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फेक न्यूज पर सूबे के पुलिस प्रमुख राजीव कृष्ण करेंगे खुद निगरानी,आपत्तिजनक पोस्ट पर याद दिला देंगे नानी

फेक न्यूज पर पुलिस की पैनी नजर, अपराध पर जीरो टॉलरेंस को जमीन पर उतारने की तैयारी

  • डीजीपी राजीव कृष्ण ने अपराध समीक्षा में दिए सख्त निर्देश
  • गलत और भ्रामक कंटेंट पर तत्काल सत्यापन, टेकडाउन और वैधानिक कार्रवाई
  • लूट, डकैती, महिला अपराध और संगठित अपराधों की रोजाना होगी समीक्षा
  • 60 और 90 दिन से लंबित विवेचनाओं पर अधिकारियों की सीधी निगरानी
  • संवेदनशील इलाकों में बढ़ेगी पुलिस की मौजूदगी
  • ‘यक्ष’ ऐप में अपराधियों का पूरा इतिहास दर्ज करने पर जोर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस अब सोशल मीडिया पर फैलने वाली फर्जी और भ्रामक सूचनाओं पर और अधिक पैनी नजर रखेगी। गलत खबर, भ्रामक सूचना अथवा जानबूझकर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रसारित करने वाले कंटेंट की तत्काल निगरानी, सत्यापन और नियमानुसार टेकडाउन की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही ऐसे कंटेंट के पीछे जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई भी सुनिश्चित होगी। मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय अपराध समीक्षा बैठक में डीजीपी राजीव कृष्ण ने मातहत अधिकारियों को यह स्पष्ट निर्देश दिए। डीजीपी ने कहा कि अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति केवल नारा नहीं, बल्कि प्रदेश पुलिस की कार्यशैली का हिस्सा बननी चाहिए। इसके लिए प्राथमिकता वाले अपराधों और संगठित अपराधों की जिले से लेकर रेंज और जोन स्तर तक नियमित समीक्षा करने तथा महत्वपूर्ण मामलों में तथ्यों के आधार पर समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, लंबित विवेचनाओं, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, मिशन शक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की भी समीक्षा की गई। राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेसवे और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की दृश्यता बढ़ाने, स्टंटबाजी और खतरनाक ड्राइविंग पर कार्रवाई तथा महिलाओं और बालिकाओं से जुड़े मामलों में पुलिस की संवेदनशीलता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। डीजीपी का संदेश साफ रहा अपराध हो या अफवाह, लापरवाही के लिए पुलिस तंत्र में जगह नहीं होगी।

अपराध समीक्षा में डीजीपी का सख्त संदेश

पुलिस मुख्यालय में मंगलवार को आयोजित उच्चस्तरीय अपराध समीक्षा बैठक में प्रदेश के सभी जोनल अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त, परिक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस उपमहानिरीक्षक, एसएसपी, एसपी, अपर पुलिस अधीक्षक और क्षेत्राधिकारी ऑनलाइन जुड़े। बैठक में डीजीपी राजीव कृष्ण ने अधिकारियों को अपराध नियंत्रण के साथ-साथ पुलिसिंग की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष जोर दिया।कहा कि जीरो टॉलरेंस की नीति का मतलब केवल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि प्रत्येक महत्वपूर्ण मामले में तथ्यपरक, निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना भी है। डीजीपी ने प्राथमिकता वाले अपराधों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए और कहा कि जिले, रेंज तथा जोन स्तर पर प्रभावी मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित कर नियमित समीक्षा की जाए।

सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों की निगरानी

बैठक में सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने वाली फर्जी और भ्रामक सूचनाओं को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया। डीजीपी ने निर्देश दिया कि प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और विशेष रूप से सोशल मीडिया पर प्रसारित सूचनाओं की लगातार मॉनिटरिंग की जाए। किसी संदिग्ध सूचना के सामने आने पर उसका तत्काल सत्यापन कराया जाए। यदि कोई सामग्री गलत, भ्रामक या जानबूझकर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने वाली पाई जाती है तो नियमानुसार उसे टेकडाउन कराने की कार्रवाई की जाए। साथ ही पोस्ट करने वाले व्यक्ति की भूमिका और सामग्री की प्रकृति के आधार पर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। इसका उद्देश्य केवल सोशल मीडिया पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अफवाहों के कारण कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति को रोकना भी है। एक गलत सूचना कई बार वास्तविक घटना से ज्यादा तेजी से फैलती है। इसलिए पुलिस की चुनौती अपराधियों के साथ-साथ डिजिटल अफवाह तंत्र से निपटने की भी है।

लूट से गो-तस्करी तक, प्राथमिकता वाले अपराधों पर नजर

डीजीपी ने लूट, डकैती, छिनैती, वाहन चोरी, महिला संबंधी अपराध, धर्म परिवर्तन अथवा पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज संवेदनशील मामलों, गोवध और गो-तस्करी जैसे मामलों पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। महत्वपूर्ण मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया गया। निर्देश दिया कि अपराध की सूचना मिलने से लेकर विवेचना और कार्रवाई तक प्रत्येक स्तर पर समयबद्धता दिखाई दे। केवल मुकदमा दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्रभावी विवेचना और उसके परिणाम की भी समीक्षा की जाएगी। डीजीपी ने यह भी कहा कि प्राथमिकता वाले और बार-बार सामने आने वाले अपराधों की लगातार मॉनिटरिंग की जाए, ताकि अपराध की प्रवृत्ति को समय रहते पहचाना जा सके।

संवेदनशील स्थानों की पहचान कर पर्याप्त बल तैनात करने के निर्देश

संवेदनशील स्थानों की पहचान कर पर्याप्त बल तैनात करने का निर्देश दिया। प्रमुख स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने के साथ प्रभावी पेट्रोलिंग पर जोर दिया गया। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों तथा एक्सप्रेस-वे पर पुलिस की दृश्यता और गश्त बढ़ाने को कहा गया। मोटरसाइकिलों और अन्य वाहनों से होने वाली स्टंटबाजी तथा तेज और खतरनाक ड्राइविंग के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। स्थानीय पुलिस को अपने-अपने क्षेत्रों में संवेदनशील स्थानों की पहचान कर पहले से सुरक्षा योजना तैयार करने को कहा गया है।

60 से 90 दिन पुरानी विवेचनाएं अब रोज होंगी मॉनिटर

लंबित विवेचनाओं के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए पुलिस मुख्यालय द्वारा विकसित केस डायरी मॉनिटरिंग डैशबोर्ड पोर्टल की भी समीक्षा की गई। डीजीपी ने सभी क्षेत्राधिकारियों और सहायक पुलिस आयुक्तों को निर्देश दिया कि 60 और 90 दिन से अधिक समय से लंबित विवेचनाओं की रोजाना पोर्टल के माध्यम से समीक्षा की जाए। इसका उद्देश्य लंबे समय से लंबित मामलों को चिन्हित कर उनकी विवेचना में आ रही बाधाओं को दूर करना और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करना है। पोर्टल की समीक्षा के आधार पर उत्कृष्ट पर्यवेक्षण करने वाले नौ अधिकारियों के कार्य की सराहना भी की गई। संबंधित पुलिस आयुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को इन अधिकारियों को प्रशस्ति-पत्र देने के निर्देश दिए गए। इनमें हाथरस के सीओ नगर हिमांशु माथुर, कासगंज के सीओ पटियाली अमित कुमार, बलिया के सीओ बांसडीह जयशंकर मिश्र, सिद्धार्थनगर के सीओ बांसी सुबेंदु सिंह, प्रतापगढ़ के सीओ नगर आशुतोष मिश्रा, सोनभद्र के सीओ नगर रणधीर कुमार मिश्रा, गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट की एसीपी प्रथम सेंट्रल दीक्षा सिंह, अयोध्या के सीओ नगर श्रीपथ त्रिपाठी और प्रतापगढ़ के सीओ पट्टी प्रदीप सिंह शामिल हैं।

‘यक्ष’ ऐप में अपराधियों का पूरा इतिहास होगा दर्ज

डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ‘यक्ष’ ऐप में अपराधियों का पूरा और सही आपराधिक इतिहास दर्ज किया जाए। कहा कि अपराधियों से संबंधित डाटा को नियमित रूप से अपडेट किया जाना जरूरी है। सही और अद्यतन आपराधिक रिकॉर्ड पुलिस को सक्रिय अपराधियों की पहचान करने तथा उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में मदद करेगा। अपराध नियंत्रण की रणनीति में डाटा की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पुलिस रिकॉर्ड में किसी प्रकार की त्रुटि या अधूरा विवरण कार्रवाई की दिशा को प्रभावित कर सकता है। डीजीपी ने अधिकारियों से अपेक्षा की कि तकनीकी संसाधनों का उपयोग केवल रिकॉर्ड रखने के लिए नहीं, बल्कि अपराध नियंत्रण की रणनीति बनाने में भी किया जाए।

मिशन शक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली पर भी नजर

बैठक में मिशन शक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई। डीजीपी ने कहा कि इन केंद्रों में तैनात पुलिस कर्मियों को उनके दायित्वों के साथ विशेष रूप से महिलाओं और बालिकाओं के प्रति संवेदनशील व्यवहार का बेहतर प्रशिक्षण दिया जाए। रेंज और जिले स्तर पर मिशन शक्ति केंद्रों की नियमित समीक्षा की जाएगी। केंद्रों की कार्यक्षमता, कार्य-विभाजन और फील्ड स्तर पर प्रभाव शीलता में सुधार के लिए स्थानीय जरूरतों के अनुसार नए प्रयोग करने के निर्देश दिए। महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि पीड़ित के साथ पुलिस के व्यवहार को भी महत्वपूर्ण माना गया।

● फेक न्यूज पर तत्काल सत्यापन और नियमानुसार टेकडाउन
● गलत सूचना फैलाने वालों पर वैधानिक कार्रवाई
● अपराध की जिले, रेंज और जोन स्तर पर नियमित समीक्षा
● लूट, डकैती, छिनैती और महिला अपराध पर विशेष निगरानी
● संवेदनशील मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी
● 60 से 90 दिन से लंबित विवेचनाओं की रोजाना समीक्षा
● राजमार्ग और एक्सप्रेसवे पर बढ़ेगी पुलिस पेट्रोलिंग
● स्टंटबाजी और खतरनाक ड्राइविंग पर सख्ती
● मिशन शक्ति केंद्रों के पुलिसकर्मियों को बेहतर प्रशिक्षण
● ‘यक्ष’ ऐप में अपराधियों का अपडेटेड आपराधिक इतिहास दर्ज होगा
● उत्कृष्ट पर्यवेक्षण करने वाले नौ सीओ, एसीपी होंगे सम्मानित

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