Newspublicई-पेपरउत्तर प्रदेशवाराणसीशासन प्रशासन

पीएम के क्षेत्र से शिवपुर से गुप्ता गेस्ट हाउस में देह व्यापार,स्थानीय पुलिस बनी हिस्सेदार

भगवान शिव की नगरी का हाल

  • पीएम के क्षेत्र में गुप्ता गेस्ट हाउस पर गंभीर आरोप, देह व्यापार के कथित नेटवर्क को लेकर उठे सवाल
  • स्थानीय पुलिस की कथित भूमिका पर भी सवाल, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
  • अचूक संघर्ष के लिए सौरभ पांडेय की रिपोर्ट

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में गेस्ट हाउसों की आड़ में कथित अनैतिक गतिविधियों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। शिवपुर थाना क्षेत्र स्थित **गुप्ता गेस्ट हाउस** को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप लगाने वालों का दावा है कि गेस्ट हाउस के आसपास कथित रूप से युवतियों को ठहराकर ग्राहकों को कमरे उपलब्ध कराए जाते हैं और इसके एवज में पैसे की वसूली की जाती है।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। गुप्ता गेस्ट हाउस के संचालक और संबंधित पुलिस अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।गेस्ट हाउस को लेकर क्या हैं आरोप?सूत्रों के हवाले से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, गुप्ता गेस्ट हाउस के बगल में स्थित एक भवन के कमरे में कथित रूप से कई युवतियों को ठहराया जाता है। आरोप है कि गेस्ट हाउस में आने वाले ग्राहकों को कथित तौर पर युवतियों के बारे में जानकारी दी जाती है और उसके बाद कमरे उपलब्ध कराने के नाम पर कथित रूप से रकम ली जाती है।यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल एक गेस्ट हाउस की गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संगठित अनैतिक गतिविधियों और स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

 

पहले भी शिकायतें होने का दावा  अचूक संघर्ष  की ओर से दावा किया गया है कि गुप्ता गेस्ट हाउस से संबंधित कथित गतिविधियों को लेकर पहले भी संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया था। रिपोर्ट में यह भी दावा है कि पत्रकारों ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी देकर जांच की मांग की।सवाल यह है कि यदि पुलिस अधिकारियों के सामने इस तरह की शिकायतें और सूचनाएं पहुंची थीं तो क्या उनका सत्यापन कराया गया? क्या गेस्ट हाउस की गतिविधियों की गोपनीय जांच हुई? क्या वहां लगे सीसीटीवी, आगंतुक रजिस्टर, पहचान-पत्रों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की गई?

स्थानीय पुलिस पर मिलीभगत के आरोप मामले में सबसे गंभीर आरोप स्थानीय पुलिस की कथित मिलीभगत को लेकर लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि पुलिस को कथित गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
हालांकि, किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी पर मिलीभगत का आरोप केवल शिकायत अथवा सूत्रों की जानकारी के आधार पर सिद्ध नहीं माना जा सकता। इसकी पुष्टि के लिए विभागीय जांच, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक होगी।

यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।वाराणसी में पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
वाराणसी में गेस्ट हाउस और अन्य प्रतिष्ठानों में अनैतिक गतिविधियों की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। अगस्त 2025 में स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार पुलिस की विशेष टीम ने देह व्यापार, ऑनलाइन सट्टा और अन्य गतिविधियों के खिलाफ अभियान चलाया था तथा कई स्थानों पर कार्रवाई की गई थी।इससे यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या शिवपुर क्षेत्र में भी गेस्ट हाउसों और ऐसे प्रतिष्ठानों की नियमित जांच हो रही है?

संचालकों के पुराने मामलों की भी हो जांच

स्क्रिप्ट में गुप्ता गेस्ट हाउस के संचालक **दद्दू गुप्ता और उनके पुत्र अनमोल गुप्ता** के पूर्व में देह व्यापार से संबंधित मामले में जेल जाने का दावा किया गया है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट की तैयारी के दौरान नहीं हो सकी। यदि वास्तव में उनके खिलाफ पूर्व में ऐसे मामले दर्ज हुए हैं, तो पुलिस को उन मुकदमों की वर्तमान स्थिति, न्यायालयीन परिणाम और जमानत की शर्तों को सार्वजनिक करना चाहिए। केवल पूर्व मुकदमा दर्ज होना किसी व्यक्ति को वर्तमान मामले में दोषी साबित नहीं करता।महिला अपराध की जिम्मेदार अधिकारी से भी सवाल मामले को लेकर महिला एवं अपराध से जुड़े वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक शिकायत पहुंचने का दावा किया गया है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि शिकायत मिलने के बाद क्या प्रारंभिक जांच कराई गई?क्या संबंधित गेस्ट हाउस का भौतिक सत्यापन हुआ?क्या वहां आने-जाने वालों का रिकॉर्ड जांचा गया?

क्या किसी स्वतंत्र टीम से जांच कराई गई?

और यदि आरोप गलत पाए गए तो क्या शिकायतकर्ताओं को इसकी जानकारी दी गई?कार्रवाई नहीं तो बढ़ेगा अविश्वास किसी भी गेस्ट हाउस में वयस्कों का ठहरना अपने आप में अपराध नहीं है। लेकिन यदि किसी प्रतिष्ठान की आड़ में  जबरन देह व्यापार, मानव तस्करी, नाबालिगों का शोषण या अन्य गैरकानूनी गतिविधियां  संचालित होती हैं, तो यह गंभीर आपराधिक मामला बन जाता है और पुलिस की तत्काल कार्रवाई जरूरी हो जाती है। इसीलिए इस मामले में आरोपों को राजनीतिक या व्यक्तिगत विवाद का रूप देने के बजाय  निष्पक्ष और पारदर्शी जांच  सबसे जरूरी है। अब जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब की उम्मीद गुप्ता गेस्ट हाउस को लेकर लगाए गए आरोपों ने शिवपुर पुलिस और जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन को जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।सवाल सिर्फ गुप्ता गेस्ट हाउस का नहीं है।

सवाल यह है कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में किसी भी अवैध गतिविधि की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है।

अब देखना होगा कि इन गंभीर आरोपों पर वाराणसी पुलिस और जिला प्रशासन जांच की दिशा में कोई ठोस कदम उठाते हैं या मामला शिकायतों और आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाता है।

पीएम के क्षेत्र में गुप्ता गेस्ट हाउस बना चकलाघर

स्थानीय पुलिस की मिली भगत से धड़ल्ले से होता है देह व्यापार का गोरख धंधा जिला प्रशासन बना अंधा

वाराणसी! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के क्षेत्र में शिवपुर थाना अंतर्गत गुप्ता गेस्ट हाउस में व्यापार का काम तेजी से सक्रिय है सूत्रों के मुताबिक गुप्ता गेस्ट हाउस के बगल में लेकिन नीले रंग का गेट है उसे गेट के ऊपर एक कमरा है जहां पर 7 से 10 लड़कियों को रखा जाता है गेस्ट हाउस आता है उसे कमरे देकर युवतियों के बारे में जानकारी दी जाती है उसके बाद ज्योति के साथ संबंध बनाने के लिए 1500 से₹2000 की अवैध वसूली भी की जाती है शिवपुर क्षेत्र के इस अनैतिक कार्य को शिवपुर क्षेत्र की पूरी जनता जानती है शिवपुर क्षेत्र का बच्चा-बच्चा जानता है इस पूरे मामले को अचूक संघर्ष ने प्रमुखता के साथ उजागर किया लेकिन हिस्सेदार बने जिम्मेदार इस पर कार्यवाही करने से भाग रहे हैं। उक्त प्रकरण को लेकर अचूक संघर्ष का पत्रकार डीपीपी वरुण जोन प्रमोद कुमार व एडीसीपी निम्रता श्रीवास्तव से मिला और गुप्ता गेस्ट हाउस में हो रहे हैं अवैध कार्यों की विस्तृत जानकारी भी दी परंतु समझ नहीं आ रहा की महिला होने के बावजूद भी निम्रता श्रीवास्तव इस पर कोई कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं कर रही !

शासन प्रशासन के मौन रवैया पर उठा प्रश्न चिन्ह ?

सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर अचूक संघर्ष ने गुप्ता गेस्ट हाउस के गोरख धंधे का भंडाफोड़ किया वह वाराणसी के जिम्मेदार अधिकारियों से उचित जांच की मांग की परंतु हिस्सेदारी होने की वजह से कोई भी अधिकारी कार्यवाही करने या जांच करने के लिए कोई ठोस कार्यवाही नहीं किया गया आपको बताते चलें कि गुप्ता गेस्ट हाउस के संचालक दद्दू गुप्ता वह उसका पुत्र अनमोल गुप्ता देह व्यापार के मामले में जेल का हवा खा चुके हैं पर जमानत पर बाहर आने के बाद देव व्यापार का काम और तेजी से सक्रिय हो गया सबसे अहम सवाल यह है कि महिला एवं अपराध की एडीसीपी निम्रता श्रीवास्तव एक महिला होने के बाद भी इस पर कोई बड़ी एक्शन के मूड में नहीं दिखे ना ही हिस्सेदार बने शिवपुर थाना प्रभारी को निलंबित किया गया !

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button