Newspublicई-पेपरउत्तर प्रदेशवाराणसीशासन प्रशासन

संजय कुशवाहा ने नगर आयुक्त व आदमपुर थाना को बनाया अपना पालतू “टॉमी”,नगर निगम व स्थानीय पुलिस अवैध वसूली की कमान थामी

बसों का अवैध अड्डा या प्रशासन की खुली छूट? नगर आयुक्त और आदमपुर पुलिस को हादसा होने का इंतजार!

  • गंगानगर कॉलोनी में स्कूल के सामने भारी बसों की पार्किंग, प्रति बस एक हजार से 15सौ रुपए की वसूली
  • दो बच्चों के पैरों पर बस का पहिया चढ़ने के दावे के बाद भी नहीं टूटी जिम्मेदार विभागों की नींद
  • बसों के आवागमन के लिए प्राथमिक विद्यालय की दीवार तोड़ने का आरोप
  • नगर निगम-शिक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल
  • शिकायतकर्ता को जान से मारने की धमकी का आरोप, पुलिस की कार्यप्रणाली कठघरे में
  • पुलिस, नगर निगम व परिवहन विभाग के कर्मियों को सुविधा शुल्क से मैनेज करने का आरोप
  • जेपीएम स्कूल की आड़ में मीटिंग हॉल के नाम पर लॉज संचालन की जांच की मांग

वाराणसी। आदमपुर थाना क्षेत्र की ए-16/1 गंगानगर कॉलोनी में कथित अवैध बस पार्किंग का मामला अब केवल सड़क पर वाहन खड़े करने का विवाद नहीं रह गया है। यहां यदि स्थानीय लोगों के आरोप सही हैं तो मामला स्कूली बच्चों की सुरक्षा, सार्वजनिक सड़क के कथित व्यावसायिक इस्तेमाल, भारी वाहनों की आवाजाही, कथित वसूली, सरकारी, संस्थागत संपत्ति में बदलाव और शिकायतकर्ता को धमकी तक पहुंच चुका है। कॉलोनी की सड़क पर बड़ी पर्यटक बसों की आवाजाही और पार्किंग कथित रूप से लंबे समय से हो रही है, स्कूल सामने है और दुर्घटना का खतरा बताया जा रहा है, तो जिम्मेदार विभागों की निगरानी आखिर कहां है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि संजय कुशवाहा द्वारा सड़क पर बड़ी पर्यटक बसों और अन्य वाहनों को खड़ा कराया जाता है तथा प्रति बस प्रतिदिन करीब 1000 से 1500 रुपये तक लिए जाने की कथित व्यवस्था है। यदि सार्वजनिक सड़क को निजी पार्किंग के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है तो नगर निगम, यातायात पुलिस और परिवहन विभाग के लिए यह जांच का सीधा विषय है। मामले की गंभीरता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि पार्किंग स्थल के आसपास प्राथमिक विद्यालय है। स्थानीय लोगों का दावा है कि पहले दो बच्चों के पैरों पर बस का पहिया चढ़ने जैसी घटनाएं हो चुकी हैं। यदि यह दावा सही है तो सवाल केवल पार्किंग का नहीं, बल्कि अगले संभावित बड़े हादसे को रोकने की प्रशासनिक जिम्मेदारी का है। क्या आदमपुर पुलिस को इस कथित पार्किंग की जानकारी नहीं है? यदि जानकारी नहीं है तो गश्त और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठेंगे और यदि जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? वहीं नगर निगम बताये कि सार्वजनिक सड़क पर कथित व्यावसायिक पार्किंग की अनुमति किस आधार पर है और यदि अनुमति नहीं है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आरोप यह भी है कि बसों को आसानी से निकालने के लिए प्राथमिक विद्यालय की करीब चार फुट ऊंची दीवार को तोड़कर छोटा कर दिया गया। यदि विद्यालय की संपत्ति में ऐसा बदलाव हुआ है तो यह जांच का गंभीर विषय है कि किसकी अनुमति से ऐसा किया गया और संबंधित विभागों ने इस पर क्या कार्रवाई की। शिकायतकर्ता अरविंद कुमार को कथित जान से मारने की धमकी का मामला पुलिस के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। आरोप है कि राम जनम ने शिकायत करने और शिकायत की जानकारी सामने आने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। शिकायतकर्ता की सुरक्षा और धमकी के आरोप की निष्पक्ष जांच पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

सड़क किसकी, पार्किंग किसकी और कमाई किसकी?

गंगानगर कॉलोनी की सड़क यदि सार्वजनिक उपयोग के लिए है तो उस पर लगातार भारी बसों की पार्किंग कैसे हो रही है, यह नगर निगम और पुलिस दोनों के लिए जांच का विषय होना चाहिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि बसें खुलेआम सड़क पर खड़ी होती हैं और उनके आने-जाने से रास्ता प्रभावित होता है। ऐसे में पार्किंग के लिए कोई वैध अनुमति किसने दी। यदि अनुमति है तो उसकी शर्तें क्या हैं? यदि अनुमति नहीं है तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि सड़क को निजी व्यावसायिक गतिविधि के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है तो कथित रूप से प्रति बस रकम लिए जाने की शिकायत की जांच कौन करेगा।

बच्चों की सुरक्षा पर प्रशासन मौन क्यों?

स्कूल के आसपास भारी वाहनों की आवाजाही अपने आप में गंभीर चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों के अनुसार दो बच्चों के पैरों पर बस का पहिया चढ़ने की घटनाएं पहले हो चुकी हैं। पूर्व में हुई घटनाएं को संज्ञान में लेते हुए प्रशासन को स्कूल समय में भारी वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करनी चाहिए थी। नो-पार्किंग व्यवस्था, यातायात निगरानी और स्कूल के आसपास सुरक्षा इंतजाम किए जाने चाहिए थे। सवाल यह है कि कार्रवाई हादसे के बाद होगी या हादसा होने से पहले, स्कूल की दीवार टूटी तो किसकी अनुमति से, बसों की आवाजाही आसान बनाने के लिए प्राथमिक विद्यालय की करीब चार फुट ऊंची दीवार को तोड़कर छोटा किए जाने का आरोप कम गंभीर नहीं है। यदि विद्यालय की संपत्ति में बदलाव किया गया है तो शिक्षा विभाग को मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने रखनी चाहिए। दीवार किसने तोड़ी, कब तोड़ी, किसकी अनुमति से तोड़ी क्या कोई लिखित आदेश था। क्या विद्यालय प्रशासन ने आपत्ति की?

धमकी के आरोप ने पुलिस को कटघरे में खड़ा किया

शिकायतकर्ता अरविंद कुमार को कथित जान से मारने की धमकी का आरोप मामले को कानून-व्यवस्था के स्तर तक ले जाता है। आरोप है कि शिकायत के कारण उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। यहां पुलिस की भूमिका बेहद स्पष्ट है शिकायतकर्ता का बयान दर्ज करना, धमकी के आरोप की जांच करना और यदि प्रथमदृष्टया अपराध बनता है तो विधिक कार्रवाई करना। शिकायतकर्ता ने लिखित शिकायत दी है बावजूद इसके आदमपुर पुलिस यह स्पष्ट करे कि उस पर क्या कार्रवाई की गई। शिकायत करना नागरिक का अधिकार है। शिकायत के कारण शिकायतकर्ता भयभीत हो जाए तो यह पुलिस व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत है।

कथित सुविधा शुल्क की जांच कौन करेगा?

स्थानीय लोगों ने पुलिस, नगर निगम और परिवहन विभाग के कुछ कर्मियों को कथित सुविधा शुल्क देकर मामला ‘मैनेज’ किए जाने का आरोप लगाया है। यदि शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो आरोप को सिर्फ आरोप कहकर छोड़ने के बजाय संबंधित विभागों को इसकी निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। नगर निगम, वाराणसी पुलिस यह स्पष्ट करे कि किस अधिकारी ने मौके का निरीक्षण किया और कब किया। क्या रिपोर्ट बनी कार्रवाई हुई कि नहीं, पार्किंग की अनुमति किसने दी।

स्कूल की आड़ में लॉन-लॉज संचालन का आरोप भी जांच के घेरे में

जेपीएम स्कूल की आड़ में मीटिंग हॉल के नाम पर लॉन और लॉज संचालित किए जाने का आरोप क्षेत्रीय लोगों ने लगाया है। यदि ऐसा कोई व्यावसायिक संचालन हो रहा है तो भवन का स्वीकृत मानचित्र, वास्तविक उपयोग, अग्निशमन सुरक्षा, पार्किंग व्यवस्था, व्यापारिक अनुमति और अन्य वैधानिक दस्तावेजों की जांच आवश्यक है। यदि आरोप गलत हैं तो संबंधित पक्ष दस्तावेजों के माध्यम से स्थिति स्पष्ट कर सकता है। यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

नगर आयुक्त और आदमपुर पुलिस के सामने सीधा सवाल

गंगानगर कॉलोनी का मामला अब कागजी शिकायतों से आगे बढ़कर मौके की वास्तविक स्थिति की जांच मांग रहा है। नगर निगम को यह देखना होगा कि सार्वजनिक सड़क पर किसी प्रकार की अनधिकृत व्यावसायिक पार्किंग तो नहीं हो रही। पुलिस को भारी वाहनों की आवाजाही और शिकायतकर्ता को कथित धमकी के मामले में कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। परिवहन विभाग को वाहनों की वैधता और पार्किंग संबंधी नियमों की जांच करनी चाहिए। शिक्षा विभाग को विद्यालय की दीवार से जुड़े आरोपों की पड़ताल करनी चाहिए। स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण करें और जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करें। क्योंकि सवाल अब सिर्फ इतना नहीं है कि बसें सड़क पर क्यों खड़ी हैं। सवाल यह है कि यदि आरोप सही हैं तो इतने समय से किसकी सह पर यह सब चल रहा है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या हादसा होने से पहले कार्रवाई होगी?

* सार्वजनिक सड़क पर बड़ी पर्यटक बसों की कथित पार्किंग।
* प्रति बस 1000-1500 रुपए लेने का आरोप।
* स्कूल के सामने भारी वाहनों की आवाजाही।
* दो बच्चों के बस की चपेट में आने का स्थानीय दावा।
* विद्यालय की दीवार तोड़कर छोटा करने का आरोप।
* शिकायतकर्ता को जान से मारने की कथित धमकी।
* पुलिस, नगर निगम व परिवहन विभाग के कुछ कर्मियों पर कथित सुविधा शुल्क का आरोप।
* जेपीएम स्कूल की आड़ में लॉन व लॉज चलाने का आरोप।
* पार्किंग, भवन मानचित्र, अग्निशमन और व्यावसायिक अनुमति की जांच की मांग।
* नगर आयुक्त और आदमपुर पुलिस की निष्क्रियता पर स्थानीय लोगों के सवाल।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button