादव ने जोर देकर कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से सभी राजनीतिक दलों को सबक लेना चाहिए और भविष्य में युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों व रोजगार के नए अवसर पैदा करने को प्राथमिकता देनी चाहिए।
बिहार बीजेपी के नेता और मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा, “शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों का मूल्यांकन तत्काल नहीं, बल्कि समय के साथ होता है। माननीय श्री धर्मेंद्र प्रधान जी का योगदान भी आने वाले वर्षों में और अधिक स्पष्ट रूप से सामने आएगा।”
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष ने इसे छात्र आंदोलन की बड़ी जीत बताया है।
आम आदमी पार्टी (AAP) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “युवाओं की जीत। अहंकारी प्रधानमंत्री और सरकार को झुकना पड़ा।” पार्टी ने दावा किया कि देशभर के छात्रों के लगातार आंदोलन और बढ़ते जनदबाव के कारण सरकार को यह फैसला लेना पड़ा।
सुप्रिया सुले ने कहा, “शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा शांति से प्रदर्शन करने वालों, छात्रों और विपक्ष के लगातार दबाव के बाद आया है। मैं हर उस प्रदर्शनकारी को बधाई देता हूं जो NEET-UG मुद्दे पर डटे रहे।
शशि थरूर ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “एजुकेशन मिनिस्टर का इस्तीफ़ा इस बात को मानना है कि डेमोक्रेसी में अकाउंटेबिलिटी से हमेशा के लिए बचा नहीं जा सकता। यह देश भर के स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और नागरिकों की कई हफ़्तों से पक्के इरादे और शांति से उठाई गई आवाज़ों के बाद आया है, जिन्होंने नज़रअंदाज़ होने से मना कर दिया था।”
राजीव शुक्ला ने कहा, “मैं एजुकेशन मिनिस्टर के इस्तीफे का स्वागत करता हूं। यह भारत के स्टूडेंट्स, भारत के युवाओं और विपक्ष की एकता की जीत है।




