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- 2021 से 2024 तक की योजनाओं की जांच कराने की मांग, शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
- कंपोजिट विद्यालय ठेकहा प्रकरण: जांच पूरी, नोटिस जारी, लेकिन अंतिम कार्रवाई का इंतजार
- सवालों के घेरे में विभागीय प्रक्रिया: एमडीएम, कंपोजिट ग्रांट, डीबीटी, एसएमसी और नामांकन को लेकर शिकायतें
- जांच के बाद भी कार्रवाई लंबित होने का दावा

शहाबगंज (चंदौली)। शहाबगंज विकासखंड के कंपोजिट विद्यालय ठेकहा से जुड़ा कथित अनियमितताओं का मामला एक बार फिर चर्चा में है। विद्यालय में मध्याह्न भोजन (एमडीएम), कंपोजिट ग्रांट, स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, डीबीटी, विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी), छात्र नामांकन तथा विद्यालय संचालन से जुड़ी शिकायतों पर विभागीय जांच किए जाने के बाद भी अंतिम कार्रवाई सार्वजनिक न होने को लेकर शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच प्रक्रिया

शिकायतकर्ताओं के अनुसार 16 मई 2026 को मामले के सार्वजनिक होने के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने शिकायतों का संज्ञान लिया और जांच के निर्देश दिए। इसके बाद 14 जुलाई 2026 को खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा विद्यालय का निरीक्षण किया गया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि निरीक्षण के दौरान विद्यालय के अभिलेखों, व्यवस्थाओं तथा शिकायतों से संबंधित बिंदुओं की समीक्षा की गई और जांच रिपोर्ट जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेजी गई।
स्पष्टीकरण मांगे जाने का दावा
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से प्रधानाध्यापक को तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का नोटिस जारी किया गया। उनका आरोप है कि निर्धारित अवधि बीतने के बावजूद न तो स्पष्टीकरण सार्वजनिक हुआ और न ही अंतिम विभागीय कार्रवाई की जानकारी सामने आई।
इसी कारण पूरे मामले में विभागीय प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
कंपोजिट ग्रांट और अन्य मदों के व्यय पर उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2021 से 2024 के दौरान कंपोजिट ग्रांट, खेल सामग्री, यूथ क्लब, इको क्लब, स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब तथा अन्य मदों में प्राप्त धनराशि के उपयोग की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उनका कहना है कि खरीद संबंधी बिल, स्टॉक रजिस्टर, भुगतान अभिलेख तथा अन्य वित्तीय रिकॉर्ड का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाना चाहिए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि धनराशि का उपयोग नियमानुसार हुआ या नहीं।
मध्याह्न भोजन योजना पर भी सवाल
मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना को लेकर भी कई शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि भोजन वितरण, दूध वितरण तथा निर्धारित मेन्यू के पालन में अनियमितताएं हुईं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विद्यालय में गैस सिलेंडर उपलब्ध होने के बावजूद कई बार भोजन लकड़ी और उपलों पर तैयार कराया गया। इन आरोपों की पुष्टि विभागीय जांच के अंतिम निष्कर्ष के बाद ही हो सकेगी।
विद्यालय संचालन और शिक्षण व्यवस्था पर शिकायतें
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रधानाध्यापक के समय से विद्यालय न पहुंचने, निर्धारित समय से पहले विद्यालय बंद करने तथा शिक्षण कार्य प्रभावित होने की शिकायतें भी जांच का हिस्सा बनीं।
विद्यालय परिसर में पान-गुटखा सेवन तथा साफ-सफाई की स्थिति को लेकर भी शिकायतें दर्ज कराई गईं। इसके अलावा छोटे बच्चों से भोजन के बाद बर्तन धुलवाए जाने का आरोप भी लगाया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
एसएमसी और डीबीटी व्यवस्था पर भी उठे प्रश्न
विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) की बैठकों को लेकर भी शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कई बैठकें केवल कागजों में दर्शाई गईं और वास्तविक सहभागिता नहीं हुई।
डीबीटी, छात्रवृत्ति, ड्रेस, बैग, जूते तथा अन्य लाभार्थी योजनाओं के भुगतान और पात्र छात्रों के चयन को लेकर भी अभिलेखों के सत्यापन की मांग की गई है।
नामांकन और उपस्थिति की जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि वर्ष 2021 से 2024 के बीच छात्र नामांकन, उपस्थिति रजिस्टर, आधार सत्यापन तथा प्रेरणा पोर्टल के रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि सभी प्रविष्टियां वास्तविक थीं या नहीं।
कार्रवाई में देरी पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच पूरी हो चुकी है और स्पष्टीकरण भी मांगा जा चुका है, तो विभाग को समयबद्ध ढंग से अंतिम निर्णय लेकर उसे सार्वजनिक करना चाहिए। उनका मानना है कि लंबित मामलों से भ्रम की स्थिति पैदा होती है और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी प्रश्न उठते हैं।
शिकायतकर्ताओं की प्रमुख मांगें
जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।
स्पष्टीकरण की प्रक्रिया पूरी कर समयबद्ध अंतिम निर्णय लिया जाए।
यदि अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
यदि आरोप सही नहीं पाए जाते हैं तो इसकी भी आधिकारिक जानकारी जारी की जाए।
भविष्य में विद्यालयों की नियमित निगरानी और सामाजिक ऑडिट की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
संबंधित पक्ष का पक्ष
समाचार तैयार किए जाने तक संबंधित प्रधानाध्यापक, खंड शिक्षा अधिकारी तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का विस्तृत आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समान प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाना चाहिए ताकि पाठकों के सामने मामले के सभी पक्ष उपलब्ध हो सकें।
कंपोजिट विद्यालय ठेकहा का यह मामला फिलहाल विभागीय जांच और शिकायतकर्ताओं के दावों के बीच लंबित है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच और नोटिस की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, जब तक सक्षम प्राधिकारी अंतिम निष्कर्ष जारी नहीं करता, तब तक शिकायतों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। ऐसे मामलों में पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई ही जनविश्वास बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम मानी जाती है।




