अयोध्या, बद्रीनाथ के बाद अब वैष्णो देवी में भी गड़बड़ घोटाला, 550 की नकली चांदी का नया बवेला
कोर्ट से सारे रिकॉर्ड मांगे, मामले को रफा-दफा करने की तैयारी

- शिकायत के बावजूद जम्मू-कश्मीर के क्राइम ब्रांच ने मुंह फेरा, एफआईआर दर्ज नहीं की
- किसी को नहीं मालूम कि नकली चांदी आई कहां से?
- जब मंदिर की चांदी की जांच करवाई गई, तब जाकर भेद खुला
- अयोध्या में चढ़ावा चोरी की जांच पूरी, रिपोर्ट में चंपत और टिन्नू को दोषी माना

कटरा/ अयोध्या/ देहरादून। पहले अयोध्या, फिर बद्रीनाथ धाम और अब जम्मू में माता वैष्णो देवी का मंदिर। लगता है पूरे भारत के बड़े मंदिरों और तीर्थ स्थलों में भक्तों के दान को चोरी करने का सिलसिला चल पड़ा है। आरोप है कि माता वैष्णो देवी में चढ़ाई गई चांदी में भारी मिलावट की गई है। जब करीब 20 टन चांदी को पिघलाने के लिए सरकारी मिंट भेजा गया, तो जांच में पता चला कि इसमें से 530 करोड़ रुपये की चांदी पूरी तरह से नकली है। 550 करोड़ की इस चांदी में सिर्फ 5 से 6 प्रतिशत ही असली चांदी पाई गई, बाकी हिस्सा कैडमियम और लोहे का निकला है। इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है। क्राइम ब्रांच में शिकायत के बावजूद जब पुलिस में एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तो मामला जम्मू कोर्ट पहुंच गया। अब कोर्ट ने जांच अधिकारी को 29 जुलाई को सारे रिकॉर्ड के साथ तलब किया है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के वकील दीपक शर्मा की याचिका पर कोर्ट ने यह निर्देश जारी किया। दीपक शर्मा ने मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए चांदी के चढ़ावे में कथित मिलावट, अदला-बदली और गबन की शिकायत दर्ज कराई थी।
क्राइम ब्रांच ने जांच से मुंह फेरा
9 मई को दीपक की शिकायत में क्रिमिनल कॉन्स्पिरेसी, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वास भंग, गबन, रिकॉर्ड में हेराफेरी और कैडमियम युक्त नकली सामग्री की खरीद-बिक्री जैसे गंभीर संज्ञेय अपराधों का जिक्र है। वकील दीपक शर्मा ने आईजीपी क्राइम ब्रांच और एसएसपी क्राइम ब्रांच (इकोनॉमिक ऑफेंस विंग) के समक्ष विस्तृत शिकायत दी थी, जिसमें पूरी जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। जब क्राइम ब्रांच ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की तो शर्मा ने कोर्ट का रुख किया। कोर्ट के आदेश पर क्राइम ब्रांच ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें बताया गया कि शिकायत को प्रशासनिक रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है।


नकली चांदी आई कहां से?
मामला तब सुर्खियों में आया जब पता चला कि मंदिर में जमा लगभग 20 टन चांदी (मूल्य करीब 550 करोड़ रुपये) को टेस्टिंग, मेल्टिंग और प्रोसेसिंग के लिए भेजा गया। जांच में मात्र 5-6 प्रतिशत ही असली चांदी निकली, जबकि बाकी हिस्सा नकली पाया गया, जिसमें कैडमियम, लोहा और अन्य घटिया धातुएं मिलीं। वकील दीपक शर्मा ने जांच की मांग की है कि क्या भक्तों को ज्वैलर्स ने नकली चांदी बेची या असली चढ़ावा बाद में बदला, पतला, चुराया या गलत इस्तेमाल किया गया।

बद्रीनाथ धाम में भी चढ़ावा चोरी
उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपी प्रमोद नौटियाल को दान की गिनती के दौरान एक नहीं, बल्कि कम से कम चार अलग-अलग मौकों पर नकदी चुराते हुए सीसीटीवी कैमरे में देखा गया है। चमोली पुलिस की विशेष जांच टीम ने अब तक 22 जून, 25 जून, 29 जून और 2 जुलाई को हुई दान की गिनती की सीसीटीवी फुटेज की जांच की है। इन चारों दिनों की रिकॉर्डिंग में आरोपी प्रमोद नौटियाल कथित तौर पर कई बार नकदी छिपाकर चोरी करता नजर आया। पुराने सीसीटीवी फुटेज स्टोरेज भर जाने के कारण अपने आप डिलीट हो चुके हैं। ऐसे में यह आशंका भी जताई जा रही है कि आरोपी इससे पहले भी इसी तरह की हरकत करता रहा हो, लेकिन उसके सबूत अब उपलब्ध नहीं हैं। प्रमोद नौटियाल 14 दिन की न्यायिक हिरासत में है। प्रमोद नौटियाल बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष का पीए था। वह वीआईपी प्रोटोकॉल की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ मंदिर में चढ़ावे की गिनती की निगरानी भी करता था। वह वर्ष 2003 में समिति से जुड़ा था और 2014 में उसकी सेवा नियमित कर दी गई थी।
अयोध्या: चढ़ावा चोरी की जांच पूरी, एसआईटी रिपोर्ट कभी भी
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले की एसआईटी जांच लगभग पूरी हो गई है लेकिन अभी अंतिम रिपोर्ट शासन को नहीं सौंपी गई है। सूत्रों के अनुसार एसआईटी अगले दो दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है, जो चढ़ावे की गणना व अन्य व्यवस्थाओं में पाई गई खामियों व चूक को सुधारने के सुझावों पर केंद्रित होगी। बुधवार को अंतिम जांच रिपोर्ट की समय सीमा समाप्त हो गई है पर जांच रिपोर्ट को लेकर गृह विभाग तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी चुप्पी साधे हैं और इसकी आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई। माना जा रहा है कि एसआईटी अगले 24 से 48 घंटे के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है। इस रिपोर्ट में कथित चढ़ावा चोरी से जुड़े तथ्यों, जिम्मेदार लोगों की भूमिका और व्यवस्थागत खामियों पर महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आ सकते हैं। रिपोर्ट में केवल गिरफ्तार संविदा कर्मियों की भूमिका ही नहीं, बल्कि चढ़ावे की व्यवस्था की निगरानी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही पर भी निष्कर्ष दिए गए हैं। एसआईटी गणना प्रक्रिया में सुधार के लिए खासकर बड़े बदलावों के सुझाव दिए गए हैं।
क्या है अंतिम जांच रिपोर्ट में?
सूत्रों के मुताबिक, जांच में ट्रस्ट पदाधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया और एसओपी में बदलाव को चोरी की मुख्य वजह माना गया है। रिपोर्ट में टिन्नू यादव की भूमिका पहले से कहीं अधिक स्पष्ट रूप से सामने आई है, जबकि ट्रस्ट पूर्व महासचिव चंपत राय को प्रबंधन में लापरवाही और निगरानी में नाकामी का जिम्मेदार ठहराया गया है, क्योंकि पूरा प्रबंधन उनके अधीन था। जांच में ये भी पता चला है कि दान पात्रों (हुंडियों) की चाबियां भी टिन्नू के पास रहती थीं, जिसके लिए चंपत राय को परोक्ष रूप से जिम्मेदार माना गया है। एसआईटी की विस्तृत जांच रिपोर्ट में चंपत राय को पूरी तरह से क्लीन चिट नहीं दी गई है। पूरी व्यवस्था उनके अधीन होने के कारण उन्हें मंदिर प्रबंधन में गंभीर लापरवाही और निगरानी में पूरी तरह नाकाम रहने का जिम्मेदार माना गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमों को कमजोर किए जाने से ही मंदिर में चोरी की गुंजाइश बनी। जिन गणनाकर्मियों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। वो वास्तव में आउटसोर्स हाउसकीपिंग कर्मचारी थे, जिनसे नियमों के खिलाफ जाकर चढ़ावे की गिनती कराई जा रही थी। इन कर्मचारियों की भर्ती बिना नियमों का पालन किए सिर्फ ट्रस्ट पदाधिकारियों की सिफारिश पर की गई थी।
गुजरात के अंबाजी मंदिर में भी चोरी
गुजरात के प्रसिद्ध अंबाजी मंदिर में चढावा चोरी का मामला प्रकाश में आया है, मंदिर प्रशासक की शिकायत पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर तीन युवकों को गिरफ्तार कर लिया है, तीनों आरोपी को पुलिस रिमांड पर सौंप दिया गया है। मंदिर प्रशासन को सीसीटीवी फुटेज में चढावे की गिनती के दौरान एक युवक चोरी करते नजर आया था। एक युवक की जेब से करीब एक लाख रु के नोट का बंडल गिर जाने के बाद यह चोरी पकडी गई। अभी तक तीन आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, अभी आरोपी रिमांड पर सौंपे गये हैं। इस घटना के बाद मंदिर प्रशासन ने चढावे की गिनती को पारदर्शी बनाने के लिए मंदिर के बाहर स्क्रीन पर लाइव स्ट्रीमिंग शुरु कर दी है।




