सूबे के पुलिस प्रमुख राजीव कृष्ण का फरमान , कांवड़ यात्रा पर छोटी से छोटी बातों पर रखे ध्यान
छोटी घटना भी बन सकती है बड़ी चुनौती, कांवड़ यात्रा में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई तय

- बरेली पहुंचे डीजीपी राजीव कृष्ण ने अधिकारियों को दिया स्पष्ट संदेश
- हर घटना को गंभीरता से लेंव्यवहारिक प्रशिक्षण और त्वरित संवाद पर जोर

बरेली। कांवड़ यात्रा जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में कानून-व्यवस्था बनाए रखना केवल पुलिस बल की संख्या और सुरक्षा इंतजामों का विषय नहीं है, बल्कि हर स्तर पर सतर्कता, संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय और प्रभावी संवाद की परीक्षा भी है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने बरेली में कांवड़ यात्रा की तैयारियों और कानून-व्यवस्था की समीक्षा करते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि यात्रा के दौरान होने वाली किसी भी छोटी घटना को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। सामान्य दिनों में मामूली दिखाई देने वाली घटना भी कांवड़ यात्रा के दौरान गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए हर सूचना और हर घटनाक्रम पर पुलिस-प्रशासन की तत्काल प्रतिक्रिया जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदारी में चूक होने पर कार्रवाई तय है।
दोनों मंडलों की समीक्षा बैठक के बाद पुलिस लाइंस पहुंचे डीजीपी ने कांवड़ यात्रा की तैयारियों को जमीन पर प्रभावी बनाने के लिए अधिकारियों को केवल ब्रीफिंग तक सीमित रहने के बजाय व्यवहारिक प्रशिक्षण देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को यह स्पष्ट रूप से समझाया जाना चाहिए कि स्थानीय परिस्थितियां क्या हैं, संभावित घटनाएं किस प्रकार की हो सकती हैं और विपरीत परिस्थिति उत्पन्न होने पर संबंधित कर्मचारी को तत्काल क्या कदम उठाना है। उनका जोर इस बात पर था कि प्रत्येक पुलिसकर्मी अपने दायित्व को समझने के साथ मौके पर परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने में सक्षम हो।
डीजीपी ने कहा कि बड़े आयोजनों की सफलता में संवाद, प्रशिक्षण और त्वरित संचार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी घटना की सूचना समय से मिले, संबंधित कर्मचारी स्थिति को समझे और बिना भ्रम के तत्काल निर्णय ले सके तो बड़ी चुनौती को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सकता है। इसके विपरीत छोटी घटना की अनदेखी या प्रतिक्रिया में देरी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। सर्किट हाउस में समीक्षा बैठक के बाद डीजीपी राजीव कृष्ण पुलिस लाइंस पहुंचे। यहां उन्होंने सबसे पहले बास्केटबाल कोर्ट का उद्घाटन किया। इसके बाद जोनल कांवड़ कंट्रोल रूम का फीता काटकर शुभारंभ किया। उन्होंने कंट्रोल रूम में उपलब्ध व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। इस दौरान एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली और वहां से पूरे जोन में कांवड़ यात्रा की निगरानी की व्यवस्था के संबंध में जानकारी दी।

छोटी घटना को भी गंभीरता से लेने का संदेश
समीक्षा बैठक में डीजीपी राजीव कृष्ण ने सबसे अधिक जोर कांवड़ यात्रा के दौरान छोटी घटनाओं को नजरअंदाज नहीं करने पर दिया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि कांवड़ यात्रा सामान्य दिनों की तरह नहीं होती। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी, संवेदनशील मार्ग, यातायात का दबाव और स्थानीय परिस्थितियों के कारण मामूली घटना भी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन को हर घटना के प्रति संवेदनशील रहना होगा। किसी सूचना को यह मानकर टालना उचित नहीं होगा कि यह छोटी घटना है और अपने आप समाप्त हो जाएगी। पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह घटनाक्रम को शुरुआती स्तर पर ही समझे और आवश्यक कार्रवाई करे।
ब्रीफिंग से आगे बढ़कर व्यवहारिक प्रशिक्षण
डीजीपी ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की तैयारी को केवल ब्रीफिंग तक सीमित नहीं रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पुलिसकर्मी को व्यवहारिक प्रशिक्षण मिलना चाहिए, ताकि वह केवल निर्देश सुनने वाला कर्मचारी न रहे, बल्कि मौके पर परिस्थिति को समझकर उचित निर्णय लेने में सक्षम हो।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कर्मचारियों को स्थानीय परिस्थितियों, संभावित घटनाओं और आपात स्थिति में उठाए जाने वाले कदमों के बारे में विस्तार से समझाया जाए। इससे किसी अप्रत्याशित परिस्थिति में पुलिसकर्मी भ्रमित होने के बजाय तत्काल निर्णय ले सकेगा।
संवाद और त्वरित संचार पर विशेष जोर
राजीव कृष्ण ने कहा कि बड़े आयोजनों के दौरान संवाद, प्रशिक्षण और त्वरित संचार सफलता के सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं। किसी घटना की सूचना यदि समय पर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचे और वहां से तत्काल प्रतिक्रिया हो तो स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को आपसी समन्वय मजबूत रखने का संदेश दिया। स्थानीय स्तर पर तैनात पुलिसकर्मियों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक सूचना का प्रवाह तेज और स्पष्ट होना चाहिए।
जोनल कांवड़ कंट्रोल रूम से होगी निगरानी
पुलिस लाइंस में डीजीपी राजीव कृष्ण ने जोनल कांवड़ कंट्रोल रूम का उद्घाटन किया। उन्होंने कंट्रोल रूम में उपलब्ध व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और उसकी कार्यप्रणाली की जानकारी ली। एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने डीजीपी को कंट्रोल रूम की व्यवस्थाओं के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कंट्रोल रूम के माध्यम से पूरे जोन में कांवड़ियों की गतिविधियों और यात्रा व्यवस्था की निगरानी की जा सकती है। कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी संभावित चुनौती पर नजर रखने और आवश्यकता के अनुसार संबंधित अधिकारियों तक सूचना पहुंचाने में कंट्रोल रूम की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। इसका उद्देश्य निगरानी व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है।
पुलिस लाइंस में बास्केटबाल कोर्ट और संकल्प सभागार का उद्घाटन
डीजीपी ने पुलिस लाइंस पहुंचने के बाद सबसे पहले बास्केटबाल कोर्ट का उद्घाटन किया। इसके बाद जोनल कांवड़ कंट्रोल रूम का शुभारंभ किया गया। कंट्रोल रूम के निरीक्षण के बाद उन्होंने पुलिस लाइंस के संकल्प सभागार का भी उद्घाटन किया। संकल्प सभागार में डीजीपी ने एडीजी रमित शर्मा, दोनों परिक्षेत्रों के अधिकारियों और सभी नौ जिलों के एसएसपी के साथ बैठक की। इस बैठक में कांवड़ यात्रा की तैयारियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े विषयों पर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
नौ जिलों के एसएसपी के साथ समीक्षा
पुलिस लाइंस स्थित संकल्प सभागार में हुई बैठक में सभी नौ जिलों के एसएसपी के साथ समीक्षा की गई। डीजीपी ने अधिकारियों से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तैयारियों को प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में तैनात पुलिसकर्मी को अपने क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों की जानकारी होनी चाहिए।
सेवानिवृत्त पुलिस कर्मियों के लिए डिजिटल पहल
डीजीपी राजीव कृष्ण ने जोनल कार्यालय में सेवानिवृत्त पुलिस पोर्टल का भी शुभारंभ किया। उन्होंने पोर्टल की कार्यप्रणाली और उद्देश्य की जानकारी ली तथा इसकी सराहना की। एडीजी रमित शर्मा ने बताया कि यह बरेली जोन की ओर से तैयार किया गया केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफार्म है। इसका उद्देश्य सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों और उनके आश्रितों के साथ विभाग का नियमित संपर्क और संवाद बनाए रखना है। पोर्टल के माध्यम से सेवानिवृत्त कर्मियों की समस्याओं और आवश्यकताओं को प्राथमिकता के आधार पर दर्ज कर उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है।
स्वास्थ्य, पेंशन और सुरक्षा समस्याओं के समाधान की व्यवस्था
एडीजी रमित शर्मा के अनुसार पोर्टल के माध्यम से प्रत्येक थाना और जिला निर्धारित अवधि पर सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों से संपर्क कर उनका विवरण दर्ज कर सकेगा। इससे विभाग के पास सेवानिवृत्त कर्मियों से जुड़ी आवश्यक जानकारी उपलब्ध रहेगी और उनकी समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी। स्वास्थ्य, पेंशन, सुरक्षा और परिवार से जुड़ी समस्याओं के त्वरित एवं प्राथमिकता आधारित निस्तारण की व्यवस्था पोर्टल पर उपलब्ध होगी।
लापरवाही पर कार्रवाई का साफ संदेश
डीजीपी राजीव कृष्ण के दौरे और समीक्षा बैठक का सबसे स्पष्ट संदेश यही रहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को यह समझाने की कोशिश की कि बड़ी चुनौती हमेशा बड़ी घटना से नहीं आती; कई बार छोटी घटना को समय रहते गंभीरता से न लेना ही बड़ी समस्या की वजह बन जाता है। इसलिए पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण, अधिकारियों के बीच संवाद, सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान और मौके पर तत्काल निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करना जरूरी है। डीजीपी ने इसी समन्वित व्यवस्था पर जोर देते हुए अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ काम करने का निर्देश दिया। कांवड़ यात्रा की तैयारियों के बीच डीजीपी का यह दौरा पुलिस व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और त्वरित बनाने के संदेश के रूप में सामने आया। साफ है कि इस बार पुलिस-प्रशासन का फोकस केवल बड़ी घटनाओं को रोकने पर नहीं, बल्कि हर छोटी सूचना को समय रहते समझने, उसकी गंभीरता का आकलन करने और जरूरत पड़ते ही तत्काल कार्रवाई करने पर रहेगा।
* कांवड़ यात्रा में छोटी घटना को भी सामान्य मानकर न चलें।
* लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारी, कर्मचारी पर कार्रवाई तय।
*केवल ब्रीफिंग नहीं, पुलिसकर्मियों को दिया जाए व्यवहारिक प्रशिक्षण।
* विपरीत परिस्थितियों में मौके पर निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने पर जोर।
* संवाद, प्रशिक्षण और त्वरित संचार को बताया सफलता की कुंजी।
* जोनल कांवड़ कंट्रोल रूम का डीजीपी ने किया उद्घाटन।
* कंट्रोल रूम से पूरे जोन में कांवड़ियों की निगरानी की व्यवस्था।
* सेवानिवृत्त पुलिस कर्मियों के लिए केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल का शुभारंभ।
* स्वास्थ्य, पेंशन, सुरक्षा और पारिवारिक समस्याओं के समयबद्ध समाधान का लक्ष्य।
* आपात स्थिति में सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों से तत्काल संपर्क की व्यवस्था।




